Udhayanidhi Stalin Sanatan remark: उदयनिधि स्टालिन ने फिर पकड़ी सनातन को खत्म करने की जिद्द! विधानसभा में दिया बड़ा बयान

Udhayanidhi Stalin Sanatan remark: तमिलनाडु विधानसभा में उदयनिधि स्टालिन ने फिर छेड़ा ‘सनातन धर्म’ विवाद! पुराने बयान को दोहराते हुए DMK नेता ने दिया बड़ा बयान, जिसके बाद सियासी घमासान तेज हो गया। जानिए क्या कहा और क्यों मचा बवाल।

Update:2026-05-12 14:55 IST

Udhayanidhi Stalin Sanatan remark: तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर 'सनातन धर्म' को लेकर बड़ा सियासी घमासान छिड़ गया है। द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के कद्दावर नेता और पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बेटे, उदयनिधि स्टालिन ने विधानसभा में विपक्ष के नेता (LoP) के रूप में अपना पहला भाषण देते हुए फिर से विवादित टिप्पणी कर दी है। उदयनिधि ने न केवल अपने पुराने बयान को दोहराया, बल्कि नई सरकार को चेतावनी देते हुए 'द्रविड़ विचारधारा' का झंडा बुलंद किया। इस बयान के बाद राज्य में वैचारिक टकराव और भी तेज होने के आसार हैं।

'सनातन धर्म' को खत्म करने की जिद्द पर कायम

मंगलवार को सदन की कार्यवाही के दौरान उदयनिधि स्टालिन ने अपनी पुरानी विवादित टिप्पणी को फिर से हवा दी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, "सनातन धर्म लोगों को बांटने का काम करता है, इसलिए इसे निश्चित रूप से खत्म किया जाना चाहिए।" बता दें कि सितंबर 2023 में उन्होंने सनातन धर्म की तुलना डेंगू, मलेरिया और कोरोना जैसी बीमारियों से की थी, जिस पर देशभर में भारी आक्रोश देखने को मिला था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट और मद्रास हाईकोर्ट की फटकार के बावजूद उदयनिधि के तेवर नरम नहीं पड़े हैं। उन्होंने सदन में साफ कर दिया कि वह अपनी इस विचारधारा से पीछे हटने वाले नहीं हैं।

'तमिल थाई वजथु' के सम्मान पर सरकार को चेतावनी

अपने भाषण के दौरान उदयनिधि ने राज्य के गौरव और सांस्कृतिक पहचान का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया। उन्होंने नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में राज्य गान 'तमिल थाई वजथु' को तीसरे स्थान पर रखने पर गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने सत्ता पक्ष को कड़ा संदेश देते हुए कहा, "शपथ ग्रहण में जो हुआ वह एक गंभीर गलती थी। तमिलनाडु के किसी भी सरकारी कार्यक्रम में राज्य गान को हमेशा सर्वोच्च और पहला स्थान मिलना चाहिए।" उन्होंने चेतावनी दी कि विपक्ष ऐसी किसी भी अनदेखी को दोबारा बर्दाश्त नहीं करेगा।

विपक्ष की भूमिका: 'गाड़ी का ब्रेक और बैल की लगाम'

लोकतंत्र में विपक्ष की अहमियत बताते हुए उदयनिधि ने डीएमके संस्थापक सी.एन. अन्नादुरई के मशहूर विचारों का सहारा लिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष सरकार के लिए 'वाहन के ब्रेक' या 'बैल की लगाम' की तरह होता है, जो उसे रास्ते से भटकने से रोकता है। उदयनिधि ने याद दिलाया कि इस बार विधानसभा में विपक्ष की संख्या सत्तारूढ़ दल के लगभग बराबर है, इसलिए वे एक 'रचनात्मक शक्ति' के रूप में काम करेंगे और सरकार की हर गलती पर लगाम कसेंगे।

लोयोला कॉलेज का रिश्ता और 'सीनियर बैच' का तंज

गंभीर बहस के बीच सदन में कुछ हल्के-फुल्के पल भी आए। उदयनिधि ने मुस्कुराते हुए जिक्र किया कि वह खुद, वर्तमान मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय और स्पीकर जेसीडी प्रभाकर तीनों ही लोयोला कॉलेज के छात्र रहे हैं। लेकिन साथ ही उन्होंने मजाकिया अंदाज में यह भी कह दिया कि राजनीति के मैदान और तजुर्बे के मामले में डीएमके ही 'असली सीनियर' है। भाषण के अंत में उन्होंने सदन में महिला विधायकों की बढ़ती संख्या का स्वागत किया और 'द्रविड़ मॉडल' यानी "सबके लिए सब कुछ" के सिद्धांत पर अडिग रहने की बात कही। उन्होंने स्पीकर से निष्पक्ष रहने की अपील की ताकि विपक्ष जनता की समस्याओं को सदन में मजबूती से रख सके।

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