सीटें बचाओ या वापसी करो! बिहार चुनाव के दूसरे चरण में NDA और महागठबंधन के सामने सबसे बड़ी चुनौती

Bihar Election 2025 Phase 2एनडीए बनाम महागठबंधन की बड़ी परीक्षा। 18 जिलों की 122 सीटों पर चुनाव, जिसमें चंपारण, मिथिलांचल और सीमांचल शामिल हैं। राजनीतिक दलों के लिए सत्ता बनाए रखने या फिर से पाने की सबसे बड़ी चुनौती।

Update:2025-11-08 09:59 IST

Bihar Assembly Elections 2025: बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में 18 जिलों की 122 सीटों पर 11 नवंबर को मतदान होगा। इन सीटों पर कुल 1302 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमाएंगे। इस चरण में बिहार के विभिन्न महत्वपूर्ण क्षेत्रों जैसे चंपारण बेल्ट, मिथिलांचल, सीमांचल और अन्य जिलों की सीटों पर चुनाव हो रहे हैं। दूसरे चरण के तहत जिन सीटों पर मतदान होगा, उनमें गया, कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद, अरवल, जहानाबाद, नवादा, भागलपुर, बांका, जमुई, सीतामढ़ी, शिवहर, मधुबनी, सुपौल, पूर्णिया, अररिया, कटिहार, किशनगंज, पूर्वी और पश्चिमी चंपारण शामिल हैं। ये सीटें चुनावी दृष्टिकोण से बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती हैं, और सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपनी पूरी ताकत इस चरण के प्रचार में झोंकी है।

सीटों की बचत होगी बड़ा सवाल

दूसरे चरण की चुनावी लड़ाई में जहां एनडीए के लिए अपनी सीटों को बचाए रखना एक बड़ी चुनौती होगी, वहीं महागठबंधन को अपनी वापसी के लिए जोर लगाना होगा। 2020 में इन सीटों पर महागठबंधन को 66 सीटें मिली थीं, लेकिन अब यह देखना होगा कि क्या वे अपनी स्थिति बनाए रख सकते हैं या बीजेपी और उनके सहयोगी दलों का प्रदर्शन और बेहतर होगा। दूसरे चरण के चुनाव में सबसे बड़ी चुनौती बीजेपी के लिए होगी, जो 2020 में सबसे ज्यादा सीटें जीतने में सफल रही थी। वहीं, जेडीयू के लिए अपनी साख बचाने का सवाल होगा। इसके अलावा, जीतनराम मांझी की पार्टी को भी अपनी सीटें बनाए रखने की चुनौती होगी। वहीं, महागठबंधन के लिए आरजेडी और कांग्रेस की परफॉर्मेंस पर सब कुछ निर्भर करेगा।

मुस्लिम वोटों पर केंद्रित चुनावी रणनीति

महागठबंधन के लिए 2020 में ओवैसी की पार्टी से झटका भी लगा था, क्योंकि मुस्लिम वोटरों की एक बड़ी संख्या ओवैसी के पक्ष में गई थी। इस बार, ओवैसी की पार्टी AIMIM ने सीमांचल और मिथिलांचल के क्षेत्रों में अपनी पूरी ताकत झोंकी है, जहां मुस्लिम वोटरों की संख्या काफी अधिक है। उनके लिए यह चुनावी मैदान बहुत अहम साबित हो सकता है। इसके अलावा, इस बार बसपा की तरफ से भी कुछ सीटों पर उम्मीदवार खड़े हैं, खासकर कैमूर जिले में, जहां मायावती ने अपनी एकमात्र रैली की थी। यहां के चारों सीटों पर उनका ध्यान केंद्रित है।

सत्ता की दिशा तय करेगा परिणाम

इस चुनावी प्रक्रिया में उम्मीदवारों को अपनी साख बचाने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी, क्योंकि इन सीटों पर जो भी पार्टी अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखेगी, वही आगामी चुनाव में सत्ता में आने का दावा कर सकेगी। इसलिए, बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण का परिणाम खासा अहम होगा, और इससे आने वाले चुनावों के लिए राजनीतिक धारा तय हो सकती है। इस प्रकार, बिहार में दूसरा चरण महागठबंधन, एनडीए और अन्य पार्टियों के लिए एक अहम परीक्षा साबित होने वाला है, और इस चरण का परिणाम अगले राजनीतिक घटनाक्रम का मार्गदर्शन करेगा।

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