भारत, दुनिया भर के अल्पसंख्यकों का संरक्षक: किरेन रिजिजू
लोकसभा में भारतीय संविधान की 75 वर्षों की यात्रा पर हो रही चर्चा के दौरान केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भारत में अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर विपक्ष के नैरिटव पर सवाल उठाते हुये कहा, एक नैरेटिव तैयार किया जा रहा है, जिसमें यूरोपीय यूनियन में भेदभाव की बढ़ती घटनाओं पर चर्चा हो रही है। यूरोपीय यूनियन के सेंटर फॉर पॉलिसी एनालिसिस के एक सर्वे में यह सामने आया है कि 48% लोग भेदभाव का शिकार हुए हैं, जिनमें से अधिकांश मुसलमान हैं। फ्रांस में ऐसी कई रिपोर्टें आई हैं, जहां मुस्लिम समुदाय के लोग, खासकर सिर पर स्कार्फ या बुर्का पहनने वालों के साथ भेदभाव की शिकायतें कर रहे हैं। स्पेन में भी मुसलमानों के खिलाफ आंतरिक घृणा अपराधों की घटनाएं बढ़ी हैं, जिसे रिपोर्ट में प्रमुखता से उल्लेख किया गया है।
अगर हम पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान, तिब्बत, म्यांमार, श्रीलंका और अन्य देशों की स्थिति पर गौर करें, तो वहां अल्पसंख्यक समुदायों, जैसे सिखों, हिंदुओं और ईसाइयों के खिलाफ अत्याचार और हिंसा के कई मामले सामने आए हैं। इन देशों में जब भी अल्पसंख्यकों के साथ अत्याचार होता है, तो सबसे पहले भारत ही वह देश है जहां ये लोग सुरक्षा की उम्मीद लेकर आते हैं। फिर यह सवाल उठता है कि ऐसे में भारत में अल्पसंख्यकों के लिए सुरक्षा का सवाल क्यों खड़ा किया जाता है। मैं कहता हूं कि हमें ऐसी बातें नहीं करनी चाहिए जो देश की छवि को नुकसान पहुंचाए। यह किसी एक पार्टी के खिलाफ नहीं, बल्कि देश की प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए है।