Modi कैबिनेट के बड़े फैसले: PM-KISAN योजना 2031 तक जारी, 'समुद्र मंथन' योजना को 84084 करोड़ की मंजूरी

केंद्र सरकार ने PM-KISAN योजना को 2030-31 तक जारी रखने के लिए 3.15 लाख करोड़ रुपये मंजूर किए। साथ ही 84,084 करोड़ रुपये की 'समुद्र मंथन' राष्ट्रीय ऑफशोर एक्सप्लोरेशन स्कीम को भी कैबिनेट की मंजूरी मिली।

Update:2026-07-31 20:08 IST

pm modi cabinet meeting decision today (PC: AIR)

PM Modi Cabinet Decisions: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक में किसानों और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े दो बड़े फैसलों को मंजूरी दी गई। कैबिनेट ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) योजना को वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने का फैसला किया है। इसके लिए 3.15 लाख करोड़ रुपये का वित्तीय प्रावधान मंजूर किया गया है।

इसके अलावा सरकार ने 'समुद्र मंथन' (National Offshore Exploration Scheme) नामक नई केंद्रीय क्षेत्र की योजना को भी मंजूरी दी है। इस योजना पर 84,084 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे और इसका उद्देश्य भारत के समुद्री क्षेत्रों में तेल और गैस की खोज को तेज करना है।

PM-KISAN योजना के तहत किसानों को मिलेगा लाभ

सरकार के अनुसार, PM-KISAN योजना के तहत पात्र किसान परिवारों को हर साल 6,000 रुपये की आर्थिक सहायता तीन समान किस्तों में सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जाती रहेगी। यह राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए पारदर्शी तरीके से किसानों तक पहुंचाई जाती है।PM-KISAN की प्रमुख उपलब्धियां

  1. अब तक किसानों के खातों में 4.47 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि ट्रांसफर।
  2. 23वीं किस्त में 9.49 करोड़ से अधिक किसानों को 18,984 करोड़ रुपये जारी।
  3. कोविड-19 महामारी के दौरान किसानों को 1.71 लाख करोड़ रुपये की सहायता।
  4. महिला किसानों को अब तक 1.06 लाख करोड़ रुपये से अधिक का लाभ।
  5. योजना के हर चार लाभार्थियों में लगभग एक महिला किसान शामिल।

खेती में निवेश बढ़ाने में मिली मदद

सरकार का कहना है कि PM-KISAN के तहत मिलने वाली सहायता से किसानों को बीज, खाद, सिंचाई, कृषि मशीनरी और अन्य कृषि जरूरतों में समय पर निवेश करने में मदद मिली है। इससे किसानों की उत्पादकता बढ़ी है और गैर-संगठित स्रोतों से कर्ज लेने की जरूरत कम हुई है।

डिजिटल इंडिया का सफल मॉडल

PM-KISAN योजना आधार प्रमाणीकरण, डिजिटल सत्यापन और DBT सिस्टम के जरिए संचालित की जा रही है। सरकार के मुताबिक यह योजना पारदर्शिता, जवाबदेही और तकनीक आधारित सेवा वितरण का सफल उदाहरण बन चुकी है।

'समुद्र मंथन' योजना को मिली मंजूरी

कैबिनेट ने 84,084 करोड़ रुपये की लागत वाली 'समुद्र मंथन' (National Offshore Exploration Scheme) को भी मंजूरी दी है। यह योजना 2030-31 तक लागू रहेगी और इसका उद्देश्य भारत के समुद्री क्षेत्रों में तेल और गैस के नए भंडारों की खोज को तेज करना है।

योजना के तहत क्या होगा?

सरकार के अनुसार इस योजना में कई बड़े कदम शामिल हैं:

  1. समुद्री क्षेत्रों का उच्च गुणवत्ता वाला सिस्मिक सर्वे।
  2. डीपवॉटर और अल्ट्रा-डीपवॉटर में तेज गति से खोजी ड्रिलिंग।
  3. नए बेसिनों में वैज्ञानिक ड्रिलिंग।
  4. साझा ऑफशोर उत्पादन और परिवहन इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास।
  5. ऑयल एंड गैस मैन्युफैक्चरिंग एवं सर्विसेज जोन की स्थापना।
  6. डिजिटल प्रोग्राम मैनेजमेंट और आधुनिक तकनीकों का उपयोग।

ऊर्जा सुरक्षा को मिलेगा बड़ा बल

सरकार का अनुमान है कि 'समुद्र मंथन' योजना से 600 मिलियन मीट्रिक टन ऑयल इक्विवेलेंट (MMTOE) से अधिक नए ऊर्जा भंडार मिलने की संभावना है। इससे घरेलू तेल एवं गैस उत्पादन बढ़ेगा, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' को मजबूती मिलेगी तथा भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी। 

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