NEET Paper Leak: कैसे हुआ NEET Paper Leak? राजस्थान, सीकर, हरियाणा से बिहार तक फैला सनसनीखेज नेटवर्क
NEET Paper Leak 2026: NEET पेपर लीक मामले में बड़ा खुलासा! राजस्थान के सीकर से बिहार तक फैले नेटवर्क ने पूरे देश को हिला दिया। CBI जांच में सामने आए कोचिंग माफिया, करोड़ों के सौदे और ‘पेपर आ गया है’ वाले कॉल का पूरा सच जानिए।
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NEET Paper Leak 2026: देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET अब केवल एक विवाद नहीं, बल्कि एक गहरे और सुनियोजित अपराध की कहानी बन गई है। जांच एजेंसियों को अंदेशा है कि यह कोई छिटपुट घटना नहीं, बल्कि एक संगठित 'मल्टी-स्टेट नेटवर्क' है, जिसकी जड़ें राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली से लेकर बिहार और केरल तक फैली हुई हैं। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, पेपर लीक के ऐसे-ऐसे रूट सामने आ रहे हैं जिसने पूरे शिक्षा तंत्र को हिलाकर रख दिया है। दावा किया जा रहा है कि यह पेपर सबसे पहले नासिक से निकला, फिर हरियाणा और जयपुर होते हुए सीकर पहुंचा और वहां से देखते ही देखते पूरे देश के छात्रों तक पहुंच गया। अब इस पूरे खेल की कमान सीबीआई ने संभाल ली है।
सीकर बना 'लीक' का सबसे बड़ा हब
राजस्थान का सीकर शहर, जो पिछले कुछ वर्षों में कोटा की तर्ज पर एक बड़े कोचिंग हब के रूप में उभरा है, इस बार पेपर लीक का मुख्य केंद्र माना जा रहा है। जांच एजेंसियों का मानना है कि यहां के कोचिंग नेटवर्क और हॉस्टलों की भीड़ का फायदा उठाकर 'गेस पेपर' के नाम पर असली सवालों को फैलाया गया। सूत्रों के अनुसार, छात्रों को यह भरोसा दिलाया गया कि परीक्षा में यही सवाल आएंगे। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि बायोलॉजी के सभी 90 और केमिस्ट्री के सभी 45 सवाल परीक्षा से पहले ही चुनिंदा लोगों के पास पहुंचने के संकेत मिले हैं। अगर यह सच है, तो यह केवल संयोग नहीं बल्कि एक बड़ी साजिश है।
600 नंबर की 'पक्की गारंटी' का खेल
जांच में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि कथित प्रश्न बैंक से करीब 140 सवाल असली परीक्षा में हूबहू मिल गए। NEET में हर सवाल 4 अंक का होता है, जिसका मतलब है कि जिन छात्रों तक यह पेपर पहुंचा, उन्हें सीधे तौर पर 600 नंबर तक का फायदा मिल सकता था। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी गेस पेपर से इतने बड़े पैमाने पर सवालों का मिलना नामुमकिन है। इसी वजह से जांच अब सीधे पेपर लीक के कोण से की जा रही है, क्योंकि इतनी सटीकता केवल तभी संभव है जब मूल पेपर ही बाहर आ गया हो।
"पेपर आ गया है"... दिल्ली से आया वो एक फोन कॉल
जांच के दौरान एक और अहम कड़ी दिल्ली से जुड़ी मिली है। बताया जा रहा है कि परीक्षा से ठीक पहले कुछ छात्रों को दिल्ली से फोन आए थे, जिसमें सीधे कहा गया "पेपर आ गया है।" इसके बाद सीकर में तेजी से इस सामग्री का सर्कुलेशन शुरू हुआ। शुरुआत में यह कथित पेपर लाखों रुपये में बेचा गया, लेकिन जैसे-जैसे परीक्षा की घड़ी नजदीक आई, यह खेल 'रिटेल' में बदल गया। छात्रों ने खुद ही इसे 5 हजार से 30 हजार रुपये में एक-दूसरे को बेचना शुरू कर दिया। पूरा सिस्टम लालच और कमीशन की भेंट चढ़ गया।
कोचिंग माफिया और हॉस्टल नेटवर्क पर कसता शिकंजा
पुलिस और सीबीआई अब केवल छात्रों तक सीमित नहीं हैं। जांच के घेरे में कई कोचिंग संचालक, एमबीबीएस काउंसलिंग से जुड़े लोग और हॉस्टल मैनेजर भी हैं। सीकर के एक कोचिंग संचालक को हिरासत में लिया गया है, जबकि 'राकेश' नाम के एक संदिग्ध की तलाश जारी है जो काउंसलिंग की आड़ में यह धंधा चला रहा था। आरोप है कि उसने महज 30 हजार रुपये में यह पेपर केरल के एक मेडिकल छात्र को बेचा था। वहीं, नागौर के एक छात्र से पेपर के बदले 28 लाख रुपये मांगे जाने की खबर ने भी जांच एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं।
प्रिंटिंग प्रेस या ट्रांसपोर्ट चैन: कहां से हुई सेंधमारी?
सबसे बड़ा सवाल अब भी वही है आखिर पेपर लीक हुआ कहां से? एजेंसियों को शक है कि पेपर सीधे प्रिंटिंग प्रेस या उसे ले जाने वाली चैन से बाहर निकाला गया होगा। इसी कारण अब सीबीआई उन सभी जगहों की बारीकी से जांच कर रही है जहां पेपर छपा या जहां से उसे परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाया गया। डिजिटल ट्रेल की बात करें तो व्हाट्सएप के साथ-साथ कई एन्क्रिप्टेड ऐप्स के जरिए इसे फॉरवर्ड किया गया था। 22 लाख छात्रों के भविष्य के साथ हुआ यह खिलवाड़ अब पूरे देश के लिए चिंता का विषय बन गया है, जहां मेहनत करने वाले छात्र खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।