BJP Leadership: बीजेपी ने बदली ‘सियासत की परिभाषा’! दूसरे दलों से आए ये 4 नेता बन गए मुख्यमंत्री

BJP Leadership: भारतीय जनता पार्टी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के नेतृत्व में पिछले कुछ वर्षों में एक नई राजनीतिक संस्कृति देखने को मिली है।

Update:2026-05-12 14:09 IST

Other Party Leaders Made CM in BJP

BJP Leadership: भारतीय जनता पार्टी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के नेतृत्व में एक नई राजनीतिक संस्कृति देखने को मिली है। पार्टी ने उन प्रभावशाली नेताओं को भी शीर्ष पदों तक पहुंचाया है, जो कभी दूसरे दलों में हुआ करते थे। खास बात यह है कि बीजेपी में शामिल होने के लगभग पांच से छह वर्षों के भीतर ऐसे कई नेता अपने-अपने राज्यों में मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंच गए। इससे बीजेपी ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि पार्टी में अवसर केवल पुराने कार्यकर्ताओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि राजनीतिक क्षमता और जनाधार रखने वाले बाहरी नेताओं को भी शीर्ष जिम्मेदारी दी जा सकती है। इस राजनीतिक बदलाव के सबसे बड़े उदाहरण हिमंत बिस्वा सरमा, मानिक साहा, शुभेंदु अधिकारी और सम्राट चौधरी हैं। ये चारों नेता अलग-अलग दलों से बीजेपी में शामिल हुए और आज अपने भाजपा के सबसे मजबूत चेहरे बन चुके हैं।

कांग्रेस से बीजेपी में आए हिमंत बिस्वा सरमा

हिमंत बिस्वा सरमा ने बीजेपी का दामन थामा था। वह पहले कांग्रेस में थे और असम की राजनीति में बेहद प्रभावशाली नेता माने जाते थे। तरुण गोगोई सरकार में वे लंबे समय तक मंत्री रहे और सरकार में नंबर दो की भूमिका निभाते थे। लेकिन कांग्रेस में नेतृत्व संघर्ष और भविष्य की सीमित संभावनाओं को देखते हुए उन्होंने 28 अगस्त 2015 को बीजेपी की सदस्यता ग्रहण कर ली। उन्होंने असम में बीजेपी को मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभाई। साल 2016 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की और पहली बार असम में सरकार बनाई। हिमंत बिस्वा सरमा को सरकार में अहम जिम्मेदारी मिली और आखिरकार 10 मई 2021 को वे पहली बार मुख्यमंत्री बने। इसके बाद साल 2026 के चुनाव में भी उन्होंने बीजेपी को बड़ी जीत दिलाई और लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री की कुर्सी पर विराजमान हो गए।

आरजेडी, जेडीयू से भाजपा आए सम्राट चौधरी

बिहार राजनीति में भी सम्राट चौधरी का तेजी से सियासत की ऊंचाई पर पहुंचने का अवसर मिला। सम्राट चौधरी पहले राष्ट्रीय जनता दल और फिर जनता दल यूनाइटेड में रहे। उनके पिता शकुनी चौधरी बिहार की राजनीति के बड़े नेताओं में गिने जाते थे। सम्राट ने 11 जून 2017 को बीजेपी जॉइन की और उसके बाद उनका सियासी ग्राफ लगातार ऊपर जाता गया। पहले उन्हें प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया, फिर विधान परिषद में पार्टी का नेता और बाद में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई। साल 2024 में वे बिहार सरकार में उपमुख्यमंत्री बने और फिर 15 अप्रैल 2026 को बीजेपी के पहले बिहार सीएमके रूप में शपथ ली। बीजेपी  में शामिल होने के करीब छह साल बाद उन्हें यह बड़ी जिम्मेदारी मिली।

पश्चिम बंगाल में बीजेपी की सबसे बड़ी राजनीतिक सफलता शुभेंदु अधिकारी के रूप में सामने आई। शुभेंदु अधिकारी पहले ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस के मजबूत नेता थे। उनके पिता शिशिर अधिकारी और परिवार का बंगाल की राजनीति में गहरा प्रभाव रहा है। लेकिन टीएमसी में अभिषेक बनर्जी की बढ़ती सक्रियता के बाद शुभेंदु ने भाजपा का रुख किया। 19 दिसंबर 2020 को शुभेंदु अधिकारी ने तृणमूल कांग्रेस का दामन छोड़ भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली। बीजेपी में शामिल होने के बाद उन्होंने नंदीग्राम सीट से ममता बनर्जी को हराकर सुर्खियां बटोरीं। अगले पांच वर्षों तक उन्होंने बंगाल में बीजेपी का मजबूत चेहरा बनकर काम किया और साल 2026 विधानसभा चुनाव में भाजपा को दो-तिहाई बहुमत दिलाने में अहम भूमिका निभाई और 9 मई 2026 को शुभेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बने।

कांग्रेस छोड़ भाजपा में आए मानिक साहा

त्रिपुरा में मानिक साहा का सफर भी इसी तरह का रहा। मानिक साहा साल 2016 में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए थे। बीजेपी ने उन्हें धीरे-धीरे संगठन और सरकार में आगे बढ़ाया। साल 2022 में बिप्लब देब की जगह उन्हें मुख्यमंत्री बनाया गया और साल 2023 में दोबारा सत्ता की कमान सौंपी गई। इन नेताओं के अलावा भी साल में कई ऐसे उदाहरण देखने को मिले हैं, जहां दूसरे दलों से आए नेताओं को मुख्यमंत्री पद तक पहुंचाया गया। कर्नाटक में बसावराज बोम्मई जनता दल से भाजपा में आए और 13 साल बाद मुख्यमंत्री बने। वहीं मणिपुर में एन बीरेन सिंह कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए और अगले ही चुनाव के बाद मुख्यमंत्री बन गए। भाजपा की यह रणनीति अब साफ तौर पर दिखाई दे रही है कि पार्टी केवल वैचारिक पृष्ठभूमि नहीं, बल्कि जनाधार, संगठन क्षमता और चुनाव जिताने की ताकत को भी महत्व दे रही है।  

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