अबान की मौत से बिखरा अतीक का परिवार, शव देखते ही फूट-फूट कर रोने लगा अहजम, सरकार से की बड़ी अपील
Atiq Ahmed Son Death Row: माफिया अतीक अहमद के सबसे छोटे बेटे अबान अहमद की झांसी सड़क हादसे में मौत के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। शव देखते ही अहजम अहमद भावुक होकर रो पड़ा और उसने सरकार से खास अपील की है।
Atiq Ahmed Son Death Row: उत्तर प्रदेश के झांसी में हुए भयावह सड़क हादसे में माफिया व पूर्व सांसद अतीक अहमद के सबसे छोटे बेटे अबान अहमद की मौत की खबर से पूरा परिवार स्तब्ध है। दुर्घटना के बाद जैसे ही अतीक का चौथा बेटा अहजम अहमद झांसी मेडिकल कॉलेज पहुंचा, अपने सबसे छोटे भाई अबान की देह को देखते ही वह फूट-फूटकर रो पड़ा। वहां मौजूद लोगों और सुरक्षाकर्मियों ने बमुश्किल उसे संभाला। अतीक अहमद के कुनबे पर टूटे इस नए संकट के बीच अहजम अब पूरी तरह अकेला नजर आ रहा है। उसने भारी मन और अश्रुपूरित आंखों से पत्रकारों के सामने सरकार से अपील की कि जेल में बंद उसके दोनों बड़े भाइयों को अबान के जनाजे और अंतिम संस्कार (मिट्टी) में शामिल होने की इजाजत दी जाए।
घायलों का हाल जानने पहुंचा अहजम
इस दर्दनाक सड़क हादसे में अबान के साथ उसके एक दोस्त सोनू की भी मौके पर ही मौत हो गई, जबकि गाड़ी में मौजूद 3 अन्य युवक बुरी तरह जख्मी हो गए। घायलों को इलाज के लिए झांसी मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में भर्ती कराया गया, जिससे पूरे अस्पताल और पोस्टमार्टम हाउस परिसर में वाहनों का तांता लग गया और भारी अफरा-तफरी मच गई। डाक्टरों और चिकित्साकर्मियों की टीम तुरंत घायलों के इलाज में जुट गई। कानूनी और कागजी प्रक्रियाओं के बाद दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। देर शाम पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे अहजम ने भाई की शिनाख्त की। इसके बाद वह इमरजेंसी वार्ड भी गया, जहां उसने भर्ती साथियों का हालचाल लिया और हादसे के संबंध में जानकारी जुटाई।
भाई अली से मुलाकात की हसरत रह गई अधूरी
अबान की अपने बड़े भाई अली अहमद से मिलने की हसरत हमेशा के लिए अधूरी रह गई। प्रयागराज से भोर में 4 दोस्तों के साथ कार से निकला अबान लगभग 420 किलोमीटर का सफर तय कर चुका था और घटना स्थल से झांसी जिला जेल की दूरी महज 80 किलोमीटर ही बची थी। सूत्रों के मुताबिक, जेल में बंद अली को भी छोटे भाई और उसके दोस्तों के आने की जानकारी मिल चुकी थी। परंतु, नियति को कुछ और ही मंजूर था। पूंछ थाना क्षेत्र के खिल्ली गांव के पास हुए भयानक हादसे ने दोनों भाइयों के बीच होने वाली इस आखिरी मुलाकात को हमेशा-हमेशा के लिए अधूरा छोड़ दिया।
नैनी से झांसी जेल क्यों भेजा गया था अली?
माफिया अतीक अहमद का बेटा अली अहमद रंगदारी और उमेश पाल हत्याकांड में नामजद आरोपी है। वर्ष 2022 में 5 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने और जानलेवा हमला करने के आरोप में धूमनगंज थाने में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर अली को गिरफ्तार कर नैनी सेंट्रल जेल भेजा गया था। नैनी जेल में तलाशी के दौरान उसके पास से 1100 रुपये नगद बरामद हुए थे, जिसके बाद सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए 1 अक्टूबर 2025 को उसे झांसी जिला जेल की तन्हाई बैरक में स्थानांतरित कर दिया गया था। तभी से वह झांसी जेल में बंद है।
एक-एक कर तबाह होता गया अतीक का कुनबा
प्रयागराज में हुए चर्चित उमेश पाल हत्याकांड के बाद से ही माफिया अतीक अहमद का साम्राज्य और परिवार एक-एक कर बिखरता चला गया। इस घटना के तुरंत बाद अतीक का बेटा असद एनकाउंटर में मारा गया था। इसके कुछ ही समय बाद अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की पुलिस कस्टडी में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। अतीक की पत्नी शाइस्ता परवीन पर 50 हजार का इनाम है और वह लंबे समय से फरार चल रही है। 2 बड़े बेटे उमर और अली अलग-अलग जेलों में बंद हैं, और अब सबसे छोटे बेटे अबान की इस दुखद हादसे में जान चली गई।
अहजम ने सरकार से लगाई मानवीय आधार पर गुहार
अपने पूरे परिवार के बिखर जाने के बाद अब अहजम अकेले ही सारी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी कर रहा है। उसने मीडिया के जरिए शासन-प्रशासन से भावुक गुहार लगाई है कि लखनऊ जेल में बंद उसके बड़े भाई उमर अहमद और झांसी जेल में बंद अली अहमद को अपने सबसे छोटे भाई अबान के जनाजे और कफन-दफन में शरीक होने की पैरोल दी जाए। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या प्रशासन इस मानवीय अपील पर दोनों भाइयों को अंतिम संस्कार में शामिल होने की अनुमति देता है या नहीं।