Gaurav Vallabh: गौरव वल्लभ ने राहुल गांधी के नेतृत्व पर उठाए सवाल
Gaurav Vallabh: भाजपा नेता और अर्थशास्त्री गौरव वल्लभ ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के पास न कोई स्पष्ट राजनीतिक नैरेटिव है और न ही कोई विचारधारा है।
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Gaurav Vallabh: र्थशास्त्री और भाजपा नेता गौरव वल्लभ ने कांग्रेस और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के पास न कोई स्पष्ट राजनीतिक नैरेटिव है और न ही कोई ठोस विचारधारा। गौरव वल्लभ ने तंज कसते हुए आईएएनएस से कहा, "दिल्ली में कांग्रेस और लेफ्ट 'हम साथ-साथ हैं' की राजनीति करते हैं, लेकिन तिरुवनंतपुरम पहुंचते ही वही लोग लेफ्ट से पूछते हैं कि 'हम आपके हैं कौन?' दिल्ली में टीएमसी के साथ खड़े दिखाई देते हैं और कोलकाता में उन्हीं को भ्रष्ट बताते हैं।"
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की राजनीति पूरी तरह अवसरवाद पर आधारित है। उनके मुताबिक जहां फायदा दिखता है, कांग्रेस वहीं गठबंधन कर लेती है और जब नुकसान होने लगता है तो नए सहयोगी तलाशने लगती है। भाजपा नेता ने कांग्रेस की चुनावी स्थिति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस लगातार तीसरी बार असम में चुनाव हार चुकी है और हर बार उसकी सीटें पहले से कम हुई हैं। वहीं पश्चिम बंगाल में कांग्रेस का नामोनिशान तक नहीं बचा है।
उन्होंने तमिलनाडु की राजनीति का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस वहां दूसरों के सहारे आगे बढ़ी और अब उन्हीं सहयोगियों को धोखा दे रही है। गौरव वल्लभ ने कहा, "पांच दिन पहले तक डीएमके नेता राहुल गांधी के बड़े भाई जैसे थे, लेकिन अब वे स्टालिन को पहचानने से भी इनकार कर रहे हैं।"
कांग्रेस द्वारा वीडी सतीशन को केरल का मुख्यमंत्री बनाए जाने पर गौरव वल्लभ ने कहा, "मैं आपको बता रहा हूं कि गांधी परिवार के बाद, कांग्रेस पार्टी के असल नेता केसी वेणुगोपाल हैं। पार्टी के अंदर अब तीन या चार गुट हैं, एक सतीशन के नेतृत्व में, दूसरा चेन्निथला के, एक वेणुगोपाल के, और एक केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मौजूदा अध्यक्ष के नेतृत्व में। केरल की जनता को पार्टी के अंदर की गुटबाजी का खामियाज़ा भुगतना पड़ेगा, ठीक वैसे ही जैसे कर्नाटक में विकास ठप हो गया है, क्योंकि वहां की सरकार का ध्यान सिर्फ एक ही चीज पर है, वह यह सुनिश्चित करना है कि सरकार न गिरे। कर्नाटक के मुख्यमंत्री का सुबह से रात तक सिर्फ एक ही मकसद होता है कि अपनी कुर्सी कैसे बचाएं, जबकि उपमुख्यमंत्री का ध्यान इस बात पर होता है कि मुख्यमंत्री की कुर्सी पर कब्जा कैसे किया जाए।"