'RSS, जैश-ए-मोहम्मद और तालिबान एक समान', कर्नाटक कांग्रेस अद्यक्ष के बयान से हलचल

BK Hariprasad RSS Controversy: कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद ने आरएसएस की तुलना जैश-ए-मोहम्मद और तालिबान से कर दी। वंदे मातरम विवाद और RSS के रजिस्ट्रेशन को लेकर भी कांग्रेस ने सवाल उठाए।

Update:2026-08-18 14:53 IST

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BK Hariprasad RSS Controversy: कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी यानी केपीसीसी (KPCC) के अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद (BK Hariprasad) ने सोमवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस (RSS) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने देशभक्ति (Patriotism) और कानूनी पंजीकरण (Legal Registration) के मुद्दे पर आरएसएस की तुलना अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठनों जैश-ए-मोहम्मद (Jaish-e-Mohammed) और तालिबान (Taliban) से कर दी।

प्रेस कॉन्फ्रेंस (Press Conference) को संबोधित करते हुए बीके हरिप्रसाद ने कहा कि जैश-ए-मोहम्मद, तालिबान और आरएसएस में कोई अंतर नहीं है, क्योंकि उनके मुताबिक तीनों भारत में पंजीकृत नहीं हैं। उनके इस बयान के बाद आरएसएस को लेकर चल रही राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।

वंदे मातरम विवाद पर भी RSS को घेरा

वंदे मातरम विवाद (Vande Mataram Row) को लेकर केरलम यूनिवर्सिटी के कुलपति मोहानन कुन्नुमल (Mohanan Kunnummal) की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए बीके हरिप्रसाद ने कहा कि उन्होंने आरएसएस पर सही निशाना साधा है।

हरिप्रसाद ने दावा किया कि आरएसएस के लोग न तो वंदे मातरम गाते हैं, न राष्ट्रगान (National Anthem) गाते हैं और न ही तिरंगा (Tricolour) फहराते हैं। उनके इस बयान को हाल ही में वंदे मातरम को लेकर शुरू हुए राजनीतिक विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है।

यह विवाद उस समय और बढ़ गया जब वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) और राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के खिलाफ वंदे मातरम के गायन के दौरान कथित व्यवधान पैदा करने के आरोप में एफआईआर (FIR) दर्ज की गई। इसके अलावा केरल के कुलपति मोहानन कुन्नुमल ने आरएसएस के एक कार्यक्रम में वंदे मातरम का विरोध करने वालों की आलोचना की थी।

RSS के रजिस्ट्रेशन को लेकर भी घमासान

आरएसएस के कानूनी पंजीकरण (RSS Legal Registration) को लेकर विवाद तब और बढ़ा जब बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव संगठन बीएल संतोष (B L Santosh) ने हिंदू जागरण वेदिके के अखंड भारत संकल्प दिवस (Akhand Bharat Sankalp Day) कार्यक्रम में कहा कि संघ को कानूनी पंजीकरण की जरूरत नहीं है।

बीएल संतोष ने कहा था कि आरएसएस 1925 से बिना किसी वैधानिक दर्जे (Statutory Status) के काम कर रहा है। उनका तर्क था कि किसी संगठन की पहचान कागजी प्रक्रिया से नहीं, बल्कि जनता के भरोसे से होती है।

उन्होंने यह भी कहा था कि विभाजन (Partition) और दूसरे संकटों के दौरान आरएसएस राष्ट्र के साथ खड़ा रहा, इसके लिए उसे किसी सरकारी प्रमाणपत्र या पंजीकरण की जरूरत नहीं पड़ी।

RSS की संपत्ति और चंदे पर सवाल

आरएसएस के पंजीकरण को लेकर कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खरगे (Priyank Kharge) भी सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर आरएसएस से जवाब मांगते हुए पूछा कि संघ किस भारतीय कानून (Indian Law) के तहत अस्तित्व में है।

प्रियंक खरगे ने आरएसएस की देशभर में मौजूद संपत्तियों (Properties), बैंक खातों (Bank Accounts) और मिलने वाले चंदे (Donations) को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि देशभर की संपत्तियों का मालिक कौन है, क्योंकि उनके मुताबिक अपंजीकृत संस्थाएं (Unregistered Bodies) सीधे तौर पर संपत्तियां नहीं रख सकतीं।

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि आरएसएस के बैंक खाते किसके नाम पर चलाए जाते हैं और गुरु दक्षिणा (Gurudakshina) जैसे चंदे किस नाम से हासिल किए जाते हैं। इसके साथ ही उन्होंने ऑडिटेड अकाउंट्स (Audited Accounts) और टैक्स फाइलिंग (Tax Filings) को लेकर भी सवाल खड़े किए।

प्रियंक खरगे ने कहा कि इतिहास कानूनी पारदर्शिता (Legal Transparency) का विकल्प नहीं हो सकता। उनका कहना था कि जैसे-जैसे किसी संगठन का प्रभाव बढ़ता है, वैसे-वैसे उसकी सार्वजनिक जवाबदेही (Public Accountability) भी बढ़नी चाहिए।

कांग्रेस ने देशभक्ति के प्रमाणपत्र को किया खारिज

प्रियंक खरगे ने बीजेपी (BJP), भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM), अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद यानी एबीवीपी (ABVP) और आरएसएस पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी को अपनी देशभक्ति के लिए इन संगठनों से किसी प्रमाणपत्र (Patriotism Certificate) की जरूरत नहीं है।

उन्होंने कहा कि ये वही लोग हैं, जिन्होंने भारत के स्वतंत्रता संग्राम (Freedom Struggle) में कुछ नहीं किया। प्रियंक खरगे ने यह भी आरोप लगाया कि उनके राजनीतिक मार्गदर्शकों (Political Mentors) ने 52 साल तक तिरंगा नहीं फहराया।

उनकी यह टिप्पणी कांग्रेस नेताओं सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज एफआईआर के बाद आई है। दोनों नेताओं पर स्वतंत्रता दिवस (Independence Day) के दौरान वंदे मातरम के गायन में कथित तौर पर व्यवधान पैदा करने का आरोप लगाया गया है।

‘राष्ट्रीय प्रतीकों को राजनीतिक हथियार बना रही बीजेपी’

प्रियंक खरगे ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए आरएसएस और बीजेपी पर राजनीतिक फायदे के लिए राष्ट्रीय प्रतीकों (National Symbols) का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बीजेपी राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रगान जैसे मुद्दों को राजनीतिक हथियार (Political Weapon) बनाने में लगी हुई है।

उन्होंने कहा कि बीजेपी हर चीज को हथियार बनाना चाहती है, चाहे वह राष्ट्रीय गीत हो या राष्ट्रगान। प्रियंक खरगे ने कहा कि उनके खिलाफ कितने भी मामले दर्ज किए जाएं, कांग्रेस को इन लोगों से देशभक्ति का कोई प्रमाणपत्र नहीं चाहिए।

इस पूरे विवाद में एक तरफ कांग्रेस नेता आरएसएस के कानूनी पंजीकरण, संपत्ति, बैंक खातों और चंदे को लेकर सवाल उठा रहे हैं, वहीं बीजेपी और आरएसएस की ओर से संगठन की लंबे समय से चली आ रही भूमिका और सार्वजनिक भरोसे को उसके अस्तित्व का आधार बताया जा रहा है। वंदे मातरम विवाद ने इस राजनीतिक टकराव को और तेज कर दिया है।

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