KPSC भर्ती में 80 लाख का खेल? ED ने 21 ठिकानों पर मारी रेड, चेयरमैन से लेकर उम्मीदवारों तक पर शिकंजा
KPSC Recruitment Scam: KPSC वेटरिनरी ऑफिसर भर्ती में कथित भ्रष्टाचार के आरोपों पर ED ने 21 ठिकानों पर छापेमारी की है। KPSC कार्यालय, निलंबित चेयरमैन, सदस्य, कथित बिचौलियों और चयनित उम्मीदवारों के ठिकाने जांच के दायरे में हैं।
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KPSC Recruitment Scam: कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) की वेटरिनरी ऑफिसर भर्ती (Veterinary Officer Recruitment) को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। भर्ती प्रक्रिया में कथित भ्रष्टाचार (Alleged Corruption) के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कर्नाटक और अहमदाबाद समेत 21 ठिकानों पर छापेमारी (ED Raids) शुरू की है। ईडी की टीमें इन सभी जगहों पर तलाशी अभियान चला रही हैं और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े लोगों तथा कथित बिचौलियों के ठिकानों की जांच कर रही हैं।
21 ठिकानों पर ED की छापेमारी
ईडी ने जिन 21 ठिकानों पर तलाशी शुरू की है, उनमें कर्नाटक लोक सेवा आयोग का कार्यालय (KPSC Office), निलंबित चेयरमैन शिवशंकरप्पा एस। साहूकार (Shivashankarappa S। Sahukar), KPSC सदस्य शांता होसमनी (Shanta Hosamani) के घर और कथित बिचौलियों (Alleged Middlemen) के ठिकाने शामिल हैं।
ईडी की टीमें इन स्थानों पर दस्तावेजों और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े अन्य रिकॉर्ड की जांच कर रही हैं। जांच का फोकस कथित तौर पर भर्ती प्रक्रिया में पैसों के लेनदेन और चयन को प्रभावित करने की कोशिश से जुड़े पहलुओं पर है।
एडुस्टेट सॉल्यूशंस के कार्यालय पर भी कार्रवाई
ईडी की कार्रवाई केवल KPSC और उससे जुड़े अधिकारियों तक सीमित नहीं है। परीक्षा की डिजिट कॉपियां जांचने वाली कंपनी एडुस्टेट सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड (Edustate Solutions Private Limited) के कार्यालय पर भी तलाशी ली जा रही है।
इसके अलावा वेटरिनरी ऑफिसर पद के लिए चुने गए कुछ उम्मीदवारों के ठिकानों पर भी ईडी की टीमें पहुंची हैं। कर्नाटक के कई शहरों के साथ-साथ अहमदाबाद (Ahmedabad) में भी छापेमारी की जा रही है।
ED की रडार पर कथित बिचौलियों के भी घर
KPSC भर्ती में कथित भ्रष्टाचार को लेकर ईडी ने बड़े स्तर पर तलाशी अभियान शुरू किया है। मामले में कथित बिचौलियों (Middlemen) के रूप में पहचाने गए अली और सिकंदर के घरों की भी तलाशी ली जा रही है।
जांच एजेंसी की कार्रवाई का मकसद भर्ती प्रक्रिया में कथित तौर पर हुए पैसों के लेनदेन और चयन प्रक्रिया को प्रभावित करने के आरोपों से जुड़े सबूत जुटाना है।
PMLA के तहत हो रही छापेमारी
ईडी की यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत की जा रही है। यह कार्रवाई निलंबित KPSC चेयरमैन शिवशंकरप्पा एस। साहूकार द्वारा जमानत (Bail) के लिए हाई कोर्ट (High Court) का रुख करने के एक दिन बाद शुरू हुई है।
भर्ती प्रक्रिया में कथित भ्रष्टाचार के आरोप सामने आने के बाद से ही मामला जांच के घेरे में है। अब ईडी की छापेमारी के बाद इस मामले में जांच का दायरा और बढ़ गया है।
क्या है KPSC भर्ती विवाद?
कर्नाटक लोक सेवा आयोग की वेटरिनरी ऑफिसर भर्ती को लेकर विवाद काफी गहरा गया है। इस भर्ती में कुल 400 पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की गई थी। आरोप है कि चयन प्रक्रिया में कथित तौर पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किया गया और योग्य उम्मीदवारों के साथ अन्याय हुआ।
अभ्यर्थियों का आरोप है कि अंतिम चयन सूची (Final Selection List) में नाम शामिल करने के बदले कथित बिचौलियों ने 80 लाख रुपये तक की मांग की। इन आरोपों के सामने आने के बाद पूरी भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे।
400 पदों के लिए शुरू हुई थी भर्ती
जानकारी के मुताबिक, KPSC ने कुल 400 वेटरिनरी ऑफिसर पदों (Veterinary Officer Posts) पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की थी। इनमें 342 नियमित पद (Regular Posts) और 58 बैकलॉग पद (Backlog Posts) शामिल थे।
भर्ती प्रक्रिया में उम्मीदवारों के चयन के लिए निर्धारित प्रक्रिया अपनाई जा रही थी, लेकिन बाद में कथित भ्रष्टाचार और पैसों के लेनदेन के आरोप सामने आने लगे। अभ्यर्थियों ने चयन प्रक्रिया में एजेंटों के जरिए कथित हेरफेर किए जाने का आरोप लगाया।
80 लाख रुपये तक मांगने का आरोप
उम्मीदवारों का दावा है कि कुछ कथित बिचौलियों ने अंतिम चयन सूची में जगह दिलाने के नाम पर भारी रकम की मांग की। आरोप है कि कुछ लोगों से कथित तौर पर 80 लाख रुपये तक मांगे गए।
उम्मीदवारों के मुताबिक, उन्हें यह भरोसा दिलाया गया कि अगर वे तय रकम दे देंगे तो उनका चयन वेटरिनरी ऑफिसर के पद पर हो जाएगा। इन आरोपों ने भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
एजेंटों के जरिए चयन में हेरफेर का आरोप
अभ्यर्थियों का कहना है कि पूरी भर्ती प्रक्रिया में कथित तौर पर एजेंटों के जरिए हेरफेर किया गया। उनका आरोप है कि कुछ उम्मीदवारों को पैसे के बदले अंतिम चयन सूची में शामिल कराने का भरोसा दिया गया।
उम्मीदवारों का कहना है कि इस तरह की कथित गड़बड़ी से उन अभ्यर्थियों के साथ अन्याय हुआ, जिन्होंने मेहनत और योग्यता के आधार पर परीक्षा और चयन प्रक्रिया में हिस्सा लिया था।
अब ईडी की ओर से कर्नाटक लोक सेवा आयोग के कार्यालय, निलंबित चेयरमैन, आयोग की सदस्य, कथित बिचौलियों, परीक्षा से जुड़ी कंपनी और कुछ चयनित उम्मीदवारों के ठिकानों पर की जा रही छापेमारी से इस भर्ती विवाद की जांच और तेज हो गई है। जांच के दौरान सामने आने वाले दस्तावेजों और अन्य सबूतों से कथित भ्रष्टाचार और पैसों के लेनदेन से जुड़े आरोपों की तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है।