कर्नाटक में कुर्सी का महासंग्राम: सिद्धारमैया-डीके में ठनी, कुमारस्वामी का कांग्रेस पर बड़ा हमला
Kumaraswamy Statement: केंद्रीय मंत्री H. D. Kumaraswamy ने कर्नाटक सरकार पर जीबीए चुनाव को लेकर अंदरूनी कलह का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री Siddaramaiah और डिप्टी सीएम D. K. Shivakumar के बीच चुनाव कराने को लेकर टकराव चल रहा है।
Kumaraswamy Statement: कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर सियासी घमासान तेज हो गया है। केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री H. D. Kumaraswamy ने राज्य की कांग्रेस सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि ग्रेटर बेंगलुरु प्राधिकरण (जीबीए) चुनावों को लेकर मुख्यमंत्री Siddaramaiah और उपमुख्यमंत्री D. K. Shivakumar के बीच अंदरूनी संघर्ष चल रहा है। मंगलवार को बेंगलुरु में मीडिया से बातचीत करते हुए कुमारस्वामी ने कहा कि राज्य सरकार चुनावों को लेकर भ्रम और टकराव की स्थिति में है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता के भीतर मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही खींचतान अब खुलकर सामने आने लगी है।
‘चुनाव कराने और टालने को लेकर दो खेमे’
कुमारस्वामी ने दावा किया कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया चुनाव समय पर कराने के पक्ष में हैं, जबकि उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार चुनाव टालना चाहते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सिद्धारमैया ने डीके शिवकुमार की अनुपस्थिति में चुनाव अधिकारियों की बैठक बुलाई और चुनाव कराने पर जोर दिया। इसके बाद डीके शिवकुमार ने अलग बैठक बुलाकर कथित तौर पर चुनाव टालने का दबाव बनाया। कुमारस्वामी ने कहा कि अब राज्य सरकार ने चुनाव स्थगित कराने के लिए सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है, जिससे सरकार की मंशा साफ दिखाई देती है।
मुख्यमंत्री पद की राजनीति का आरोप
कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि दोनों नेताओं के बीच मुख्यमंत्री पद को लेकर अंदरूनी संघर्ष चल रहा है। उनके अनुसार, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया अगले कुछ महीनों तक अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत बनाए रखने के लिए चुनाव कराना चाहते हैं। वहीं डीके शिवकुमार को यह डर है कि अगर अभी चुनाव हो गए तो मुख्यमंत्री बनने की उनकी संभावनाएं कमजोर पड़ सकती हैं। कुमारस्वामी ने कहा कि एक पक्ष मुख्यमंत्री की कुर्सी बचाने के लिए चुनाव चाहता है, जबकि दूसरा पक्ष भविष्य में सत्ता हासिल करने के लिए चुनाव टालना चाहता है।
सरकार ने जनगणना और प्रक्रियात्मक कारण बताए
हालांकि राज्य सरकार ने इन आरोपों को सीधे तौर पर स्वीकार नहीं किया है। कर्नाटक के गृह मंत्री G. Parameshwara ने कहा कि सरकार भी जल्द से जल्द चुनाव कराना चाहती है, लेकिन कुछ प्रक्रियात्मक समस्याओं को पहले दूर करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि जनगणना का कार्य चल रहा है और पर्याप्त कर्मचारियों की व्यवस्था करना भी आवश्यक है। सरकार की जिम्मेदारी है कि चुनाव निष्पक्ष और व्यवस्थित तरीके से कराए जाएं।
सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला
गौरतलब है कि कर्नाटक राज्य चुनाव आयोग (एसईसी) ने सोमवार को सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर बेंगलुरु नगर निगम चुनाव कराने के लिए 90 दिनों का अतिरिक्त समय मांगा है। लंबे समय से लंबित इन चुनावों को लेकर अब राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा कर्नाटक की राजनीति में और बड़ा विवाद बन सकता है, खासकर तब जब कांग्रेस सरकार के भीतर नेतृत्व को लेकर चर्चाएं पहले से ही चल रही हैं।