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यह भाजपा नेत्री बन गई संन्यासी, इस धर्मगुरु ने पूरी कराई प्रक्रिया

आचार्य महामण्डलेश्वर अवधेशानंद गिरि महाराज ने करीब 200 संन्यासिनियों को मंत्र देकर संन्यास प्रक्रिया को पूर्ण कराया।

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ShreyaPublished By Shreya

Published on 8 April 2021 2:48 PM GMT

यह भाजपा नेत्री बन गई संन्यासी, इस धर्मगुरु ने पूरी कराई प्रक्रिया
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यह भाजपा नेत्री बन गई संन्यासी, इस धर्मगुरु ने पूरी कराई प्रक्रिया (फोटो- सोशल मीडिया)

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हरिद्वार: नागा संन्यासियों के सबसे प्राचीन व बड़ा अखाड़ा श्रीपंच दशनाम जूना अखाड़े में नागा संन्यासियों को दीक्षित करने का प्रथम चरण आज माई बाडे की संन्यासिनी माइयों के संस्कार के साथ पूर्ण हो गया है। इससे दो दिन पूर्व पुरूष नागा संन्यासी दीक्षित किये गये थे।

दूसरा चरण शुरू होगा 25 अप्रैल को

आज प्रात: ब्रहममुहर्त में जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामण्डलेश्वर अवधेशानंद गिरि महाराज ने लगभग 200 संन्यासिनियों को प्रेयस मंत्र देकर संन्यास प्रक्रिया को पूर्ण कराया। संन्यास दीक्षा का दूसरा चरण आगामी 25 अप्रैल को प्रारम्भ होगा, जिसमें हजारों नागा संन्यासी तथा संन्यासिनी दीक्षा लेंगी। इसके लिए पंजीकरण प्रारम्भ हो गया है।

दीक्षा लेने वालों में नागा संन्यासिनी माई कैलाश गिरि तथा नागा संन्यासी महंत रमेश गिरि का नाम विशेष उल्लेखनीय है। यह दोनों ही दूधेश्वर पीठाधीश्वर श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज के शिष्य हैं। माई कैलाश गिरि स्नातक हैं और सामाजिक क्षेत्र के साथ साथ राजनीति में भी सक्रिय रही हैं।

(फोटो- सोशल मीडिया)

हरनंदेश्वर महादेव मन्दिर हिण्डन गाजियाबाद निवासी माई कैलाश गिरि का पूर्व नाम सरोज शर्मा था जो कि संन्यास दीक्षा के बाद कैलाश गिरि हो गया है। माई कैलाश गिरि भाजपा के सांस्कृतिक प्रकोष्ठ की जिलाध्यक्ष के साथ साथ प्रदेश स्तर पर भी कई पदों पर रह चुकी हैं। श्रीमहंत नारायण गिरि से प्रभावित होकर उन्होंने 2010 में कैलाश मानसरोवर की यात्रा की और तभी से वह धर्म की ओर आकर्षित हो गयीं। हरिद्वार कुम्भ में उन्होंने पूर्ण रूप से संन्यास ग्रहण कर लिया।

वृन्दावन के रहने वाले हैं रमेश गिरि

श्रीमहंत नारायण गिरि के दूसरे शिष्य महंत रमेश गिरि वृन्दावन के रहने वाले हैं। वह उत्तर रेलवे में सुरक्षा अधिकारी पद से हाल में ही सेवानिवृत हुए हैं। उन्होंने बताया सर्विस के दौरान उनकी भेंट श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज से हुयी और तभी से उनका ध्यान अध्यात्म की हो आकृष्ट हो गया, जिसके चलते सेवानिवृत होने के बाद उन्होंने संन्यास ग्रहण कर लिया अब वह वृन्दावन में आश्रम बना कर रह रहे हैं।

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