PM Modi Fuel Appeal: मोदी की बचत की अपील के बीच जानिए मंत्रियों का फ्यूल बजट
PM Modi Fuel Appeal: पीएम मोदी की ईंधन बचत अपील के बीच जानिए केंद्र और यूपी के मंत्रियों, विधायकों और काफिलों पर कितना होता है फ्यूल खर्च।
Ministers Fuel Budget News (Social Media)
PM Modi Fuel Appeal: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में वैश्विक परिस्थितियों और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का हवाला देते हुए देशवासियों से पेट्रोल, डीजल का कम से कम इस्तेमाल करने का आग्रह किया है। इस संदर्भ में जानते हैं कि भारत में मंत्रियों के वाहनों का फ्यूल खर्च कितना है।
केंद्र सरकार के मंत्रियों का फ्यूल बजट
भारत सरकार के कैबिनेट मंत्रियों, राज्य मंत्रियों और सांसदों को मिलने वाले भत्ते 'संसद सदस्य वेतन, भत्ता और पेंशन अधिनियम' के तहत तय किए जाते हैं। साल 2026 के नवीनतम बजटीय संशोधनों के अनुसार, एक केंद्रीय मंत्री को सरकारी कामकाज के लिए वाहन की सुविधा मिलती है। यदि कोई मंत्री अपना निजी वाहन इस्तेमाल करता है, तो उसे हर महीने लगभग 600 से 800 लीटर पेट्रोल के बराबर की राशि दी जाती है।
केंद्रीय मंत्रियों के लिए आवंटित बजट में केवल ईंधन ही नहीं, बल्कि ड्राइवर का वेतन और गाड़ी का रखरखाव भी शामिल होता है। 2026 में केंद्र सरकार ने 'मंत्रिपरिषद के भत्ते और विविध व्यय' के मद में भारी आवंटन किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री के पास असीमित यात्रा की सुविधा होती है, लेकिन आधिकारिक दौरों के लिए प्रति किलोमीटर की दर से भुगतान किया जाता है। दिल्ली जैसे महानगर में रहने वाले सांसदों को भी हर साल हजारों किलोमीटर की मुफ्त सड़क यात्रा का कोटा मिलता है।
राज्यों का हाल: दिल्ली से लेकर यूपी तक का गणित
भारत में हर राज्य का अपना 'वेतन और भत्ता नियम' होता है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में, जहाँ विधायकों की संख्या सबसे अधिक है, वहाँ एक विधायक को हर महीने करीब 25,000 से 35,000 रुपये केवल 'सवारी भत्ते' के रूप में मिलते हैं। इसके अलावा, राज्य सरकारें विधायकों को कूपन के माध्यम से या सीधे बैंक खाते में पेट्रोल का खर्च देती हैं।
मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में यह राशि और भी अधिक हो सकती है क्योंकि यहाँ विधानसभा क्षेत्र भौगोलिक दृष्टि से बहुत बड़े होते हैं। 2026 के आंकड़ों के अनुसार, कई राज्यों ने अपने विधायकों के यात्रा भत्ते में 15 से 20 प्रतिशत की वृद्धि की है। उदाहरण के तौर पर, यदि कोई विधायक अपने क्षेत्र का दौरा करता है, तो उसे औसतन 15 से 20 रुपये प्रति किलोमीटर के हिसाब से भुगतान किया जाता है। दिलचस्प बात यह है कि कुछ राज्यों में मंत्रियों को सरकारी पेट्रोल पंपों से सीधे तेल भरवाने की सुविधा होती है, जिसका बिल सीधे राज्य के खजाने से भरा जाता है।
2026 में भारत सरकार ने 'ग्रीन एनर्जी' और 'इलेक्ट्रिक मोबिलिटी' पर जोर दिया है। कई मंत्रियों को अब इलेक्ट्रिक वाहन आवंटित किए जा रहे हैं ताकि सरकारी तेल खर्च को कम किया जा सके। लेकिन हकीकत यह है कि लंबी दूरी के दौरों के लिए अभी भी डीजल से चलने वाली एसयूवी ही पहली पसंद बनी हुई हैं।
उत्तर प्रदेश में तेल का खर्च
10 मई 2026 को हुए मंत्रिमंडल विस्तार के बाद, उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार में अब कुल 60 मंत्री हैं।
फ्लीट का गणित (सुरक्षा प्रोटोकॉल)
यूपी में मंत्रियों के काफिले की संख्या उनकी सुरक्षा श्रेणी (Z+, Z, या Y) पर निर्भर करती है।
सुरक्षा कारणों से मुख्यमंत्री के काफिले में 20 से 25 गाड़ियां होती हैं, जिनमें जैमर वाहन, एम्बुलेंस और सुरक्षाकर्मियों की गाड़ियां शामिल होती हैं। वहीं, एक कैबिनेट मंत्री के साथ आमतौर पर 4 से 6 गाड़ियां चलती हैं।
मंत्रियों को राज्य संपत्ति विभाग से गाड़ियां मिलती हैं। इन गाड़ियों में ईंधन की कोई निर्धारित सीमा नहीं होती। सरकारी दौरों के लिए जिले के स्तर पर डीएम कार्यालय से तेल का भुगतान किया जाता है। एक अनुमान के मुताबिक, एक मंत्री की गाड़ी और सुरक्षा वाहनों पर महीने का तेल खर्च 1.5 लाख से 3 लाख रुपये के बीच आता है।
ईंधन और भत्ता
यूपी के एक विधायक को हर महीने 25,000 से 35,000 रुपये के बीच 'निर्वाचन क्षेत्र भत्ता' और 'सवारी भत्ता' मिलता है। इसके अलावा, उन्हें रेलवे और सड़क मार्ग से यात्रा के लिए सालाना 4.25 लाख रुपये तक के कूपन या कैश वाउचर मिलते हैं, जिसका बड़ा हिस्सा पेट्रोल-डीजल में खर्च होता है।
यूपी सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट में 'राज्य संपत्ति विभाग' और 'मंत्रिपरिषद' के भत्तों के लिए लगभग 900 करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया है। इसमें गाड़ियों का रखरखाव और ईंधन एक बड़ा हिस्सा है।