आ गया कोरोना का बाप! Covid से 10 गुना ज्यादा खतरनाक, एयरपोर्ट पर पकड़े गए 'चीनी जासूस', पास से मिला 'मौत का फंगस

China New Virus: उनके पास से मिला Fusarium graminearum नामक फंगस न केवल कृषि को नष्ट कर सकता है, बल्कि इसे 'कृषि आतंकवाद' का सबसे खतरनाक हथियार कहा जा रहा है। यह मामला किसी जैविक प्रयोगशाला से गलती से निकले वायरस की तरह नहीं है, बल्कि यह सोची-समझी साजिश की तरह देखा जा रहा है।

Harsh Srivastava
Published on: 8 Jun 2025 5:50 PM IST
आ गया कोरोना का बाप! Covid से 10 गुना ज्यादा खतरनाक, एयरपोर्ट पर पकड़े गए चीनी जासूस, पास से मिला मौत का फंगस
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China New Virus: जब दुनिया अभी भी कोविड-19 की भयावहता से पूरी तरह उबर नहीं पाई है, तभी एक और अदृश्य खतरा अमेरिका की सरजमीं पर दस्तक दे चुका है — और इस बार यह वायरस नहीं, बल्कि एक ज़हरीला चीनी फंगस है। न्यूयॉर्क एयरपोर्ट पर हाल ही में गिरफ्तार किए गए दो चीनी नागरिकों ने अमेरिकी एजेंसियों को हिला कर रख दिया है। उनके पास से मिला Fusarium graminearum नामक फंगस न केवल कृषि को नष्ट कर सकता है, बल्कि इसे 'कृषि आतंकवाद' का सबसे खतरनाक हथियार कहा जा रहा है। यह मामला किसी जैविक प्रयोगशाला से गलती से निकले वायरस की तरह नहीं है, बल्कि यह सोची-समझी साजिश की तरह देखा जा रहा है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियां इस घटना को "कोविड-19 के बाद चीन की नई छाया जंग" के रूप में देख रही हैं, जहां युद्ध हथियारों से नहीं, अनाज और खेतों को बर्बाद कर के लड़ा जा रहा है।

"चीनी फंगस: कोरोना से भी ज्यादा खतरनाक?"

यह कोई काल्पनिक डर नहीं है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि Fusarium graminearum फंगस, जिसे गेहूं, जौ और अन्य अनाजों को संक्रमित करने के लिए जाना जाता है, अमेरिका के खाद्य सुरक्षा ढांचे को पूरी तरह तहस-नहस कर सकता है। यदि यह फंगस बड़ी मात्रा में फैल गया, तो अमेरिका के मिडवेस्ट जैसे इलाकों में भारी कृषि संकट पैदा हो सकता है जहां से देश की बड़ी फसलें निकलती हैं। अमेरिकी विश्लेषक गॉर्डन जी. चांग का कहना है कि यह जैविक हमला कोरोना और फेंटेनाइल से भी ज्यादा घातक साबित हो सकता है, क्योंकि यह अमेरिका की रीढ़ यानी खाद्य आपूर्ति को निशाना बनाता है। उनका दावा है कि अगर अमेरिका अब भी चीन के साथ संबंध बनाए रखता है, तो वह अपने ही घर में भूख, बीमारी और आर्थिक बर्बादी का न्यौता देगा।

"चीन की युद्ध मानसिकता: 'पीपुल्स वॉर' का एलान"

सवाल उठता है — क्या यह सब संयोग है? या फिर चीन की किसी गहरी योजना का हिस्सा? गॉर्डन चांग की मानें तो यह सब यूं ही नहीं हो रहा। मई 2019 में चीनी सरकारी अखबार पीपुल्स डेली ने एक ऐतिहासिक संपादकीय प्रकाशित किया था, जिसमें अमेरिका के खिलाफ "जन युद्ध" की बात की गई थी। यह साफ संकेत है कि चीन अब अमेरिका से संघर्ष को सिर्फ सैन्य या व्यापारिक क्षेत्र तक सीमित नहीं रख रहा, बल्कि अब वह कृषि और जैविक हथियारों के ज़रिए अमेरिका को अंदर से तोड़ने की कोशिश में है। चांग का दावा है कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने खुद अपने नागरिकों को अमेरिका के खिलाफ मानसिक रूप से युद्ध के लिए तैयार किया है। ऐसे में यह मानना कि एक ज़हरीला फंगस बस गलती से अमेरिका पहुंच गया, एक मासूम सोच होगी।

"क्या ये फंगस वाकई इतना घातक है?"

यहां तक कि कृषि वैज्ञानिकों ने भी इस फंगस को हल्के में नहीं लिया है। रॉयटर्स को दिए गए बयान में कुछ विशेषज्ञों ने यह जरूर कहा कि यह फंगस अमेरिका में पहले से मौजूद है, लेकिन उसकी तासीर और प्रसार की मात्रा इस बार अलग है। सामान्य रूप से यह बारिश के मौसम में फसलों पर हमला करता है, पर अब इसके संशोधित और अधिक संक्रामक रूप की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि अगर इसे बड़ी मात्रा में लगातार खाया जाए, तो यह मनुष्यों के लिए भी जानलेवा हो सकता है। यह mycotoxin पैदा करता है जो इंसान के लिवर, किडनी और इम्यून सिस्टम पर गंभीर असर डाल सकता है। सबसे बड़ी बात यह खाद्य श्रृंखला के जरिए पूरे अमेरिका में फैल सकता है।

"क्या अमेरिका चीन से नाता तोड़ेगा?"

यह वही सवाल है, जो अब अमेरिका की संसद से लेकर व्हाइट हाउस के गलियारों तक गूंज रहा है। क्या अमेरिका को अब भी कूटनीतिक शालीनता दिखाते रहना चाहिए, या फिर कोविड जैसी भूल दोहराने से पहले एक निर्णायक कदम उठाना चाहिए? गॉर्डन चांग और कई अन्य विशेषज्ञों का स्पष्ट मत है — अब वक्त आ गया है कि अमेरिका चीन के साथ सभी रिश्ते समाप्त कर दे। व्यापार, तकनीक, कृषि हर स्तर पर चीन से अलग होने का समय आ चुका है। क्योंकि यदि यह सिलसिला ऐसे ही चलता रहा, तो अगला हमला हथियारों से नहीं, आपके खाने की थाली से होगा।

"चुपचाप फैलने वाला ज़हर"

इस घटना ने अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों को एक नई चुनौती दे दी है एक ऐसा दुश्मन, जो ना दिखता है, ना शोर करता है, लेकिन अंदर से पूरी व्यवस्था को खोखला कर देता है। यह मामला केवल एक फंगस की तस्करी का नहीं, बल्कि उस मानसिकता का है जो अब वैश्विक युद्ध को बंदूक की बजाय बैक्टीरिया और बीजों के जरिए लड़ना चाहती है। क्या अमेरिका इस 'कृषि युद्ध' के खिलाफ खड़ा होगा? या फिर एक और महामारी का इंतजार करेगा?सवाल बहुत गंभीर है। और वक्त बहुत कम।

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हर्ष श्रीवास्तव वाराणसी के रहने वाले पत्रकार और डिजिटल कंटेंट प्रोफेशनल हैं। वर्तमान में वे लखनऊ स्थित न्यूज़ट्रैक में डेस्क इंचार्ज के पद पर कार्यरत हैं। यहां वे कंटेंट प्लानिंग, एडिटोरियल कोऑर्डिनेशन, न्यूज़रूम संचालन के साथ-साथ रिसर्च आधारित एक्सप्लेनर, न्यूज़ फीचर और विश्लेषणात्मक लेख तैयार करते हैं। उनके पास मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री है। उन्होंने वर्ष 2023 में पत्रकारिता की शुरुआत की और हिन्दुस्तान, टाइम्स इंटरनेट, इंडिया न्यूज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। वाराणसी, दिल्ली और लखनऊ में काम करने के दौरान उन्हें रिपोर्टिंग, कंटेंट राइटिंग और डिजिटल पत्रकारिता का अनुभव प्राप्त हुआ। हर्ष की विशेष रुचि राजनीति, चुनाव, अपराध, सार्वजनिक नीति, सुशासन और समसामयिक विषयों पर शोध-आधारित पत्रकारिता में है। वे गहन रिसर्च, फैक्ट-चेकिंग और सरल भाषा के माध्यम से जटिल विषयों को पाठकों तक सटीक, विश्वसनीय और प्रभावी ढंग से पहुंचाने का प्रयास करते हैं।

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