Bollywood Old Movie: कर्ज़ में डूबे निर्माता की मजबूरी से जन्मी वह फिल्म, जिसने रच दिया इतिहास

Don Full Movie Story: जानिए अमिताभ बच्चन की सुपरहिट फिल्म ‘डॉन’ बनने की भावुक और संघर्षभरी कहानी। कैसे कर्ज़ में डूबे निर्माता नरीमन ईरानी की फिल्म ने बॉलीवुड में इतिहास रच दिया।

Update:2026-05-14 15:40 IST

Bollywood Old Movie Nariman Irani Don Story

Don Full Movie Story: हिंदी सिनेमा की सबसे प्रतिष्ठित फिल्मों में गिनी जाने वाली ‘डॉन’ वर्ष 1978 में रिलीज़ हुई थी, लेकिन इस फिल्म की बुनियाद कई वर्ष पहले पड़ चुकी थी। यह केवल एक फिल्म की कहानी नहीं, बल्कि संघर्ष, दोस्ती, भरोसे और जुनून की ऐसी दास्तान है, जिसने भारतीय सिनेमा में इतिहास रच दिया।

एक फ्लॉप फिल्म से शुरू हुई कहानी

‘डॉन’ के निर्माता नरीमन ईरानी थे। वर्ष 1972 में उनकी फिल्म ‘ज़िंदगी-ज़िंदगी’ रिलीज़ हुई थी। इस फिल्म में सुनील दत्त और वहीदा रहमान मुख्य भूमिकाओं में थे। हालांकि यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह असफल साबित हुई। फिल्म की विफलता ने नरीमन ईरानी को भारी आर्थिक संकट में डाल दिया। बताया जाता है कि वे लगभग दिवालिया हो गए थे और गहरे मानसिक तनाव में रहने लगे थे।


अपनी परेशानियों के दौर में नरीमन ईरानी ने अपने फिल्मी दोस्तों से मदद और सलाह मांगनी शुरू की। उन्हीं दोस्तों में अभिनेता-निर्देशक मनोज कुमार भी शामिल थे। उस समय मनोज कुमार अपनी चर्चित फिल्म ‘रोटी कपड़ा और मकान’ पर काम कर रहे थे।

यहीं से शुरू हुआ ‘डॉन’ का सफर

जिस समय नरीमन ईरानी अपनी आर्थिक परेशानियों का जिक्र कर रहे थे, उस दौरान वहां अमिताभ बच्चन, ज़ीनत अमान और मनोज कुमार के सहायक निर्देशक चंद्रा बारोट भी मौजूद थे।

नरीमन ईरानी की हालत सुनने के बाद अमिताभ बच्चन, ज़ीनत अमान और चंद्रा बारोट ने उनसे कहा कि एक नई फिल्म बनाकर ही यह कर्ज़ उतारा जा सकता है। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि वे कम पारिश्रमिक में फिल्म में काम करने के लिए तैयार हैं।

यहीं से तय हुआ कि एक नई फिल्म बनाई जाएगी। हालांकि सबसे बड़ा सवाल यह था कि कहानी क्या होगी।

अमिताभ बच्चन ने दी सलीम-जावेद का सुझाव


अमिताभ बच्चन ने नरीमन ईरानी को सलाह दी कि वे प्रसिद्ध लेखक जोड़ी सलीम-जावेद से कहानी लें। नरीमन ईरानी जब सलीम खान और जावेद अख्तर के पास पहुंचे तो उन्होंने कई कहानियां सुनाईं। लेकिन उनकी फीस उस समय नरीमन ईरानी की आर्थिक स्थिति से कहीं अधिक थी।

निराश होकर लौटने के बाद नरीमन ईरानी ने अपनी पत्नी सलमा से मदद मांगी। सलमा उस समय अभिनेत्री वहीदा रहमान की हेयर ड्रेसर थीं। उनकी सिफारिश के बाद सलीम-जावेद तक नरीमन ईरानी की स्थिति की जानकारी पहुंची।

बताया जाता है कि इसके बाद सलीम-जावेद ने वह कहानी नरीमन ईरानी को दे दी, जिसे कई बड़े कलाकार और निर्माता पहले ठुकरा चुके थे। यह वही कहानी थी, जो आगे चलकर ‘डॉन’ बनी।

कई बड़े नामों ने ठुकराई थी ‘डॉन’

फिल्म इतिहास से जुड़े कई विवरणों के अनुसार सलीम-जावेद इस कहानी को पहले देव आनंद, धर्मेंद्र और निर्माता-निर्देशक प्रकाश मेहरा को भी सुना चुके थे, लेकिन किसी ने इसमें रुचि नहीं दिखाई।

सलीम-जावेद ने नरीमन ईरानी से यह तक कहा था कि यदि फिल्म सफल हुई तो बाद में भुगतान कर देना, और यदि असफल रही तो पैसे देने की जरूरत नहीं होगी।

जब अमिताभ बच्चन और चंद्रा बारोट ने कहानी पढ़ी तो उन्हें यह बेहद पसंद आई। इसके बाद तय हुआ कि फिल्म में अमिताभ बच्चन मुख्य भूमिका निभाएंगे, ज़ीनत अमान नायिका होंगी और चंद्रा बारोट निर्देशन करेंगे। फिल्म का नाम रखा गया— ‘डॉन’।

फिल्म शुरू हुई, लेकिन बीच में आ गया दुखद मोड़


फिल्म की शूटिंग शुरू हुई ही थी कि एक दूसरी फिल्म के सेट पर हुई दुर्घटना में नरीमन ईरानी का निधन हो गया। इस घटना से पूरी टीम को गहरा झटका लगा। कुछ समय के लिए ऐसा लगा कि फिल्म अधूरी रह जाएगी।

लेकिन चंद्रा बारोट, अमिताभ बच्चन, ज़ीनत अमान और पूरी टीम ने तय किया कि चाहे जो हो जाए, फिल्म पूरी की जाएगी। सभी कलाकारों और तकनीकी टीम ने बेहद समर्पण के साथ काम किया।

पहले सप्ताह फ्लॉप, फिर इतिहास

जब ‘डॉन’ 12 मई 1978 को रिलीज़ हुई तो शुरुआती प्रतिक्रिया बहुत उत्साहजनक नहीं थी। पहले सप्ताह इसका प्रदर्शन कमजोर रहा और कई ट्रेड विश्लेषकों ने इसे असफल घोषित कर दिया।

लेकिन दूसरे सप्ताह स्थिति पूरी तरह बदल गई। फिल्म का गीत—

“खइके पान बनारस वाला, खुल जाए बंद अकल का ताला”

दर्शकों के बीच जबरदस्त लोकप्रिय हो गया। इस गीत ने फिल्म को नई रफ्तार दी और देखते ही देखते ‘डॉन’ वर्ष 1978 की सबसे अधिक कमाई करने वाली फिल्मों में शामिल हो गई। इसे उस वर्ष की तीसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म माना जाता है।

70 लाख की फिल्म, 7 करोड़ की कमाई

रिपोर्ट्स के अनुसार ‘डॉन’ का बजट लगभग 70 लाख रुपये था, जबकि इसका वैश्विक संग्रह करीब 7 करोड़ रुपये तक पहुंच गया था। उस दौर में यह बेहद बड़ी सफलता मानी जाती थी।

बताया जाता है कि फिल्म से हुई कमाई का हिस्सा लेने के बाद बाकी धनराशि नरीमन ईरानी की पत्नी सलमा को दे दी गई। सलमा ने उसी रकम से नरीमन ईरानी का कर्ज़ चुकाया।

गीतों ने भी रचा इतिहास


‘डॉन’ की सफलता में इसके गीतों का भी महत्वपूर्ण योगदान था। विशेष रूप से आशा भोंसले द्वारा गाया गया गीत—

“ये मेरा दिल प्यार का दीवाना”

आज भी हिंदी सिनेमा के सबसे लोकप्रिय गीतों में गिना जाता है।

आज भी कायम है ‘डॉन’ का जादू

‘डॉन’ को रिलीज़ हुए आज 48 वर्ष पूरे हो चुके हैं, लेकिन इस फिल्म का प्रभाव आज भी बरकरार है। इसकी कहानी, संवाद, गीत और अमिताभ बच्चन की दोहरी भूमिका आज भी दर्शकों को आकर्षित करती है।

भारतीय सिनेमा में बहुत कम फिल्में ऐसी हुई हैं, जिनके पीछे संघर्ष और भावनाओं की इतनी गहरी कहानी जुड़ी हो। ‘डॉन’ केवल एक सुपरहिट फिल्म नहीं, बल्कि दोस्ती, भरोसे और संघर्ष की मिसाल भी है।

(साभार : हिंदी फिल्म इतिहास से जुड़े प्रकाशित विवरण, फिल्म पत्रकारिता अभिलेख, सिनेमा साक्षात्कार एवं सार्वजनिक रूप से उपलब्ध फिल्मी संदर्भ)

  

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