क्षेत्रीय दलों की चंदा राशि में तीन गुना उछाल: DMK को मिले ₹365.78 करोड़, ADR ने पारदर्शिता पर उठाए
ADR रिपोर्ट के अनुसार क्षेत्रीय दलों को मिलने वाले चंदे में 202% की बढ़ोतरी हुई। DMK को सबसे अधिक ₹365.78 करोड़ मिले, जबकि राजनीतिक फंडिंग की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठे।
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Regional Parties Donations Report: नई दिल्ली। देश के क्षेत्रीय राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे में वर्ष 2024-25 के दौरान अभूतपूर्व बढ़ोतरी दर्ज की गई है। चुनाव आयोग को घोषित किए गए ₹20,000 से अधिक के चंदे का कुल मूल्य पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में लगभग तीन गुना हो गया है। यह खुलासा एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की ताज़ा रिपोर्ट में हुआ है।
भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को क्षेत्रीय राजनीतिक दलों द्वारा सौंपे गए योगदान विवरणों के आधार पर तैयार इस रिपोर्ट में वित्तीय वर्ष 2023-24 और 2024-25 के दौरान 40 क्षेत्रीय दलों को मिले चंदे का विस्तृत विश्लेषण किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, क्षेत्रीय दलों द्वारा घोषित ₹20,000 से अधिक के चंदे का कुल मूल्य वित्तीय वर्ष 2023-24 के ₹347.69 करोड़ से बढ़कर 2024-25 में ₹1,051.56 करोड़ हो गया। यानी एक ही वर्ष में इसमें 202 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई। इसी अवधि में ऐसे चंदों की संख्या भी 2,861 से बढ़कर 5,297 हो गई, जो 85 प्रतिशत की वृद्धि है।
वित्तीय वर्ष 2024-25 में द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) सबसे अधिक चंदा प्राप्त करने वाला क्षेत्रीय दल बनकर उभरा। पार्टी ने 467 दानदाताओं से कुल ₹365.78 करोड़ प्राप्त होने की घोषणा की। इसके बाद ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) को ₹184.96 करोड़, वाईएसआर कांग्रेस पार्टी को ₹140.04 करोड़, तेलुगु देशम पार्टी (TDP) को ₹83.04 करोड़ तथा अन्नाद्रमुक (AIADMK) को सबसे अधिक चंदा मिला।
ADR के अनुसार, राजनीतिक चंदे में हुई यह वृद्धि अधिकांशतः कुछ चुनिंदा क्षेत्रीय दलों तक सीमित रही। वर्ष 2024-25 में सबसे अधिक चंदा पाने वाले पाँच दल—DMK, AITC, YSR कांग्रेस, TDP और AIADMK—को कुल मिलाकर ₹840.13 करोड़ प्राप्त हुए, जो उस वर्ष घोषित कुल चंदे का लगभग 80 प्रतिशत है।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि क्षेत्रीय दलों के वित्तपोषण में कॉरपोरेट क्षेत्र का दबदबा लगातार बना हुआ है। दोनों वित्तीय वर्षों को मिलाकर कॉरपोरेट और कारोबारी घरानों ने ₹872.54 करोड़ का योगदान दिया, जो कुल चंदे का 62.36 प्रतिशत है। इसके मुकाबले व्यक्तिगत दानदाताओं ने ₹193.95 करोड़ का योगदान दिया, जो कुल राशि का 13.86 प्रतिशत है। हालांकि, कुल दानदाताओं की संख्या में व्यक्तिगत दानदाताओं की हिस्सेदारी लगभग 69 प्रतिशत रही।
सबसे बड़े दानदाताओं की सूची में प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट शीर्ष पर रहा, जिसने दोनों वित्तीय वर्षों के दौरान कुल ₹434 करोड़ का योगदान दिया। इसके बाद टाइगर एसोसिएट्स ने ₹160 करोड़, जबकि प्रोग्रेसिव इलेक्टोरल ट्रस्ट, वेदांता लिमिटेड और एबी जनरल इलेक्टोरल ट्रस्ट भी शीर्ष पाँच दानदाताओं में शामिल रहे।
हालांकि, रिपोर्ट में राजनीतिक चंदे की पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल भी उठाए गए हैं। ADR के अनुसार, DMK को वर्ष 2024-25 में प्राप्त कुल चंदे का लगभग 82 प्रतिशत यानी ₹300.65 करोड़ नकद मिला। पार्टी ने इन राशियों को ₹20,000 से कम के व्यक्तिगत दान के रूप में घोषित किया है, जिनके लिए कानून के तहत दानदाताओं का नाम सार्वजनिक करना आवश्यक नहीं है। ऐसे में यह पता लगाना संभव नहीं है कि ये रकम वास्तव में हजारों अलग-अलग छोटे दानदाताओं से प्राप्त हुई या फिर किसी एक अथवा कुछ दानदाताओं ने कई बार ₹20,000 से कम राशि देकर खुलासे की कानूनी सीमा से बचने की कोशिश की।
इसी प्रकार AITC को प्राप्त कुल चंदे का 99.5 प्रतिशत चेक या डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से मिला, लेकिन इनमें दानदाताओं का पूरा विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया। दूसरी ओर, वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने अपने पूरे ₹140.04 करोड़ बैंक ट्रांसफर के माध्यम से प्राप्त किए, जबकि तेलुगु देशम पार्टी को मिले चंदे का अधिकांश हिस्सा चेक और बैंक ट्रांसफर के जरिए प्राप्त हुआ।
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024-25 में दानदाताओं की पहचान से जुड़े खुलासों में भी उल्लेखनीय गिरावट आई। अघोषित नाम वाले दानदाताओं से ₹302.67 करोड़, अघोषित पते वाले दानदाताओं से ₹337.11 करोड़ तथा बिना पैन विवरण वाले दानदाताओं से ₹329.58 करोड़ प्राप्त होने की घोषणा की गई। ये तीनों श्रेणियाँ मिलकर उस वर्ष घोषित कुल चंदे का बड़ा हिस्सा बनाती हैं और राजनीतिक चंदे की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती हैं।
राज्यवार विश्लेषण में दिल्ली क्षेत्रीय दलों को सबसे अधिक चंदा देने वाला राज्य रहा। दोनों वित्तीय वर्षों में दिल्ली से ₹433.78 करोड़ का योगदान दर्ज किया गया। इसके बाद पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र का स्थान रहा।
विदेशी चंदे की हिस्सेदारी बेहद सीमित रही। वित्तीय वर्ष 2024-25 में क्षेत्रीय दलों ने विदेशों से कुल 89 दान, जिनकी कुल राशि ₹77.6 लाख थी, प्राप्त होने की घोषणा की। यह कुल चंदे का 0.1 प्रतिशत से भी कम है। इनमें संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) सबसे बड़ा विदेशी स्रोत रहा, जबकि सऊदी अरब और कतर क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे।
रिपोर्ट में चुनाव आयोग को योगदान रिपोर्ट जमा करने में क्षेत्रीय दलों की लापरवाही भी सामने आई है। देश के 67 मान्यता प्राप्त क्षेत्रीय दलों में से केवल 40 दलों का विश्लेषण किया जा सका, क्योंकि अनेक दलों ने या तो अपनी योगदान रिपोर्ट समय पर जमा नहीं की अथवा उनकी रिपोर्ट चुनाव आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध नहीं थी। वित्तीय वर्ष 2024-25 में केवल 12 क्षेत्रीय दलों ने समय-सीमा के भीतर अपनी रिपोर्ट दाखिल की, जबकि 2023-24 में यह संख्या 24 थी। कई दलों ने अपनी रिपोर्ट 160 दिन तक की देरी से जमा की।
ADR ने निष्कर्ष में कहा है कि क्षेत्रीय दलों को मिलने वाला राजनीतिक चंदा लगातार कुछ चुनिंदा दलों और कुछ बड़े दानदाताओं के हाथों में सिमटता जा रहा है। साथ ही, दानदाताओं के नाम, पते और पैन जैसी अनिवार्य सूचनाओं के खुलासे में बढ़ती कमी राजनीतिक वित्तपोषण की पारदर्शिता और सार्वजनिक जवाबदेही को कमजोर कर रही है। संगठन ने राजनीतिक चंदे की व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए खुलासा संबंधी नियमों को और सख्त करने की आवश्यकता पर बल दिया।