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Chetna Gala Sinha: चेतना सिन्हा जिन्होंने बदल दी ग्रामीण महिलाओं की जिंदगी

चेतना सिन्हा के बारे में बताते हैं जिन्होंने सन् 1997 में, भारत में ग्रामीण महिलाओं के लिए पहले मन देसी महिला सहकारी बैंक की स्थापना की।

Chetna Sinha who changed the lives of rural women
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चेतना गाला सिन्हा (फोटो-सोशल मीडिया) 

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Chetna Gala Sinha: शायद आपने चेतना गाला सिन्हा का नाम सुना हो। यह एक भारतीय सामाजिक कार्यकर्ता हैं। जो महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में काम कर ही हैं। वह अपने उद्यमशीलता कौशल, जमीन तक पहुंच और उत्पादन के साधनों को सिखाकर ग्रामीण भारत के सूखाग्रस्त क्षेत्रों में महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए काम कर रही हैं।

चेतना सिन्हा ने 1997 में, उन्होंने भारत में ग्रामीण महिलाओं के लिए पहले मन देसी महिला सहकारी बैंक की स्थापना की। मन देसी बैंक के पास 100,000 खाताधारक थे और 2018 में बैंक ने अत्यंत छोटे स्तर पर महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए $ 50 मिलियन से अधिक का ऋण दिया।

मन देसी फाउंडेशन ग्रामीणस्तर पर सूक्ष्म महिला उद्यमियों के लिए बिजनेस स्कूल, सामुदायिक रेडियो और चैंबर ऑफ कॉमर्स चलाता है। 2018 में इसने लगभग पांच लाख महिलाओं का समर्थन हासिल कर लिया था।

समाजवादी विचारधारा के प्रति आकर्षित

मुंबई में जन्मी चेतना सिन्हा ने 1982 में मुंबई यूनिवर्सिटी से कामर्स में मास्टर डिग्री हासिल की। चेतना गाला सिन्हा को महिलाओं के लिए भारत के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार नारी शक्ति पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।

शुरुआती जीवन की बात करें तो चेतना सिन्हा 1970 और 1980 के दशक में मुंबई में पली बढ़ीं। कॉलेज में रहते हुए उन्होंने बीकॉम किया और मुंबई विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में मास्टर डिग्री प्राप्त की। इसी दौरान वह जयप्रकाश नारायण की समाजवादी विचारधारा के प्रति आकर्षित हुईं।

उन्हें पहला झटका तब लगा जब भारतीय रिजर्व बैंक ने 1996 में उनके आवेदन को इस आधार पर खारिज कर दिया कि कुछ प्रोमोटिंग सदस्य गैर-साक्षर थे। सिन्हा निराश होकर गाँव वापस आ गईं, लेकिन अन्य ग्रामीणों ने उन्हें साक्षरता कक्षाएं आयोजित करने के लिए प्रेरित किया। पांच महीने में, सिन्हा एक नए आवेदन और गांव की महिलाओं के साथ बैंक वापस गईं।

चेतना गाला सिन्हा (फोटो-सोशल मीडिया)

वित्तीय सहायता और भावनात्मक प्रोत्साहन

आज वह वह मन देसी महिला सहकारी बैंक की संस्थापक और अध्यक्ष हैं, यह एक माइक्रोफाइनेंस बैंक है जो ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को उधार देता है। मन देसी महिला सहकारी बैंक ग्रामीण महिलाओं के लिए और भारतीय रिजर्व बैंक से सहकारी लाइसेंस प्राप्त करने वाला देश का पहला बैंक था।

जिसे अपने 1,335 सदस्यों में से रुपये 708,000 की कार्यशील पूंजी के साथ 1997 में स्थापित किया गया था। यह बैंक ग्रामीण महिलाओं को सफल उद्यमी बनने के लिए वित्तीय सहायता और भावनात्मक प्रोत्साहन प्रदान करता है।

चेतना सिन्हा का यह अभियान दो दशकों के बाद भी प्रासंगिक बना रहा, जब प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने विमुद्रीकरण की घोषणा की, जिससे स्थानीय विक्रेता संकट में आ गए। कुछ ने तो अपना माल बाजार की कीमतों से कम पर बेच दिया।

मन देशी बैंक के अधिकारियों ने भारतीय स्टेट बैंक से सिक्के एकत्र किए और घर-घर और साप्ताहिक बाजारों में जाकर पुराने ₹500 के नोटों को बदल दिया।

मन देसी फाउंडेशन वित्तीय साक्षरता कक्षाएं भी चलाता है, जहां महिलाओं को मोनोपोली जैसे खेल वाले मॉड्यूल के माध्यम से बचत, निवेश, बीमा और ऋण की पेचीदगियां सिखाई जाती हैं। फाउंडेशन के अनुसार, स्कूल में व्यवसाय विकास कक्षाएं लेने के बाद ग्रामीण महिलाओं की औसत वार्षिक आय में ₹13,200 की वृद्धि हुई है।

Vidushi Mishra

Vidushi Mishra

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