Bihar Election Results 2025: दलित महिला का उभरता चेहरा दीपा मांझी 16034 वोटों से जीती
Imamganj Vidhan Sabha Election Results 2025: दीपा कुमारी मांझी बिहार की राजनीति में तेजी से उभर रहीं महिला नेताओं में शामिल हैं...
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Imamganj Vidhan Sabha Election Results 2025: दीपा कुमारी मांझी बिहार की राजनीति में तेजी से उभर रहीं महिला नेताओं में शामिल हैं। हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) की सक्रिय सदस्य के रूप में वे 2024 के इमामगंज उपचुनाव में पहली बार विधायक बनीं और दलित-महिला नेतृत्व की नई पहचान गढ़ी। मुसहर समुदाय से ताल्लुक रखने वाली दीपा न केवल राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ईबीसी/दलित वोट बैंक का प्रतिनिधित्व करती हैं, बल्कि ‘हम’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की बहू भी हैं। 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में उन्होंने इमामगंज से एनडीए से चुनाव लड़ा जहाँ मुकाबला त्रिकोणीय है था – आरजेडी की रितु प्रिया चौधरी और जन सुराज के अजीत कुमार के साथ।
दीपा कुमारी मांझी का प्रारंभिक जीवन और परिवार (Bihar Leader Deepa Manjhi Bio in Hindi)
दीपा मांझी का जन्म गया जिले के एक साधारण दलित परिवार में हुआ, जहाँ बचपन से ही सामाजिक असमानताओं, शिक्षा और दलित उत्थान से जुड़े मुद्दों का प्रभाव उन पर गहरा रहा। वे बिहार के मुसहर समुदाय से आती हैं, जो राज्य के सबसे पिछड़े वर्गों में गिना जाता है। विवाह के बाद वे जीतन राम मांझी के परिवार का हिस्सा बनीं—पति संतोष कुमार सुमन बिहार सरकार में मंत्री हैं और ससुर जीतन राम मांझी प्रदेश तथा राष्ट्रीय राजनीति का जाना-पहचाना चेहरा हैं। सास निर्मला देवी भी सामाजिक गतिविधियों से जुड़ी हैं। परिवार राजनीतिक रूप से लगातार सक्रिय रहा है और दीपा का इमामगंज क्षेत्र से स्थानीय व सामाजिक जुड़ाव मजबूत रहा है।
दीपा की प्रारंभिक शिक्षा गया के स्थानीय स्कूलों में हुई। इसके बाद उन्होंने मगध विश्वविद्यालय से बीए की डिग्री प्राप्त की। राजनीति में प्रवेश से पहले वे सामाजिक कार्य, विशेषकर महिला शिक्षा और दलित समुदाय के कल्याण से जुड़े अभियानों में सक्रिय रहीं, जिसने उनकी राजनीतिक छवि को जमीनी और समाज-केंद्रित बनाया।
दीपा कुमारी मांझी का राजनीतिक करियर (Deepa Manjhi Political Career in Hindi)
दीपा मांझी का राजनीतिक सफर 2024 के उपचुनाव से शुरू हुआ, जब जीतन राम मांझी के लोकसभा सदस्य चुने जाने के बाद इमामगंज विधानसभा सीट खाली हुई। ‘हम’ ने दीपा को उम्मीदवार बनाकर संकेत दिया कि पार्टी नेतृत्व दलित समुदाय के भीतर परिवार की स्थापित विश्वसनीयता को आगे बढ़ाना चाहता है। उपचुनाव में जीत के साथ वे पहली बार विधानसभा पहुँचीं। 2025 में उन्हें दोबारा उसी सीट से एनडीए की ओर से टिकट मिला। चुनाव प्रचार में उन्होंने दलित-मुसहर समुदाय, ईबीसी मतदाताओं, महिलाओं, युवा शिक्षा, स्थानीय रोजगार और बाढ़ नियंत्रण जैसे मुद्दों को केंद्र में रखा। जीतन राम मांझी का सक्रिय प्रचार उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत माना जाता है।
विवाद और आलोचनाएँ
दीपा पर मुख्य आलोचना “परिवारवाद” को लेकर हुई है, क्योंकि उनकी पार्टी ने एक ही परिवार से लगातार कई सदस्यों को टिकट दिया है—उनकी समधन ज्योति देवी (बाराचट्टी) भी इसी आरोप का हिस्सा रही हैं। विपक्ष ने इसे कई बार “परिवार राज” बताया। नवंबर 2025 में चुनाव प्रचार के दौरान एक विवाद तब उठा जब सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में उनके प्रचार वाहन से शराब बरामद किए जाने का दावा किया गया। जबकि पार्टी नेतृत्व ने इस आरोप को राजनीति से प्रेरित बताया और इसे खारिज कर दिया। इसके अलावा उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है।
व्यक्तिगत जीवन और संपत्ति
दीपा मांझी का विवाह संतोष कुमार सुमन से हुआ है। वे अपने परिवार के साथ पटना और गया के बीच समय बिताती हैं। 2024 के हलफनामे के अनुसार उनकी कुल संपत्ति लगभग 20–30 लाख रुपये के बीच है और उन पर किसी प्रकार की वित्तीय देनदारी नहीं है। वे सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं और ‘हम’ से जुड़े आधिकारिक पेजों के माध्यम से जनसंपर्क बनाए रखती हैं। उनकी रुचियों में महिला सशक्तिकरण, दलित कल्याण और सांस्कृतिक गतिविधियों में भागीदारी शामिल है।