चौथी बार CM बनने की गहलोत की राह मुश्किल? डोटासरा और पायलट ने बदला कांग्रेस का गणित
राजस्थान कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर नई सियासी हलचल तेज है। अशोक गहलोत की सक्रियता, गोविंद सिंह डोटासरा के बयान, सचिन पायलट की भूमिका और राहुल गांधी के संकेतों ने विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी का राजनीतिक समीकरण बदल दिया।
राजस्थान में विधानसभा चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन अलग खेमों में भावी मुख्यमंत्री को लेकर चर्चा तेज हो गई है। सोशल मीडिया पर पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत और सचिन पायलट के खेमों से जुड़े लोग सोशल मीडिया पर अगले मुख्यमंत्री को लेकर अपने-अपने दावे करने लगे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत लगातार सक्रिय राजनीति करते हुए सरकार पर हमलावर हैं, वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा संगठन को सर्वोपरि बताते हुए स्पष्ट संदेश दे रहे हैं कि पार्टी किसी एक चेहरे पर निर्भर नहीं रहेगी। दूसरी ओर सचिन पायलट भी कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में बने हुए हैं। इन घटनाक्रमों ने राजस्थान कांग्रेस के भीतर नेतृत्व को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
हार के बाद फिर बढ़ी गहलोत की सक्रियता
2023 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद अशोक गहलोत को न तो संगठन में कोई बड़ी जिम्मेदारी मिली और न ही पहले जैसी निर्णयकारी भूमिका दिखाई दी। इसके बावजूद पिछले कुछ महीनों में उन्होंने अपनी राजनीतिक सक्रियता बढ़ा दी। राज्य के लगभग हर बड़े मुद्दे पर उनकी प्रतिक्रिया सामने आई और वे सोशल मीडिया तथा मीडिया इंटरव्यू के जरिए लगातार सरकार को घेरते रहे।
समर्थकों की सक्रियता से क्या देना चाहते हैं संदेश?
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि गहलोत समर्थकों के जरिए यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि राजस्थान कांग्रेस में आज भी उनकी मजबूत पकड़ बनी हुई है। जयपुर स्थित उनके आवास पर नेताओं और कार्यकर्ताओं की बढ़ती आवाजाही को भी कई राजनीतिक विश्लेषकों ने समानांतर शक्ति केंद्र के रूप में देखा।
2022 विवाद पर पहली बार दी सफाई
अशोक गहलोत ने हाल ही में 2022 के कांग्रेस संकट पर सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि उस समय जो घटनाक्रम हुआ, वह उनकी व्यक्तिगत बगावत नहीं थी। साथ ही उन्होंने 2020 के उस राजनीतिक संकट का भी जिक्र किया, जब सचिन पायलट के नेतृत्व में विधायक मानेसर गए थे।
हालांकि सचिन पायलट ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देने के बजाय संयम बरतते हुए गहलोत को "पिता समान" बताया। इसे भी कांग्रेस के भीतर सकारात्मक राजनीतिक संकेत के रूप में देखा गया।
डोटासरा के बयान ने बदली चर्चा
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के हालिया बयान ने पार्टी के भीतर चल रही चर्चाओं को नया मोड़ दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस किसी भी व्यक्ति से बड़ी है और संगठन को मजबूत करना उनकी प्राथमिकता है। उनका यह भी कहना था कि यदि कोई अपनी व्यक्तिगत ब्रांडिंग करना चाहता है तो वह उसका निर्णय है, लेकिन उनका पूरा ध्यान संगठन पर रहेगा।
डोटासरा ने यह भी स्वीकार किया कि कांग्रेस को पहले आंतरिक मतभेदों का नुकसान उठाना पड़ा है। राजनीतिक विश्लेषक उनके बयान को व्यक्तिवाद के खिलाफ स्पष्ट संदेश के रूप में देख रहे हैं।
राहुल गांधी के संकेतों पर भी चर्चा
राहुल गांधी के हालिया राजस्थान दौरे के दौरान मंच पर प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली की मौजूदगी को भी राजनीतिक संकेतों के रूप में देखा गया। इसके बाद पार्टी के भीतर यह चर्चा तेज हो गई कि राजस्थान कांग्रेस अब केवल गहलोत और पायलट की राजनीति तक सीमित नहीं रह सकती।
हालांकि कांग्रेस नेतृत्व की ओर से भविष्य के नेतृत्व या संगठनात्मक बदलाव को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
चुनाव से पहले बढ़ी अंदरूनी हलचल
राजस्थान विधानसभा चुनाव में अभी समय है, लेकिन कांग्रेस के भीतर नेतृत्व, संगठन और चुनावी रणनीति को लेकर चर्चा लगातार तेज हो रही है। एक ओर अशोक गहलोत अपनी राजनीतिक सक्रियता बनाए हुए हैं, दूसरी ओर गोविंद सिंह डोटासरा संगठन को प्राथमिकता देने का संदेश दे रहे हैं। वहीं सचिन पायलट भी पार्टी के प्रमुख चेहरों में शामिल हैं।
ऐसे में आगामी चुनाव से पहले कांग्रेस किस नेतृत्व मॉडल और किस रणनीति के साथ मैदान में उतरती है, इस पर राजनीतिक गलियारों की नजरें टिकी रहेंगी।