सपा प्रवक्ता के बयान से भड़का ब्राह्मण समाज, यूपी की राजनीति में आया जबरदस्त उबाल!

Rajkumar Bhati Brahmin Controversy: समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता Rajkumar Bhati के कथित ब्राह्मण विरोधी बयान पर यूपी की राजनीति गरमा गई है। भाजपा और ब्राह्मण संगठनों ने सपा पर हमला बोला, जबकि भाटी ने वीडियो जारी कर सफाई दी।

Update:2026-05-12 20:41 IST

Rajkumar Bhati Brahmin Controversy: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर जातिगत टिप्पणियों को लेकर बड़ा बवाल खड़ा हो गया है। समाजवादी पार्टी के कद्दावर प्रवक्ता राजकुमार भाटी के एक कथित आपत्तिजनक बयान ने सोशल मीडिया से लेकर सियासी गलियारों तक में आग लगा दी है। एक तरफ जहाँ सपा साल 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए 'समानता और भाईचारा' का नारा बुलंद कर रही है, वहीं दूसरी तरफ ब्राह्मणों को लेकर दिए गए इस बयान ने पार्टी की रणनीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह विवाद सिर्फ शब्दों तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि अब इसने एक बड़े सामाजिक और राजनीतिक टकराव का रूप ले लिया है जिसमें भाजपा और ब्राह्मण संगठन पूरी तरह हमलावर हो चुके हैं।

एक मुहावरा और शुरू हुआ बयानों का दंगल

पूरा मामला दिल्ली के जवाहर भवन में आयोजित एक कार्यक्रम से शुरू हुआ, जहाँ डॉ. रफरफ शकील अंसारी और जावेद अनवर की किताब 'जाति और साम्प्रदायिकता के विषाणु' का लोकार्पण था। चर्चा के दौरान सपा प्रवक्ता राजकुमार भाटी ने समाज में प्रचलित कुछ पुरानी कहावतों का जिक्र किया। उन्होंने मंच से एक ऐसा मुहावरा पढ़ा जिसमें ब्राह्मणों की तुलना वेश्याओं से की गई थी। जैसे ही इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, भाजपा ने इसे हाथों-हाथ लिया। भाजपा प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने तीखा पलटवार करते हुए कहा कि राजकुमार भाटी पहले एक पढ़े-लिखे पत्रकार हुआ करते थे, लेकिन सपा में शामिल होने के बाद वह जाति का जहर बोने लगे हैं। भाजपा का आरोप है कि विधानसभा चुनाव से पहले सामाजिक सौहार्द बिगाड़ना समाजवादी पार्टी की एक गहरी और सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।

राजकुमार भाटी की सफाई

चारों तरफ से घिरने के बाद राजकुमार भाटी ने अपने 'X' अकाउंट पर एक वीडियो साझा कर अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि उस परिचर्चा में योगेंद्र यादव, आशुतोष और प्रो. रतन लाल जैसे कई दिग्गज मौजूद थे। भाटी के अनुसार, वह यह समझा रहे थे कि हमारे समाज में एक-दूसरे को अपमानित करने के लिए कितनी घटिया लोकोक्तियाँ बनी हुई हैं। उन्होंने उदाहरण दिया कि कैसे एक पत्रकार उन्हें उनके गुर्जर समाज को लेकर चिढ़ाते थे। भाटी ने दावा किया कि उन्होंने मंच से यह भी स्पष्ट कहा था कि वह इस तरह की कहावतों को ठीक नहीं मानते क्योंकि ब्राह्मण समाज बहुत भला होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि विरोधियों ने जानबूझकर उनके भाषण की कुछ सेकंड की क्लिप काटकर पेश की है ताकि उनकी छवि खराब की जा सके।

वर्ल्ड ब्राह्मण फेडरेशन की चेतावनी और बहिष्कार की अपील

इस विवाद के बाद ब्राह्मण समाज में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। वर्ल्ड ब्राह्मण फेडरेशन (WBF) के कार्यकारी क्षेत्रीय अध्यक्ष चंद्रमणि भारद्वाज ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि ब्राह्मण समाज केवल ज्ञान का नहीं, बल्कि आत्मसम्मान का भी प्रतीक है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगी गई, तो समाज लोकतांत्रिक और कानूनी तरीके से कड़ा विरोध दर्ज कराएगा। संगठन ने यहाँ तक अपील की है कि पुरोहित और पुजारी वर्ग को ऐसे लोगों के धार्मिक आयोजनों का बहिष्कार करना चाहिए जो समाज में विभाजन पैदा करने का प्रयास कर रहे हैं। गौतमबुद्ध नगर में गुर्जर और ब्राह्मण समाज के बीच हमेशा से मधुर संबंध रहे हैं, ऐसे में इस बयान को भाईचारे पर प्रहार माना जा रहा है।

2027 की चुनावी जंग और बढ़ती तल्खी

यह पूरा विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने हाल ही में 29 मार्च, 2026 को नोएडा के दादरी में 'समानता और भाईचारा रैली' के जरिए 2027 के चुनाव का शंखनाद किया था। उस रैली में भीड़ जुटाने में राजकुमार भाटी की अहम भूमिका थी। अब उसी चुनावी अभियान के मुख्य चेहरों में से एक पर ब्राह्मण विरोधी होने के आरोप लग रहे हैं। उत्तर प्रदेश की सत्ता तक पहुँचने के लिए ब्राह्मण वोट बैंक हमेशा निर्णायक साबित हुआ है, ऐसे में इस बखेड़े ने समाजवादी पार्टी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। भाजपा ने साफ तौर पर कहा है कि सपा में अब 'बदजुबानी की प्रतियोगिता' चल रही है। अब देखना यह होगा कि भाटी की सफाई से माहौल शांत होता है या यह मुद्दा चुनावी समर तक खिंचता चला जाएगा।

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