NEET CBI Investigation: नीट पेपर लीक में सीबीआई ने गिरफ्तार किए 7 आरोपी, यश और बिवाल परिवार भी शामिल
NEET CBI Investigation: सीबीआई ने नीट पेपर लीक मामले में अपनी जांच तेज कर दी है। जांच एजेंसी की एक विशेष टीम आरोपियों और छात्रों के बीच हुई 'मनी ट्रेल' यानी पैसों के अवैध लेनदेन का सुराग जुटाने में लगी है।
NEET CBI Investigation
NEET CBI Investigation: सीबीआई (CBI) ने नीट (NEET) पेपर लीक मामले की तह तक जाने के लिए अपनी जांच की रफ्तार तेज कर दी है। अब इस मामले में केवल गिरफ्तारी ही नहीं, बल्कि 'मनी ट्रेल' यानी पैसों के लेनदेन के रास्तों को खंगालने पर पूरा जोर दिया जा रहा है। सीबीआई(CBI On NEET) की एक विशेष टीम गठित की गई है जो इस घोटाले के वित्तीय पहलुओं की बारीकी से जांच कर रही है।
वित्तीय जांच और बैंक अधिकारियों की मदद
सीबीआई(CBI NEET Investigation) की इस विशेष टीम को मुख्य रूप से पेपर लीक से हुई अवैध कमाई और उसके वितरण का पता लगाने का जिम्मा सौंपा गया है। जांच को पुख्ता बनाने के लिए सीबीआई बैंकिंग क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारियों की मदद ले रही है। टीम डिजिटल साक्ष्य, बैंक ट्रांजैक्शन, और व्हाट्सएप चैट की कड़ियां जोड़ रही है। सूत्रों के मुताबिक, जांच का दायरा केवल सामान्य बैंक ट्रांसफर तक सीमित नहीं है, बल्कि एजेंसी 'हवाला' नेटवर्क के जरिए हुए संदिग्ध लेनदेन की भी संभावना तलाश रही है।
10 लाख की मनी ट्रेल और संगठित नेटवर्क
अब तक की जांच में आरोपियों और छात्रों के बीच करीब 10 लाख रुपये के लेनदेन के पुख्ता सबूत मिले हैं। जांच से पता चला है कि यह पूरा नेटवर्क बेहद शातिर और संगठित तरीके से काम कर रहा था। आरोपियों ने बड़ी रकम के बैंक ट्रांजैक्शन से बचने की पूरी कोशिश की ताकि वे कानून की नजरों में न आएं। वे ज्यादातर व्यक्तिगत संपर्कों और एन्क्रिप्टेड (सुरक्षित) सोशल मीडिया चैनलों के माध्यम से ही बातचीत करते थे।
मॉक पेपर का झांसा और एडवांस पेमेंट
धोखाधड़ी का तरीका काफी चौंकाने वाला था। आरोपियों ने छात्रों को झांसा दिया था कि उनके द्वारा दिए गए 'मॉक पेपर' के 180 में से लगभग 150 सवाल मुख्य परीक्षा के असली सवालों से हूबहू मिलेंगे। इस भरोसे के बदले, पेपर मैच होने की पुष्टि से पहले ही छात्रों से 30 हजार रुपये का 'एडवांस' लिया गया था। चौंकाने वाली बात यह है कि यह एडवांस पेमेंट यूपीआई (UPI) के जरिए ली गई थी, जो अब सीबीआई के लिए एक अहम डिजिटल सबूत बन गया है।
गिरफ्तारियां और पारिवारिक संलिप्तता
इस मामले में अब तक कुल 7 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें शुभम खैरनार (नासिक), मांगीलाल बिवाल, विकास बिवाल और दिनेश बिवाल (जयपुर), यश यादव (गुरुग्राम), धनंजय लोखंडा और मनीषा वाघमारे (महाराष्ट्र) शामिल हैं। सीबीआई को पांच प्रमुख आरोपियों की 7 दिनों की कस्टडी मिली है।
जांच में एक और पहलू का खुलासा
जांच में एक और गंभीर पहलू सामने आया है कि आरोपी दिनेश का बेटा, जो खुद नीट का छात्र है, उसे पेपर लीक होने की पहले से जानकारी थी। उसने न केवल खुद इसका फायदा उठाना चाहा, बल्कि अन्य छात्रों को पेपर बेचकर पैसे कमाने की योजना भी बनाई थी। इसके लिए बाकायदा व्हाट्सएप ग्रुप बनाए गए थे ताकि लाभार्थियों को जोड़ा जा सके और उनसे पैसे वसूले जा सकें। फिलहाल सीबीआई की टीम इन सभी कड़ियों को जोड़कर इस बड़े नेटवर्क को ध्वस्त करने में जुटी है।