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'व्हीलचेयर मैन' के नाम अपनी पहचान बनाने वाला इमरान अपने जैसों को बना रहा आत्मनिर्भर

ख़ुद के लिये सब जीते हैं, लेकिन दूसरों के लिये जीने वाले कम ही लोग मिलते हैं। कुछ यही हाल ज़िले में 'व्हीलचेयर मैन' के नाम अपनी पहचान बनाने वाले इमरान कुरैशी का है। क़रीब 9 सालों से व्हीलचेयर पर बैठे-बैठे ही करतब, पेंटिंग जैसे काम बड़े दिखाने वाले इमरान ने अब अपने जैसों के लिये जीना शुरु कर दिया है। यहां शहर के एक गेस्ट हाउस में स्पाइनल कॉर्ड इंजरी से पीड़ित लोगों के लिए ऐक्टिव रिहैब का वर्कशॉप लगाया और ऐसे लोगों को ज़िंदगी जीने के टिप्स के साथ ज़रूरी सामान भी दिये।

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priyankajoshiBy priyankajoshi

Published on 13 Feb 2018 6:23 AM GMT

व्हीलचेयर मैन के नाम अपनी पहचान बनाने वाला इमरान अपने जैसों को बना रहा आत्मनिर्भर
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सुल्तानपुर: ख़ुद के लिये सब जीते हैं, लेकिन दूसरों के लिये जीने वाले कम ही लोग मिलते हैं। कुछ यही हाल ज़िले में 'व्हीलचेयर मैन' के नाम अपनी पहचान बनाने वाले इमरान कुरैशी का है। क़रीब 9 सालों से व्हीलचेयर पर बैठे-बैठे ही करतब, पेंटिंग जैसे और कई बड़े काम दिखाने वाले इमरान ने अब अपने जैसों के लिये जीना शुरु कर दिया है। यहां शहर के एक गेस्ट हाउस में स्पाइनल कॉर्ड इंजरी से पीड़ित लोगों के लिए ऐक्टिव रिहैब का वर्कशॉप लगाया। ऐसे लोगों को ज़िंदगी जीने के टिप्स के साथ ज़रूरी सामान भी दिये।

18 से 20 लोगों के लिए ऐक्टिव रिहैब की लगी वर्कशॉप

इमरान द्वारा शहर के गार्डन व्यू गेस्ट हाउस में स्पाइनल कॉर्ड इंजरी से पीड़ित 18 से 20 लोगों के लिए ऐक्टिव रिहैब का वर्कशॉप प्रोग्राम आर्गनाइज़ हुआ। प्रोग्राम में शामिल हुए ये सभी वो पीड़ित थे जिनकी अलग-अलग हादसों में स्पाइन इंजरी हुई है।

क्या है स्पाइन इंजरी

इमरान के अनुसार स्पाइन इंजरी के बाद व्यक्ति के कमर के नीचे का हिस्सा बेजान हो जाता है। टॉयलेट और पेशाब का कुछ भी पता नहीं चलता। बेड (बिस्तर) पे ज्यादा दिन तक लेटने से जख्म भी हो जाते हैं और अभी तक स्पाइनल इंजरी का कोई इलाज नहीं आया है। ऐसे में इससे पीड़ित व्यक्ति अपनी जिंदगी से हार मान जाते हैं और मौत को गले लगाने का इंतज़ार करते हैं।

फ्री ऑफ कास्ट दिया पीड़ितों को ये ज़रूरी सामान

इमरान ने ऐसे ही लोगों को कैम्प में बुलाया और पीड़ितों को व्हीलचेयर, गद्दा, सीट, और मेडिकल के सामान फ्री आफ कॉस्ट दिया। उन्होंंने बताया कि दिए गए ये सामन नीना फाउंडेशन (मुंबई) के माध्यम से उन्हें मिला था जिसे उन्होंंने पीड़ितों में बांटा है। इसके साथ ही इमरान ने कैम्प में इन पीड़ितों को सिखाया कि व्हीलचेयर पे रह के वो अपनी रोजमर्रा की जिंदगी को कैसे आसान कर सकते हैं। जख्म से कैसे बच सकते हैं और बिना किसी के सहारे अपनी जिंदगी को कैसे खूबसूरत बना सकते हैं।

आपको बता दें कि इमरान कुरैशी द्वारा इसी तरह की वर्कशॉप का आयोजन मुम्बई, दिल्ली, गोवा, गुजरात और पंजाब जैसे जगहों पर भी किया जा चुका है। यहां भी उन्होंने व्हीलचेयर पे रहने वाले लोगों को ट्रेनिंग दिया और ऐसे लोगों से लगातार मुलाक़ात करते रहते हैं जिससे इन सबकी ज़िंदगी बेहतर बन सके।

कौन हैं इमरान कुरैशी

ज़िले ज्ञानीपुर निवासी किसान शिफाअत उल्ला के घर 28 जनवरी 1990 में इमरान कुरैशी का जन्म हुआ था। परिजनों के मुताबिक, 2007 में जब इमरान 11 क्लास में था, उस वक्त मल्टीपल ऐक्स्क्लोरोसिस की वजह से आंखों की रोशनी चली गई थी। काफी जद्दोजहद और इलाज के बाद रोशनी वापस आई। साल 2009 में अचानक की उसके पैर सुन हो गए। इलाज के लिए मुंबई तक गए, लेकिन डाक्टरों ने इसे लाइलाज बीमारी बताया। इसके बाद परिजनों ने मुंबई के पॅराप्लेजिक फाउंडेशन द्वारा चलाए जा रहे पुनर्वास केंद्र में एडमिशन करा दिया। यहां उसने हौसला मजबूत कर जिंदगी के सपनों को साकार करने का परिश्रम शुरु किया।

अक्षय कुमार के साथ 'Holiday' में कर चुका है काम

देखते ही देखते इमरान व्हीलचेयर पर करतब दिखाने लगा। लोग इसे व्हीलचेयर मैन के नाम से बुलाने लगे। इसी बीच मुंबई में पुनर्वास केंद्र में एक्टर्स से इसकी मुलाकात हुई। वहीं, 2014 की बॉलीवुड फिल्म 'Holiday' में चांस मिला। इसमें एक्टर अक्षय कुमार के साथ उसने काम किया।

इमरान को पेंटिंग करना पसंद है। साल 2014 स्टेट लेवल गुजरात में पेंटिंग कॉम्पिटिशन पहला ख़िताब हासिल किया। 2016 पंजाब के जलंधर में स्टेट लेवल स्विमिंग कॉम्पिटिशन में गोल्ड अवॉर्ड हासिल किया। 2017 में बठिनंडा में हुई एक इंटरनेशनल दिव्यांग पैरा कॉम्पिटिशन में भाग लेकर सिल्वर अवॉर्ड हासिल किया।

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इन्होंने पत्रकारीय जीवन की शुरुआत नई दिल्ली में एनडीटीवी से की। इसके अलावा हिंदुस्तान लखनऊ में भी इटर्नशिप किया। वर्तमान में वेब पोर्टल न्यूज़ ट्रैक में दो साल से उप संपादक के पद पर कार्यरत है।

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