TMC Revolt: ममता के एक फैसले से TMC में 'विद्रोह'! बगावत पर उतरी 11 महिला सांसद, टूट सकती है पार्टी

TMC Revolt: ममता बनर्जी के एक फैसले से TMC में बगावत के सुर तेज! कल्याण बनर्जी की वापसी से नाराज 11 महिला सांसद खुलकर विरोध की तैयारी में। क्या पार्टी में टूट का खतरा बढ़ गया है? जानिए पूरा सियासी विवाद।

Update:2026-05-15 11:23 IST

TMC Revolt: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद जहां तृणमूल कांग्रेस (TMC) को अपनी रणनीतियों पर विचार करना था, वहीं अब पार्टी के भीतर ही एक बड़ा 'विद्रोह' खड़ा हो गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के एक फैसले ने उनकी ही महिला ब्रिगेड को नाराज कर दिया है। मामला लोकसभा में पार्टी के 'मुख्य सचेतक' (चीफ व्हिप) की नियुक्ति से जुड़ा है। ममता बनर्जी ने काकोली घोष दस्तीदार को हटाकर एक बार फिर कल्याण बनर्जी पर भरोसा जताया है, लेकिन यह फैसला पार्टी के भीतर एक बड़े घमासान का कारण बन गया है। टीएमसी के भीतर मचे इस घमासान से अब पार्टी में बड़ी टूट की आशंका जताई जाने लगी है।

विवादित चेहरे पर दांव और महिला सांसदों का गुस्सा

टीएमसी प्रमुख ने कालीघाट स्थित अपने आवास पर एक महत्वपूर्ण आंतरिक बैठक बुलाई थी, जिसमें कल्याण बनर्जी को लोकसभा में पार्टी का मुख्य सचेतक नियुक्त करने की घोषणा की गई। इस घोषणा के बाद से ही लोकसभा में टीएमसी के 28 सांसदों के बीच हलचल शुरू हो गई है। सबसे ज्यादा नाराजगी महिला सांसदों में है, जिनकी संख्या पार्टी में 11 है। इन महिला सांसदों का मानना है कि कल्याण बनर्जी का ट्रैक रिकॉर्ड महिलाओं के प्रति सम्मानजनक नहीं रहा है। उन पर कई बार महिला सहयोगियों के साथ बदसलूकी और अपमानजनक टिप्पणी करने के आरोप लग चुके हैं। बागी सांसदों का एक धड़ा अब खुलकर इस नियुक्ति के खिलाफ अपनी चिंता जाहिर करने की तैयारी में है।

महुआ मोइत्रा बनाम कल्याण बनर्जी

इस पूरे विवाद के केंद्र में सांसद महुआ मोइत्रा के साथ हुआ पुराना टकराव है। पिछले साल कल्याण बनर्जी ने महुआ मोइत्रा की निजी जिंदगी और उनकी शादी को लेकर बेहद विवादित टिप्पणी की थी, जिसके बाद महुआ ने उन पर तीखा पलटवार किया था। महुआ ने तब सार्वजनिक रूप से कहा था कि कुछ पुरुष गहरे तौर पर 'स्त्री-द्वेषी' और 'यौन रूप से कुंठित' होते हैं, जिनका प्रतिनिधित्व संसद में भी मौजूद है। इस भारी विवाद और अपमानजनक टिप्पणियों के बाद ही कल्याण बनर्जी को चीफ व्हिप के पद से इस्तीफा देना पड़ा था। अब उन्हीं की दोबारा वापसी ने पुरानी आग में घी डालने का काम किया है।

क्या बिखर जाएगा ममता का कुनबा?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ममता बनर्जी के इस फैसले ने पार्टी की सोशल इंजीनियरिंग और महिला सशक्तिकरण के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ जहां टीएमसी खुद को महिलाओं की हितैषी बताती है, वहीं एक 'दागी' छवि वाले नेता को कमान सौंपने से सांसदों में असुरक्षा का भाव है। यदि महिला सांसदों की नाराजगी दूर नहीं की गई, तो सदन के भीतर और बाहर टीएमसी को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।

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