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हकीकत : पहले से जमे उद्यमियों की खैर खबर लेने की फुर्सत नहीं

raghvendra

raghvendraBy raghvendra

Published on 27 Jan 2018 12:49 PM GMT

हकीकत : पहले से जमे उद्यमियों की खैर खबर लेने की फुर्सत नहीं
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राजकुमार उपाध्याय

लखनऊ। योगी सरकार निवेशकों को लुभाने के लिए प्रदेश में एक बड़ा जलसा (इन्वेस्टर्स समिट) करने जा रही है, इसे सफल बनाने के लिए बड़े शहरों में रोड शो भी हुए। लेकिन राज्य में पहले से जमे उद्यमियों की खैर खबर लेने की फुर्सत सरकारी मशीनरी के पास नहीं है। व्यापारियों को सुविधाएं देने वाले विभाग ही उनके साथ ‘चोर—सिपाही’ खेल रहे हैं।

ताजा मामले में गाजियाबाद के एक व्यवसायी 40 साल से अपने इंडस्ट्रियल प्लाट का मालिकाना हक पाने के लिए उप्र राज्य औदयोगिक विकास प्राधिकरण (यूपीएसआईडीसी) के चक्कर काट रहे हैं। उन्हें हक नहीं मिला, उल्टे निगम ने उन्हें आवंटित जमीन का बाकायदा विज्ञापन निकाला और उसका आवंटन दूसरे के पक्ष में कर दिया। यह जमीन अब एक अन्य व्यवसायी के पक्ष में हस्तांतरित करने की तैयारी है।

बताया जाता है कि निगम में ऐसे खेल वर्षों से जारी है। निगम में अफसरों की धौंस और कर्मचारियों की कारगुजारी के आगे व्यापारियों की आवाज गुम हो रही है। मेसर्स तुलीसन्स इण्डस्ट्रियल मशीन्स प्रा. लि. को वर्षों पहले 9ए, लोनी रोड, साइट—2, गाजियाबाद में 24930 वर्ग मीटर प्लाट आवंटित हुआ था। उन्होंने भूखण्ड के प्रीमियम का भुगतान भी किया। उस पर वह उद्योग लगाते इससे पहले करोड़ों की इस जमीन को अफसरों की नजर लग गई। तभी से निगम और तुलीसन्स के बीच विवाद शुरू हो गया।

निगम के अफसर वह जमीन दूसरी इकाईयों को आवंटित करने के फेर में पड़ गए। अपनी जमीन बचाने के लिए उन्होंने न्यायालय की शरण ली। कोर्ट ने भी यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया। बाद में निगम के क्षेत्रीय महाप्रबंधक जसबन्त सिंह ने महाप्रबंधक (विधि) की राय से जमीन को तुलीसन्स के पक्ष में मान्यता देने की संस्तुति भी की। पर इसका कोई असर नहीं दिखा। कागजी घोड़े दौड़ाने में महारत हासिल कर चुके अफसरों ने एक नया रास्ता निकाल लिया। उनको आवंटित जमीन निरस्त किए बिना उसे दूसरी इकाई को बेचने की तैयारी कर ली।

निरस्त किए बिना जमीन दूसरी इकाई को दे दी

भूमि पर तुलीसन्स का ही कब्जा था पर निगम ने इसी जमीन को बेचने के लिए विज्ञापन प्रकाशित करा दिया। इसमें दो आवेदन आए। फिर साक्षात्कार के बाद नये आवेदनकर्ता ‘प्लास्टोकेम’ के पक्ष में भूखण्ड की लीज डीड कर दी गई। जबकि इस जमीन पर निगम का भौतिक कब्जा नहीं था और निबंधक प्रथम गाजियाबाद के मुताबिक अब तक लीजडीड मूल आवंटी के नाम पर ही था। पर अफसरों पर इसका कोई असर नहीं पड़ा।

निगम के अधिकारियों के मुताबिक मेसर्स तुलीसन्स के पक्ष में पूर्व में की गई लीज डीड को निरस्त कराने के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। फिलहाल नये आवंटी ने जब भूमि आवंटन के दो महीने बाद उद्योग लगाने के स्थान पर भूखण्ड के उपविभाजन करने का प्रस्ताव दिया, उसे उसकी स्वीकृति भी मिल गई। पर बाद में खुद को फंसता देख निगम के अफसरों ने खुद यह स्वीकृति वापस ले ली और भूखण्ड का हस्तांतरण निरस्त कर दिया।

अब दूसरे आवंटी ने यही जमीन एक अन्य इकाई के पक्ष में हस्तांतरित करने का प्रस्ताव दिया है। विभागीय जानकारों के मुताबिक निगम के अफसर यह भूमि इस इकाई को देने की तैयारी में है, जबकि निगम के पास इस भूखण्ड का भौतिक कब्जा नहीं है। इस बारे में निगम का कोई भी अधिकारी कुछ बोलने को तैयार नहीं है।

इन्वेस्टर्स समिट में उठाएंगे आवाज

तुलीसन्स के मुख्य प्रबंधक कंवल तुली का कहना है कि वह वर्षों से यूपीएसआईडीसी में हो रही धांधलियों से मानसिक व आर्थिक रूप से परेशान हैं। इसके चलते वह अपना उद्योग स्थापित नहीं कर पाएं। मुख्यमंत्री कार्यालय से इस प्रकरण की जांच के निर्देश के बाद बाद विभागीय जांच में उनके सभी तथ्यों की प्रमाणिकता सही पाई गई। फिर भी उन्हें न्याय नहीं मिल पा रहा है। तुलीसन का कहना है कि वह आगामी इन्वेस्टर्स समिट में अपनी आवाज उठाएंगे।

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राघवेंद्र प्रसाद मिश्र जो पत्रकारिता में डिप्लोमा करने के बाद एक छोटे से संस्थान से अपने कॅरियर की शुरुआत की और बाद में रायपुर से प्रकाशित दैनिक हरिभूमि व भाष्कर जैसे अखबारों में काम करने का मौका मिला। राघवेंद्र को रिपोर्टिंग व एडिटिंग का 10 साल का अनुभव है। इस दौरान इनकी कई स्टोरी व लेख छोटे बड़े अखबार व पोर्टलों में छपी, जिसकी काफी चर्चा भी हुई।

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