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नवाज के जाने के बाद पाकिस्तान में राजनीतिक उथल-पुथल

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RishiBy Rishi

Published on 4 Aug 2017 9:16 AM GMT

नवाज के जाने के बाद पाकिस्तान में राजनीतिक उथल-पुथल
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अंशुमान तिवारी अंशुमान तिवारी

पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट के एक ऐतिहासिक फैसले ने पाकिस्तान में राजनीतिक भूचाल ला दिया है। सुप्रीमकोर्ट ने पनामागेट मामले में प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को दोषी करार देते हुए उन्हें जीवन भर के लिए प्रधानमंत्री पद के लिए अयोग्य भी घोषित कर दिया। फैसले के बाद नवाज शरीफ पद छोडऩे के लिए मजबूर हो गए। सुप्रीमकोर्ट के इस फैसले ने पाकिस्तान का राजनीतिक परिदृश्य बदल दिया है क्योंकि इससे नवाज का राजनीतिक भविष्य एक तरह से खत्म हो गया है। फैसले से शरीफ का पूरा कुनबा फंस गया है क्योंकि शरीफ और उनके परिवार के खिलाफ मामले दर्ज करने के भी आदेश दिए गए हैं।

अंशुमान तिवारी का विश्लेषण...

इस्लामाबाद: पनामागेट मामले में नवाज शरीफ के इस्तीफे के बाद पाकिस्तान में राजनीतिक उथल-पुथल का दौर चल रहा है। नवाज के बाद शाहिद खाकान अब्बासी को पाकिस्तान का अंतरिम प्रधानमंत्री चुन लिया गया है। अब्बासी तभी तक यह पद संभालेंगे जब तक नवाज शरीफ के भाई शहबाज शरीफ नेशनल असेम्बली का सदस्य नहीं बन जाते। वैसे अब्बासी भी भ्रष्टाचार के मामले में फंसे हुए हैं। हकीकत तो यह है कि पाकिस्तान में अब भी भ्रष्टाचार कोई मुद्दा नहीं है। यही कारण है कि पद गंवाने के बाद नवाज ने विपक्ष पर हमला बोलते हुए सवाल किया कि क्या पाकिस्तान उन्हें छोडक़र बाकी सभी नेक और ईमानदार हैं क्या?

सिक्के का दूसरा पहलू यह है कि पाकिस्तान में वंशवाद की राजनीति प्रभावी भूमिका अदा करती है। हकीकत यह है कि पर्दे के पीछे से सत्ता की चाभी नवाज के हाथों में ही रहेगी और वे ही महत्वपूर्ण मामलों में शहबाज को दिशानिर्देश देंगे। पाकिस्तान में सालों से परिवार ही देश चला रहे हैं। उन्होंने इस बात का खास ख्याल रखा है कि सत्ता उनके परिवार के हाथ में ही रहे। वैसे पाक का घटनाक्रम भारत के नजरिये से अफसोसजनक माना जा रहा है। सेना के फिर मजबूत होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। वैसे पाक में हुए बदलाव से भारत-पाक के रिश्तों पर बहुत ज्यादा फर्क तो नहीं पडऩे जा रहा है। दोनों देशों के बीच बातचीत के दरवाजे पहले से ही बंद हैं।

भाई के जरिये सत्ता चलाएंगे नवाज

पाक में राष्ट्रीय व प्रांतीय एसेंबली में आधी से ज्यादा सीटें पिता से बेटे या भाई से भाई के हाथों में जाती हैं। यहंा राजनीति एक बिजनेस की तरह है जिसे परिवार के हाथ में ही रखने की पूरी कोशिश की जाती है। सुप्रीमकोर्ट के नवाज शरीफ को अयोग्य घोषित करते ही नवाज ने अपने भाई शहबाज शरीफ को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया। राजनीतिक विशेषज्ञ उमैर जवाद का कहना है कि देश की राजनीति पर अब भी नवाज शरीफ का प्रभाव बना रहेगा। यह नवाज का अपनी पार्टी को मनाने का एक तरीका था कि उनका नाम अभी भी चलता है।

मजे की बात तो यह है कि इधर नवाज ने अपने भाई को उत्तराधिकारी बनाया तो दूसरी ओर अभी तक पंजाब के मुख्यमंत्री शहबाज अपने बेटे हम्जा को तैयार कर रहे हैं। वैसे इसके लिए पहले हम्जा को अपने पिता की सीट पर चुनाव लडक़र प्रांतीय एसेंबली में जाना होगा। सत्ता में बैठे लोगों को लगता है कि उनके परिवार की जड़ें इतनी मजबूत हैं कि कोई उन्हें हटा ही नहीं सकता है। वैसे यह भी माना जा रहा है कि पीएमएल-एन शहबाज की बदौलत अधिक दूर तक नहीं जा सकती, क्योंकि वह अपने बड़े भाई जैसे करिश्माई नहीं माने जाते।

भुट्टो परिवार भी इसी तरह पाकिस्तान का एक ताकतवर राजनीतिक परिवार रह चुका है। बेनजीर की हत्या के बाद पाकिस्तान पीपल्स पार्टी को उनके बेटे बिलावल भुट्टो संभाल रहे हैं, लेकिन इसमें अब पहले वाली बात नहीं है। इसी तरह पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ अपने लीडर इमरान खान की स्टारडम के इर्दगिर्द ही घूमती है। इमरान खान यह दावा करते हैं कि वह वंशवाद की राजनीति को तोड़ेंगे, लेकिन वह ऐसा अपनी पहले से बनी छवि की वजह से ही कर पा रहे हैं।

पिता के लिए भारी पड़ी बेटी की गलती

पनामागेट मामले में नवाज के फंसने में उनकी बेटी मरियम की एक गलती की बड़ी भूमिका रही। बेटी की एक गलती बाप के लिए काफी भारी पड़ गयी। पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित जेआइटी को मरियम शरीफ से जाली दस्तावेजों के जरिए गुमराह करने की कोशिश की थी। मरियम ने पनामागेट से संबंधित जो दस्तावेज भेजे थे वो कैलिबरी फॉन्ट में टाइप थे और 31 जनवरी 2007 के पहले के थे, जबकि कैलिबरी फॉन्ट 31 जनवरी 2007 से पहले व्यावसायिक प्रयोग के लिए उपलब्ध नहीं था।

बाकी सब ईमानदार व नेक हैं क्या : नवाज

पनामागेट मामले में प्रधानमंत्री पद से हटाए गए नवाज शरीफ काफी नाराज हैं। उन्होंने सवाल उठाया है कि क्या पाकिस्तान में बाकी सब लोग ‘सादिक और अमीन’ यानी ईमानदार और नेक हैं। पीएमएल-एन के नेताओं को संबोधित करते हुए शरीफ ने कहा कि आपको इस बात पर गर्व होना चाहिए कि आपके नेता पर भ्रष्टाचार का एक भी दाग नहीं है। उन्होंने कहा कि मुझे इस बात पर गर्व है कि मुझे भ्रष्टाचार के आरोपों में अयोग्य घोषित नहीं किया गया है।

नवाज ने दावा किया कि उन्होंने कभी रिश्वत या कमीशन नहीं लिया और कभी सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। उन्होंने कहा कि जब मैंने कभी वेतन ही नहीं लिया तो घोषित क्या करता। उन्होंने सवाल किया कि क्या इस देश में बाकी सब सादिक और अमीन हैं? उन्होंने कहा कि मेरी अंतरात्मा साफ है।

शरीफ के भरोसेमंद हैं शाहिद अब्बासी

शरीफ के इस्तीफे के बाद अंतरिम पीएम बनने वाले शाहिद खाकान अब्बासी पेट्रोलियम और प्राकृतिक संसाधन मंत्री रह चुके हैं। बिजनेसमैन अब्बासी ने देश की सबसे सफल प्राइवेट एयरलाइन की शुरुआत की थी। 2013 में जब नवाज शरीफ तीसरी बार प्रधानमंत्री चुने गए तब अब्बासी को तेल मंत्री बनाया गया था। यूएस की जॉर्ज वॉशिंगटन यूनिवॢसटी से पढ़े अब्बासी का जन्म कराची में हुआ था। वह मुरी से राष्ट्रीय एसेंबली के सदस्य हैं।

अब्बासी यूएस और सउदी अरब में इंजीनियर के तौर पर काम कर चुके हैं। उनके पिता जिया उल हक सरकार में मंत्री थे। उनका 1988 में रावलपिंडी में हुए बम विस्फोट में निधन हो गया था। पिता के निधन के बाद अब्बासी राजनीति में आए। वे पाकिस्तान की नेशनल एसेंबली में छह बार निर्वाचित हो चुके हैं।

इससे पहले वह कॉमर्स और डिफेंस मंत्री भी रह चुके हैं। परवेज मुशर्रफ ने 1999 में शरीफ की दूसरी सरकार को गिराया था जिसके बाद अब्बासी को पद से हटना पड़ा था। अब्बासी को दो साल के लिए गिरफ्तार कर लिया गया था।

नवाज से अलग है शहबाज के काम का तरीका

शहबाज के काम करने का अंदाज बड़े भाई नवाज शरीफ से बिल्कुल अगल है। पंजाब प्रांत के अफसरों का कहना है कि वे कामकाज में बेहद सख्त हैं। आधी रात में भी वे व्हाट्सएप के जरिए अफसरों को निर्देश देते हैं। उनके साथ काम करने के लिए हर समय तैयार रहना पड़ता है। पाकिस्तानी सेना से उनके अच्छे रिश्ते माने जाते हैं। इसलिए यह माना जा रहा है कि वे सेना से सामंजस्य बैठाने में कामयाब होंगे।

मोदी व शरीफ की भाषा में फर्क नहीं : इमरान

पाकिस्तान तहरीके-इंसाफ पार्टी के नेता इमरान खान की नवाज को सत्ता से बेदखल करने में सबसे बड़ी भूमिका रही है। इमरान ने नवाज शरीफ पर आर्मी का अपमान करने का आरोप लगाया है। इमरान ने कहा कि शरीफ ने पाक आर्मी के खिलाफ उसी तरह की भाषा का इस्तेमाल किया था, जैसा भारत के प्रधानमंत्री मोदी ने किया था। इमरान ने कहा कि भ्रष्टाचार का समर्थन करने वाले शरीफ पाक के हितों से समझौता करने के साथ ही दुश्मन के रास्ते पर भी चले। शरीफ की टिप्पणियां पाक सेना के प्रति उनकी बेवफाई का खुलासा करती हैं।

इमरान ने यह आरोप भी लगाया कि शरीफ ने पाक सेना से अपने भ्रष्टाचार को गुप्त रखने के लिए भी कहा था क्योंकि अमेरिका में एक मजबूत यहूदी भारतीय लॉबी उनके सपोर्ट में थी। मैंने अपनी ही सेना को अपमानित करने वाला ऐसा नेता पहले कभी नहीं देखा। शरीफ और मोदी में कोई अंतर नहीं है।

इन पांच जजों के फैसले से नपी शरीफ की कुर्सी

जस्टिस आसिफ सईद खान खोसा : 2010 में सुप्रीम कोर्ट में जज नियुक्त किए गए थे। वे पनामा पेपर लीक मामले की सुनवाई करनेवाली खंडपीठ की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने 18 वर्षों के दौरान करीब 18 हजार मामलों की सुनवाई की है। अप्रैल में जस्टिस खोसा नवाज शरीफ को बर्खास्त करने के खिलाफ थे।

जस्टिस गुलजार अहमद: अपने कॅरियर की शुरुआत सिंध हाईकोर्ट में एक वकील के तौर पर की थी। 2002 में वे सिंध हाईकोर्ट के जज बनाए गए। फिर 2011 में सीनियर जज बने। नवंबर 2011 में ही सुप्रीम कोर्ट में जज के तौर पर पदोन्नत हुए। जस्टिस अहमद भी जस्टिस खोसा की तरह शरीफ के प्रति नरम रुख रखने वालों में थे।

जस्टिस एजाज अफजल खान: 1991 में पाकिस्तान की सुप्रीमकोर्ट में वकील के तौर पर दर्ज हुए। नौ साल तक पेशावर हाईकोर्ट में बतौर जज सेवा दी। 2009 में हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनाया गया। 2011 में सुप्रीम कोर्ट के जज बने। उन्होंने ही इस मामले में 540 पन्नों का फैसला लिखा है।

जस्टिस इजाज उल अहसन: न्यूयॉर्क के कॉरनेल यूनिवॢसटी से पोस्टग्रेजुएट हैं। उन्हें 2009 में लाहौर हाईकोर्ट में जज बनाया गया। 2015 में लाहौर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बने। जून 2016 में उन्हें प्रोन्नति देकर सुप्रीमकोर्ट का जज नियुक्त किया गया।

जस्टिस शेख अजमत सईद: 1980 में लाहौर हाईकोर्ट में वकालत शुरू की थी। वे कई हाई प्रोफाइल केसों से जुड़े रहे। 2004 में वे लाहौर हाईकोर्ट में एडिशनल जज बनाए गए। बाद में 2012 में वे सुप्रीम कोर्ट में जज बने।

पाकिस्तान में पहले भी आ चुकी है राजनीतिक अस्थिरता

पाकिस्तान के आजाद मुल्क बनने के बाद से आज तक कोई प्रधानमंत्री अपना कार्यकाल नहीं पूरा कर सका है। पाकिस्तान में आया राजनीतिक अस्थिरता का यह माहौल नया नहीं है। पहले भी पाकिस्तान में राजनीतिक अस्थिरता का दौर आ चुका है।

1958

कमांडर इन चीफ अयूब खान ने पाकिस्तान के राष्ट्रपति, मेजर जनरल इस्कांदेर मिर्जा को पद से हटा दिया। अयूब खान ने मॉर्शल लॉ लगा दिया और देश की गद्दी पर कब्जा कर लिया।

1977

पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल जिया उल हक ने प्रधानमत्री जुल्फिकार अली भुट्टो की सरकार का तख्तापलट कर दिया। जनरल जिया उल हक तानाशाह बन बैठे। बाद में हक ने भुट्टो को फांसी पर लटकवाकर सत्ता पर अपनी पकड़ और मजबूत कर ली।

1999

इस साल फिर पाकिस्तान में तख्तापलट हुआ। उस समय परवेज मुशर्रफ पाक के सेनाध्यक्ष थे और नवाज शरीफ पीएम। मुशर्रफ ने उन्हें और उनके मंत्रियों को गिरफ्तार करा लिया और सत्ता पर कब्जा कर लिया। वे कई साल तक पाक की सत्ता पर काबिज रहे।

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आशीष शर्मा ऋषि वेब और न्यूज चैनल के मंझे हुए पत्रकार हैं। आशीष को 13 साल का अनुभव है। ऋषि ने टोटल टीवी से अपनी पत्रकारीय पारी की शुरुआत की। इसके बाद वे साधना टीवी, टीवी 100 जैसे टीवी संस्थानों में रहे। इसके बाद वे न्यूज़ पोर्टल पर्दाफाश, द न्यूज़ में स्टेट हेड के पद पर कार्यरत थे। निर्मल बाबा, राधे मां और गोपाल कांडा पर की गई इनकी स्टोरीज ने काफी चर्चा बटोरी। यूपी में बसपा सरकार के दौरान हुए पैकफेड, ओटी घोटाला को ब्रेक कर चुके हैं। अफ़्रीकी खूनी हीरों से जुडी बड़ी खबर भी आम आदमी के सामने लाए हैं। यूपी की जेलों में चलने वाले माफिया गिरोहों पर की गयी उनकी ख़बर को काफी सराहा गया। कापी एडिटिंग और रिपोर्टिंग में दक्ष ऋषि अपनी विशेष शैली के लिए जाने जाते हैं।

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