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चलती ट्रेन से युवक को फेंका, सीट पर बैठने को लेकर हुआ था विवाद

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Published on 31 Aug 2016 12:01 PM GMT

चलती ट्रेन से युवक को फेंका, सीट पर बैठने को लेकर हुआ था विवाद
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फतेहपुर: थरियांव थाने के एकारी टीसी रेलवे क्रासिंग के पास कुछ लोगों ने एक युवक को चलती ट्रेन से नीचे फेंक दिया। ट्रैक के किनारे घायल युवक दो घंटे तक बेहोश पड़ा रहा। स्थानीय लोगों ने पुलिस और एंबुलेंस को फोन भी किया, लेकिन वो दो घंटे बाद मौके पर पहुंची। युवक को हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है।

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क्‍या है पूरा मामला

-युवक के पैर और हाथ में काफी चोटें आई हैं।

-घायल युवक दीपू दास खुद को असम का रहने वाला बता रहा है।

-वह दिल्ली में किसी ठेकेदार के साथ काम करता है।

-बुधवार को वह 'संपर्क क्रांति' ट्रेन से दिल्ली जा रहा था।

-इलाहाबाद से ट्रेन के निकलते ही सीट पर बैठने को लेकर कुछ लोगों से उसका विवाद हुआ।

-इसके बाद वह कोच के दरवाजे पर खड़ा हो गया।

-अचानक किसी ने चलती ट्रेन में पीछे से उसे धक्का दे दिया।

क्या कहते हैं डॉक्टर सुधीर श्रीवास्तव?

जिला हॉस्पिटल के डॉक्टर कहते हैं कि इस मामले में स्थानीय पुलिस और जीआरपी दोनों का रवैया बेहद शर्मनाक और गैर जिम्मेदाराना है। युवक के हाथ और पैर में चोट आई है जिसका इलाज चल रहा है।

क्या कहती है पुलिस?

जीआरपी का कहना है कि घटना की सुचना मिली थी लेकिन यह हमारे क्षेत्र से बाहर का मामला है। थरियांव थाना प्रभारी का कहना है की ना तो हमारे थाने की पुलिस ने घायल युवक को हॉस्पिटल पहुंचाया और ना ही पूछताछ की जरूरत ही है। जबकि एसपी के पीआरओ ने सोशल मीडिया द्वारा पुलिस द्वारा घायल युवक को हॉस्पिटल पहुंचाने की बात प्रसारित की है।

बड़ा सवाल यह है की रेल सुरक्षा पर केंद्र के दावे और नागरिक सुरक्षा पर प्रदेश सरकार के दावे कुछ भी हो लेकिन जिंदगी की जंग लड़ रहे घायल असमी युवक के प्रति इंसानियत दिखाने की भी ज़हमत पुलिस द्वारा ना उठाया जाना सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है।

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