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दोस्ती' खत्म, अब 'दुश्मनी'! 'टाइम' मैगज़ीन के कवर से 'सियासी युद्ध' तक, जानें उन दोस्तों के बारें में जिन्हें Trump ने मारी थी लात
Trump vs Musk: जब ट्रंप ने Truth Social लॉन्च किया और ट्विटर से दूरी बना ली थी, तब मस्क ने X (ट्विटर) के अधिग्रहण के बाद ट्रंप को वापस मंच पर बुलाया। मस्क ने खुले मंचों पर ट्रंप की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की वकालत की, वहीं ट्रंप ने भी मस्क की ‘अमेरिकन स्पिरिट’ की तारीफ की। लेकिन ये साथ ज्यादा दिन नहीं टिक सका।
Trump vs Musk
Trump vs Musk: कभी ‘टाइम’ मैगज़ीन के कवर पर साथ चमकते चेहरे, अब एक-दूसरे को गिराने की कोशिशों में जुटे हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और दुनिया के सबसे चर्चित अरबपति एलन मस्क की दोस्ती टूटने की खबर अब सिर्फ गॉसिप नहीं, बल्कि सत्ता, उद्योग और शेयर बाजार को हिला देने वाली हकीकत बन चुकी है। महज 11 महीने पहले तक दोनों एक-दूसरे की तारीफों के पुल बांधते नहीं थकते थे, लेकिन अब हालात ऐसे हैं कि ट्रंप मस्क को ‘झूठा टेक्नो-किंग’ कह रहे हैं, तो मस्क उन्हें ‘तानाशाह से भी बदतर’ बता रहे हैं। ये सिर्फ दो ताकतवर पुरुषों के बीच की खींचतान नहीं, ये अमेरिकी राजनीति और अर्थव्यवस्था के भीतर उठते तूफान की गूंज है, जिसकी लहरें वॉल स्ट्रीट से लेकर व्हाइट हाउस तक महसूस की जा रही हैं।
ट्रंप-मस्क की दोस्ती का अंत: एक निवेशक का, एक राष्ट्रवादी का टकराव
जब ट्रंप ने Truth Social लॉन्च किया और ट्विटर से दूरी बना ली थी, तब मस्क ने X (ट्विटर) के अधिग्रहण के बाद ट्रंप को वापस मंच पर बुलाया। मस्क ने खुले मंचों पर ट्रंप की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की वकालत की, वहीं ट्रंप ने भी मस्क की ‘अमेरिकन स्पिरिट’ की तारीफ की। लेकिन ये साथ ज्यादा दिन नहीं टिक सका। टकराव की शुरुआत मस्क के उस बयान से हुई, जिसमें उन्होंने कहा कि अमेरिका को “युवाओं और विज्ञान-समर्थित नेतृत्व” की जरूरत है, न कि “पुराने नारों और झूठे राष्ट्रवाद” की। इस बयान को ट्रंप के समर्थकों ने सीधे उनके खिलाफ माना। ट्रंप ने तुरंत पलटवार किया और मस्क को "एक ऐसा बिजनेस क्लाउन" कहा जो "टैक्सपेयर्स की सब्सिडी पर रॉकेट उड़ाता है और देशभक्ति का दिखावा करता है"।
टेस्ला को लगा बड़ा झटका
ट्रंप के इस हमले के बाद, टेस्ला के शेयरों में 14% तक की गिरावट देखी गई। मस्क के निवेशक समुदाय में बेचैनी फैल गई। अमेरिका में रिपब्लिकन पार्टी समर्थक निवेशकों ने टेस्ला से हाथ खींचना शुरू कर दिया। वॉल स्ट्रीट पर ये स्पष्ट संकेत थे कि ट्रंप अब मस्क को ‘दुश्मन’ मान चुके हैं। मस्क ने भी ट्रंप को जवाब देने में देर नहीं लगाई। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, “अगर अमेरिका को फिर से महान बनाना है, तो पहले उसे झूठ से मुक्त करना होगा।” यह सीधा हमला था ट्रंप के मशहूर नारे “Make America Great Again” पर।
पुरानी दोस्तियों की कब्रगाह है ट्रंप की राजनीति?
एलन मस्क तो इस दुश्मनी की ताज़ा मिसाल हैं, लेकिन ट्रंप का अतीत देखें तो पता चलता है कि वे ‘दोस्तों से दुश्मनी’ करने में कोई कसर नहीं छोड़ते। ट्रंप की पॉलिटिक्स में वफादारी की उम्र सत्ता तक सीमित रहती है।
माइकल कोहेन, जो कभी ट्रंप के लिए "गोली खाने को तैयार" रहते थे, बाद में उन्हीं के खिलाफ कोर्ट में गवाही देकर उन्हें झूठा और धोखेबाज़ साबित कर गए।
जॉन बॉल्टन, जिन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बनाया गया था, बाद में ट्रंप की चीन नीति पर हमला बोलकर उन्हें ‘गोपनीय समझौतों का सौदागर’ कह बैठे।
रेक्स टिलरसन, एक वक्त के ट्रंप के करीबी मित्र, ने उन्हें “मूर्ख” कहा और व्हाइट हाउस की कार्यप्रणाली को ‘तानाशाही’ करार दिया।
मार्क मिल्ली, सेना प्रमुख रहते हुए ट्रंप का साथ देते रहे, लेकिन 2020 में जब ट्रंप ने चुनाव हारने के बाद भी सत्ता छोड़ने से इनकार किया, तो मिल्ली ने खुलकर कहा “ट्रंप तानाशाही के रास्ते पर हैं।”
न्यूमैन, टीवी स्टार और ट्रंप की बेहद करीबी, ने आरोप लगाया कि उन्हें व्हाइट हाउस से ‘धक्के मारकर निकाला गया’। बाद में मामला कोर्ट तक जा पहुंचा।
अब मस्क की बारी: एक अरबपति की राजनीतिक महत्वाकांक्षा?
एलन मस्क ने लंबे समय तक राजनीति से दूरी बनाकर रखी थी, लेकिन अब वे अमेरिकी राजनीति में एक प्रभावशाली खिलाड़ी बनना चाहते हैं। वे टेक्नोलॉजी, फ्री स्पीच और क्लाइमेट चेंज जैसे मुद्दों पर अपनी राय रखने से पीछे नहीं हटते। ऐसे में ट्रंप जैसे व्यक्ति से सीधा टकराव उनके लिए एक ‘पोजिशनिंग’ का मौका हो सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो मस्क 2026 तक एक नया राजनीतिक मंच खड़ा कर सकते हैं, जो "टेक्नो-प्रोग्रेसिव" विचारधारा को आगे बढ़ाएगा। इसका मकसद युवाओं को जोड़ना और रिपब्लिकन-डेमोक्रेट की पारंपरिक राजनीति से हटकर एक नई सोच पेश करना है।
क्या चुनाव बनेगा ट्रंप-मस्क युद्धभूमि?
अब सवाल यह है कि क्या अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव ट्रंप और मस्क की सीधी टकराव की शक्ल ले सकता है? भले ही मस्क खुद चुनाव न लड़ें, लेकिन वे ट्रंप के विरोध में किसी मजबूत उम्मीदवार को सपोर्ट कर सकते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, मस्क अब रॉबर्ट कैनेडी जूनियर या विवेक रामास्वामी जैसे उम्मीदवारों को फंडिंग देने की योजना बना रहे हैं यानी, ट्रंप को चुनावी मैदान में अकेला छोड़ने की पूरी तैयारी है।
टेक्नोक्रेसी बनाम ट्रंपिज़्म
एलन मस्क बनाम डोनाल्ड ट्रंप की यह लड़ाई केवल दो शख्सियतों की व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं, बल्कितकनीक आधारित विकास बनाम राष्ट्रवादी राजनीति की जंग है। अमेरिका एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहां टेक्नोलॉजी, बिज़नेस और पॉलिटिक्स की त्रिकोणीय शक्ति संघर्ष कर रही है। इस टकराव में कौन जीतेगा, ये तो समय बताएगा। लेकिन इतना तय है कि अमेरिका की राजनीति अब पहले जैसी नहीं रहने वाली। और इस लड़ाई का असर सिर्फ वॉशिंगटन या वॉल स्ट्रीट तक सीमित नहीं रहेगा यह पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था, लोकतंत्र और डिजिटल भविष्य की दिशा तय करेगा क्योंकि जब अरबपति दोस्त बनते हैं तो बाजार उछलता है, और जब वही दुश्मन बनते हैं तो लोकतंत्र की बुनियादें हिलने लगती हैं।


