Indian Passport Ranking 2026: पासपोर्ट की ताकत घटी! दुनिया में 78वें नंबर पर पहुंचा भारत, जानिए अब कितने देशों में मिलेगी आसान एंट्री

Indian Passport Ranking 2026: भारतीय पासपोर्ट की ताकत क्यों घटी और अब किन देशों में मिलेगी आसान एंट्री?

Update:2026-05-12 17:16 IST

Indian Passport Ranking 2026 Easy Entry Now Available in 56 Countries

Indian Passport Ranking 2026: क्या आप भी पहली बार अपने पासपोर्ट के साथ विदेश यात्रा का प्लान बना रहे हैं। तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि, विदेश यात्रा का सपना देखने वाले भारतीयों के लिए एक अहम खबर सामने आई है। दुनिया के सबसे चर्चित पासपोर्ट रैंकिंग सूचकांक ‘हेनली पासपोर्ट इंडेक्स’ की नई सूची में भारतीय पासपोर्ट की ताकत कमजोर हुई है। भारत अब 78वें स्थान पर पहुंच गया है, जबकि फरवरी 2026 की सूची में भारत 75वें नंबर पर था। यानी कुछ ही महीनों में भारतीय पासपोर्ट की रैंकिंग तीन स्थान नीचे खिसक गई है। हालांकि राहत की बात ⁴यह है कि रैंकिंग गिरने के बावजूद भारतीय नागरिक अब भी 56 देशों में बिना पहले वीजा लिए या आसान वीजा प्रक्रिया के जरिए यात्रा कर सकते हैं। इसमें वीजा-फ्री एंट्री, वीजा ऑन अराइवल और इलेक्ट्रॉनिक ट्रैवल ऑथराइजेशन जैसी सुविधाएं शामिल हैं।

हेनली पासपोर्ट इंडेक्स दुनिया के 199 देशों और 277 डेस्टिनेशन के यात्रा आंकड़ों के आधार पर तैयार किया जाता है। यह सूचकांक बताता है कि किसी देश का पासपोर्ट दुनिया में कितना शक्तिशाली माना जाता है और उसके नागरिक कितने देशों में आसानी से प्रवेश पा सकते हैं।

आखिर क्यों घटती है पासपोर्ट की ताकत?

पासपोर्ट रैंकिंग केवल यात्रा से जुड़ा आंकड़ा नहीं होती, बल्कि यह किसी देश की वैश्विक छवि, कूटनीतिक संबंधों, आर्थिक स्थिरता और सुरक्षा व्यवस्था को भी दर्शाती है। विशेषज्ञों के मुताबिक पिछले कुछ समय में दुनिया भर में बढ़े भू-राजनीतिक तनाव, युद्ध, सुरक्षा चिंताएं और सख्त इमिग्रेशन नियमों का असर कई देशों की रैंकिंग पर पड़ा है। भारत भी इससे अछूता नहीं रहा। कई देशों ने हाल के वर्षों में अपनी वीजा नीतियों को और सख्त किया है। सुरक्षा जांच, अवैध प्रवास और अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक परिस्थितियों के कारण यात्रा नियम बदल रहे हैं। यही वजह है कि कई देशों की पासपोर्ट रैंकिंग में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।

56 देशों में भारतीयों को आसान यात्रा की सुविधा

भारतीय पासपोर्ट भले ही टॉप 50 में शामिल न हो, लेकिन भारतीय नागरिकों को अब भी कई लोकप्रिय देशों में आसानी से यात्रा करने की सुविधा⁵ मिल रही है। भूटान और नेपाल जैसे पड़ोसी देशों में भारतीय नागरिक बिना वीजा के यात्रा कर सकते हैं। इसके अलावा मलेशिया, थाईलैंड, मॉरीशस और फिलीपींस जैसे पर्यटन स्थलों पर भी भारतीय यात्रियों को वीजा-फ्री एंट्री या सरल प्रक्रिया का लाभ मिलता है।

मालदीव, श्रीलंका, इंडोनेशिया, कतर और कंबोडिया जैसे देशों में भारतीय नागरिकों को 'वीजा ऑन अराइवल' की सुविधा उपलब्ध है। यानी यात्री वहां पहुंचने के बाद एयरपोर्ट पर ही वीजा प्राप्त कर सकते हैं। इससे पहले लंबी कागजी प्रक्रिया से गुजरने की जरूरत नहीं पड़ती।

ऑनलाइन ट्रैवल अनुमति ने बढ़ाई सुविधा

दुनिया के कई देशों ने अब पारंपरिक वीजा प्रक्रिया की जगह डिजिटल सिस्टम अपनाना शुरू कर दिया है। भारतीय यात्रियों के लिए यह बड़ी राहत साबित हो रहा है। केन्या, सेशेल्स और सेंट किट्स एंड नेविस जैसे देशों में इलेक्ट्रॉनिक ट्रैवल ऑथराइजेशन यानी ETA की सुविधा दी जाती है। इसके तहत यात्री ऑनलाइन आवेदन करके पहले से मंजूरी ले सकते हैं।

इस प्रक्रिया में पासपोर्ट पर अलग से वीजा स्टैंप लगाने की जरूरत नहीं पड़ती। इससे समय बचता है और यात्रा प्रक्रिया पहले की तुलना में कहीं ज्यादा आसान हो जाती है।

सिंगापुर का पासपोर्ट फिर बना दुनिया का सबसे ताकतवर

हेनली पासपोर्ट इंडेक्स 2026 में सिंगापुर ने एक बार फिर दुनिया के सबसे शक्तिशाली पासपोर्ट का स्थान हासिल किया है। सिंगापुर के नागरिक 192 देशों में बिना वीजा यात्रा कर सकते हैं। इसके बाद संयुक्त अरब अमीरात (UAE), जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों का स्थान आता है। यूरोप के कई देशों के पासपोर्ट भी शीर्ष रैंकिंग में शामिल हैं, क्योंकि उनके नागरिकों को दुनिया के अधिकतर देशों में आसान प्रवेश मिल जाता है।

अमेरिका और ब्रिटेन को भी झटका

रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि अमेरिका और ब्रिटेन जैसे ताकतवर देशों की पासपोर्ट रैंकिंग में भी गिरावट आई है। विशेषज्ञों का कहना है कि इन देशों ने पिछले कुछ वर्षों में कई जगहों पर वीजा-फ्री सुविधाएं खोई हैं। बदलती विदेश नीति, सुरक्षा नियम और सख्त बॉर्डर कंट्रोल इसके पीछे प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।

पासपोर्ट रैंकिंग कैसे तय होती है?

हेनली पासपोर्ट इंडेक्स अंतरराष्ट्रीय एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) के डेटा के आधार पर तैयार किया जाता है।

इसमें यह देखा जाता है कि किसी देश का नागरिक कितने देशों में बिना वीजा, वीजा ऑन अराइवल या इलेक्ट्रॉनिक अनुमति के साथ प्रवेश कर सकता है। जितने ज्यादा देशों में आसान प्रवेश मिलेगा, उस देश का पासपोर्ट उतना ही मजबूत माना जाएगा।

उदाहरण के तौर पर यदि किसी देश के नागरिकों को 190 देशों में बिना कठिन वीजा प्रक्रिया के यात्रा की अनुमति है, तो उसका पासपोर्ट दुनिया के सबसे मजबूत पासपोर्ट में गिना जाएगा।

क्या भारतीय पासपोर्ट भविष्य में मजबूत हो सकता है?

विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था, वैश्विक प्रभाव और तेजी से मजबूत हो रहे कूटनीतिक संबंध आने वाले समय में भारतीय पासपोर्ट को और मजबूत बना सकते हैं।

भारत पिछले कुछ वर्षों में दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में तेजी से उभरा है। G20 की अध्यक्षता, वैश्विक व्यापार समझौते और विभिन्न देशों के साथ बढ़ते रणनीतिक संबंध भारत की अंतरराष्ट्रीय स्थिति को मजबूत कर रहे हैं। यदि भारत और अधिक देशों के साथ वीजा-फ्री समझौते करता है, तो भविष्य में भारतीय पासपोर्ट की रैंकिंग में सुधार संभव है।

विदेश यात्रा करने वालों के लिए क्या मायने रखती है यह रैंकिंग?

पासपोर्ट रैंकिंग का सीधा असर यात्रियों की सुविधा पर पड़ता है। मजबूत पासपोर्ट वाले देशों के नागरिकों को यात्रा के दौरान कम कागजी कार्रवाई करनी पड़ती है।

कमजोर रैंकिंग का मतलब यह नहीं कि यात्रा असंभव हो जाती है, लेकिन वीजा प्रक्रिया लंबी और महंगी हो सकती है। कई बार इंटरव्यू, बैंक स्टेटमेंट, होटल बुकिंग और अन्य दस्तावेजों की जरूरत पड़ती है।

इसी वजह से पासपोर्ट इंडेक्स को किसी देश की वैश्विक स्वीकार्यता और नागरिकों की यात्रा स्वतंत्रता का महत्वपूर्ण पैमाना माना जाता है।

विदेश यात्रा में लगातार बढ़ती जा रही भारतीय यात्रियों की संख्या

दिलचस्प बात यह है कि पासपोर्ट रैंकिंग में गिरावट के बावजूद भारतीयों का विदेश यात्रा के प्रति उत्साह लगातार बढ़ रहा है।

पर्यटन कंपनियों के अनुसार भारतीय पर्यटक अब केवल पारंपरिक देशों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यूरोप, अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया के नए डेस्टिनेशन भी तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। मध्यम वर्ग की बढ़ती आय, सस्ती अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट्स और डिजिटल वीजा सुविधाओं ने विदेश यात्रा को पहले की तुलना में आसान बना दिया है।

आज के दौर में पासपोर्ट केवल पहचान पत्र नहीं, बल्कि वैश्विक गतिशीलता का प्रतीक बन चुका है। किसी देश के नागरिक कितनी आसानी से दुनिया में घूम सकते हैं, यह उसकी अंतरराष्ट्रीय स्थिति को भी दर्शाता है। भारत की रैंकिंग में आई गिरावट निश्चित रूप से चिंता का विषय है, लेकिन 56 देशों में आसान यात्रा की सुविधा अब भी भारतीय यात्रियों के लिए बड़ी राहत है।

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