Bihar Seven MLAs: सत्ता के सात फेरे, मंत्री पद अधूरे! बिहार में गजब लॉलीपाप, कैबिनेट का सपना टूटा

Bihar Seven MLAs: बिहार की राजनीति में सात विधायकों की कहानी चर्चा में है, जिन्हें सरकार बदलने के बाद भी मंत्री पद नहीं मिला और उनका इंतजार अब भी जारी है।

Update:2026-05-23 15:18 IST

Bihar Seven MLAs

Bihar Seven MLAs: पटना की राजनीति में इन दिनों सात विधायकों की कहानी खूब चर्चा में है। दो साल पहले जिन्होंने विपक्ष छोड़ सत्ता की नाव पकड़ी थी, उन्हें लगा था कि अब मंत्री बंगले के साथ मंत्रालय की चाबी भी हाथ लग जाएगी। लेकिन बिहार की राजनीति में कुर्सी का गणित इतना आसान कहां!

2024 के विश्वास मत में जब नीतीश कुमार की सरकार डगमगा रही थी, तब राजद और कांग्रेस के सात विधायक अचानक सत्ता पक्ष के ‘हनुमान’ बन गए। विधानसभा में सरकार के समर्थन में खड़े हुए और बदले में उम्मीद की कि कैबिनेट में जगह मिलेगी। मगर राजनीति में उम्मीद और हकीकत के बीच वही दूरी होती है, जो चुनावी घोषणा और ज़मीनी विकास के बीच होती है। सरकार ने तत्काल इन नेताओं को ‘राज्य स्तरीय कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति’ का सदस्य बना दिया। नाम लंबा, काम हल्का और दर्जा ‘उप मंत्री’ वाला। बंगला, गाड़ी, गार्ड, सरकारी बाबू सब मिल गया बस मंत्रालय नहीं मिला। यानी शादी में बाराती का पूरा सम्मान, लेकिन दूल्हा बनने का मौका नहीं।

अब 2026 में सरकार बदली, चेहरे बदले, समीकरण बदले, मगर इन सातों का भाग्य नहीं बदला। नई अधिसूचना में भी वही पुराना दर्जा बरकरार। सत्ता ने संदेश साफ दे दिया ‘सपोर्ट की कीमत है, लेकिन कैबिनेट की सीट लिमिटेड स्टॉक में है।’

सबसे दिलचस्प कहानी रही संगीता कुमारी की। अप्रैल में जब सम्राट चौधरी के नेतृत्व में नई सरकार बनी, तो सोशल मीडिया के राजनीतिक ज्योतिषियों ने उन्हें लगभग मुख्यमंत्री घोषित कर दिया था। वे खुद भी दिल्ली दरबार में डेरा डाल बैठीं। उधर चेतन आनंद के लिए भारी-भरकम मंत्रालय की भविष्यवाणियां हो रही थीं। लेकिन अंत में निकला वही सरकारी नोटिफिकेशन ‘स्थिति यथावत’।

मतलब, राजनीति की ट्रेन में सीट कन्फर्म नहीं हुई, सिर्फ वेटिंग लिस्ट आगे बढ़ी

इन सात नेताओं में राजद के चेतन आनंद, नीलम देवी, संगीता कुमारी, प्रह्लाद यादव, भरत बिंद और कांग्रेस के सिद्धार्थ सौरव व मुरारी प्रसाद गौतम शामिल थे। एनडीए ने इनमें से ज्यादातर को टिकट भी दिया, सब जीत भी गए, लेकिन मंत्री पद आते-आते राजनीति का दरवाजा फिर बंद हो गया। उधर भाजपा में भी समायोजन कला जारी है।

पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष ललन कुमार मंडल को नई अधिसूचना में डाउनग्रेड कर सदस्य बना दिया गया। राजनीति में इसे पदावनति नहीं, संगठनात्मक संतुलन कहा जाता है। उनकी जगह संजय सर्राफ उपाध्यक्ष बनाए गए और राज्यमंत्री का दर्जा पा गए। बिहार की राजनीति का नया फार्मूला अब साफ है जो सरकार बचाएगा, उसे बंगला मिलेगा। जो समीकरण बनाएगा, वही मंत्रालय पाएगा।

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