ईरान जंग से भारत ने सीखा सबक... IAF खरीदेगी 1000 KG वाले बम, एक धमाके में खाक हो जाएगा पूरा दुश्मन
India Indigenous Air Bombs: भारत रक्षा मंत्रालय ने 1000 किलो के स्वदेशी हवाई बम विकसित करने का निर्णय लिया है। इससे वायु सेना की ताकत और फायरपावर बढ़ेगी।
India Indigenous Air Bombs
India Indigenous Air Bombs: भारत ने हाल के वेस्ट एशिया युद्ध और ऑपरेशन सिंदूर से मिली सीख को ध्यान में रखते हुए अपनी वायु सेना को और मजबूत बनाने का निर्णय लिया है। इन घटनाओं ने साफ कर दिया कि युद्ध के समय हथियारों की उपलब्धता और उनकी क्षमता निर्णायक होती है। इसी वजह से रक्षा मंत्रालय अब स्वदेशी 1000 किलो के हवाई बम विकसित और खरीदने की तैयारी में है।
1000 किलो के स्वदेशी हवाई बम की योजना
रक्षा मंत्रालय ने इन बमों के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) जारी किया है। इस योजना के तहत कुल 600 ऐसे बम बनाए और खरीदे जाएंगे। इसमें बम के टेल यूनिट और अन्य जरूरी उपकरण भी शामिल होंगे। पूरी प्रक्रिया “बाय इंडियन” कैटेगरी में होगी, यानी बम भारत में ही डिज़ाइन और निर्मित किए जाएंगे। इससे भारतीय कंपनियों को फायदा मिलेगा और देश की रक्षा क्षमता मजबूत होगी।
बम की खासियत और क्षमता
ये नए हवाई बम उच्च कैलिबर के हथियार हैं और बड़े विस्फोट पैदा कर सकते हैं। यह MK-84 क्लास के बम के समान होंगे, जो 2000 पाउंड यानी लगभग 907 किलो विस्फोटक ले जा सकते हैं। ये बम बड़े ठिकानों, पुलों, रनवे और गोदामों को आसानी से नष्ट कर सकते हैं। इनका डिज़ाइन ऐसा है कि ये रूसी और पश्चिमी विमानों दोनों पर लगाए जा सकेंगे। बम खुद-ब-खुद टुकड़ों में बंटकर फैलते हैं और दुश्मन पर भारी प्रभाव डालते हैं।
दो चरणों में पूरी खरीद प्रक्रिया
पहले चरण में छह प्रोटोटाइप बनाए जाएंगे, जिनमें लाइव और इनर्ट (बिना विस्फोटक) बम शामिल होंगे। इसके साथ टेल यूनिट और अन्य उपकरण विकसित किए जाएंगे। इस चरण में 50 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल जरूरी होगा। प्रोटोटाइप बन जाने के बाद एयर स्टाफ क्वालिटेटिव रिक्वायरमेंट्स (ASQR) के अनुसार जांच होगी।
दूसरे चरण में योग्य कंपनियों को कमर्शियल रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) जारी किया जाएगा और कुल 600 बम खरीदे जाएंगे। यह पूरी प्रक्रिया बाय इंडियन-आईडीडीएम कैटेगरी में होगी, जो डीएपी 2020 के अनुसार अधिकतम स्वदेशी सामग्री का पालन करती है।
बम कब वायु सेना में शामिल होंगे
पूरे प्रोजेक्ट को पूरा होने में लगभग ढाई साल का समय लगेगा। इसमें प्रोटोटाइप बनाना, यूजर ट्रायल्स करना, मूल्यांकन, कॉमर्शियल प्रोसे और अंत में कॉन्ट्रैक्ट फाइनल करना शामिल होगा। सभी ट्रायल्स भारतीय वायु सेना के तय आईएएफ यूनिट्स पर होंगे। स्वदेशी 1000 किलो के बम भारतीय वायु सेना को भारी फायर पावर देंगे। इससे वायु सेना को विदेशी बमों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा, और भारतीय निजी कंपनियों को भी इसमें भागीदारी का मौका मिलेगा। विदेशी सहयोग की अनुमति है, लेकिन डिजाइन और निर्माण ज्यादातर भारत में ही होगा।