RJD Split: बिहार सियासत में भूचाल! बंगाल-महाराष्ट्र के बाद क्या बिखरने वाला है RJD का कुनबा?
RJD Split: बिहार की राजनीति में एक बार फिर राष्ट्रीय जनता दल के भीतर संभावित टूट की चर्चा जोर पकड़ने लगी है।
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RJD Split: बिहार की राजनीति में एक बार फिर राष्ट्रीय जनता दल के भीतर संभावित टूट की चर्चा जोर पकड़ने लगी है। भारतीय जनता पार्टी के विधान पार्षद जीवन कुमार के हालिया बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में अटकलों का दौर शुरू हो गया है। इससे पहले भी राज्यसभा चुनाव, विधान परिषद चुनाव और विधानसभा में विश्वास-अविश्वास प्रस्ताव के दौरान राजद और कांग्रेस के कुछ विधायकों के रुख को लेकर सवाल उठते रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हाल के वर्षों में कई मौकों पर विपक्षी दलों के कुछ नेताओं की अनुपस्थिति या अलग रुख ने इन चर्चाओं को बल दिया है। अब एक बार फिर RJD के कुछ विधायकों के एनडीए के संपर्क में होने की अटकलें सामने आ रही हैं।
किन नेताओं को लेकर हो रही चर्चा?
सबसे अधिक चर्चा ढाका विधानसभा सीट से विधायक फैसल रहमान को लेकर है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा है कि वह पार्टी के भीतर कुछ मुद्दों को लेकर असंतुष्ट बताए जा रहे हैं। राज्यसभा चुनाव के दौरान उनके रुख को लेकर भी सवाल उठे थे, जिसके बाद उनके एनडीए नेताओं से संपर्क में होने की अटकलें तेज हुईं। इसी तरह बिस्फी से विधायक आसिफ अहमद का नाम भी चर्चाओं में शामिल है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक हलकों में उनके भविष्य को लेकर चर्चाएं जारी हैं।
अनीता महतो और अमरेंद्र कुशवाहा पर भी नजर
वारसलीगंज की विधायक अनीता महतो का नाम भी संभावित राजनीतिक बदलाव की चर्चाओं में लिया जा रहा है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ उनकी मुलाकात के बाद से राजनीतिक अटकलों को और हवा मिली है। वहीं गोह विधानसभा क्षेत्र के विधायक अमरेंद्र कुशवाहा को लेकर भी चर्चाएं हैं। हालांकि उनकी ओर से अब तक किसी तरह का संकेत नहीं मिला है, लेकिन बदलते राजनीतिक माहौल को देखते हुए उन्हें भी संभावित समीकरणों का हिस्सा माना जा रहा है।
क्षेत्रीय दलों में टूट की घटनाओं से बढ़ी चिंता
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि देशभर में क्षेत्रीय दलों में टूट और पुनर्गठन की घटनाओं ने बिहार की राजनीति को भी प्रभावित किया है। विभिन्न राज्यों में बड़े राजनीतिक दलों के भीतर उभरे असंतोष और दल-बदल की घटनाओं के कारण राजद को लेकर भी कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि राजद की ओर से इन चर्चाओं पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पार्टी नेतृत्व लगातार संगठन को मजबूत बताता रहा है और टूट की संभावनाओं को खारिज करता रहा है। बिहार विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ ही राजनीतिक बयानबाजी और रणनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। ऐसे में नेताओं के संपर्क, संभावित गठबंधन और दल-बदल की चर्चाएं आने वाले दिनों में और तेज हो सकती हैं।