बिहार वोटर लिस्ट पर सुप्रीम कोर्ट की आज अहम सुनवाई, 65 लाख नाम हटाने के खिलाफ विपक्ष का विरोध, जानिए पूरी कहानी

सुप्रीम कोर्ट आज बिहार में मतदाता सूची संशोधन से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करेगा, जिसमें चुनाव आयोग ने 65 लाख नाम हटाने का प्रस्ताव रखा है। विपक्ष इसे बीजेपी के पक्ष में काम करने का आरोप लगाता है। जानिए पूरी कहानी।

Update:2025-08-12 07:56 IST

Important hearing of Supreme Court today on Bihar voter list

सुप्रीम कोर्ट आज, यानी मंगलवार को बिहार में मतदाता सूची संशोधन से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करेगा। याचिकाकर्ताओं ने वोटर लिस्ट में किए गए बदलावों पर सवाल उठाए हैं। चुनाव आयोग ने बताया कि बिहार के 65 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा सकते हैं। आज सुप्रीम कोर्ट इस मुद्दे पर सुनवाई करेगा।

पिछली सुनवाई में दस्तावेजों की वैधता पर सवाल उठाए गए

पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने आधार कार्ड, राशन कार्ड और वोटर आईडी को मतदाता की पहचान के रूप में मान्यता देने का सुझाव दिया था। जब कोर्ट ने दस्तावेजों की वैधता पर सवाल उठाए, तो चुनाव आयोग ने जवाब दिया कि सिर्फ आधार कार्ड, राशन कार्ड या पहले से जारी किया गया वोटर पहचान पत्र के आधार पर किसी का नाम मतदाता सूची में नहीं जोड़ा जा सकता।

बिहार में वोटर लिस्ट से 65 लाख नाम हटाए जाएंगे

चुनाव आयोग ने 27 जुलाई को बिहार के SIR के पहले चरण के आंकड़े जारी किए थे, जिसमें बताया गया कि बिहार में 65 लाख लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए जाएंगे। इनमें से 22 लाख मतदाता मृत हो चुके हैं, 36 लाख लोग स्थायी रूप से स्थानांतरित हो चुके हैं, और करीब 7 लाख लोगों के नाम एक से अधिक स्थानों पर पाए गए हैं। विपक्ष चुनाव आयोग पर बीजेपी के पक्ष में काम करने का आरोप लगा रहा है, जबकि बीजेपी का कहना है कि विपक्ष हार के डर से यह आरोप लगा रहा है।

विपक्ष का सरकार और चुनाव आयोग पर हमला

विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर लगातार विरोध कर रहे हैं। सोमवार को राहुल गांधी की अगुवाई में विपक्ष के सांसदों ने चुनाव आयोग तक मार्च करने की कोशिश की। हालांकि, चुनाव आयोग ने विपक्ष के 30 नेताओं को बातचीत के लिए बुलाया था, लेकिन विपक्ष के नेता 200 सांसदों के साथ आयोग जाना चाहते थे। पुलिस ने बिना इजाजत मार्च करने की कोशिश कर रहे सांसदों को रोक लिया और उन्हें हिरासत में ले लिया। राहुल गांधी ने कहा कि यह लड़ाई राजनीतिक नहीं है, बल्कि संविधान और 'वन मैन, वन वोट' के अधिकार को बचाने की लड़ाई है, इसलिए उन्हें एक साफ और सही वोटर लिस्ट चाहिए।

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