अंतरिक्ष में 'प्रलय'! सूरज ने उगली मौत की आग, ISRO के 50 सैटेलाइट्स पर मंडराया खत्म होने का खतरा

इसरो ने सूर्य से निकले बेहद शक्तिशाली सोलर फ्लेयर्स को लेकर अलर्ट जारी किया है। 1 फरवरी 2026 को X8.1 श्रेणी का फ्लेयर दर्ज किया गया, जिसे दशकों में सबसे तीव्र माना जा रहा है। इससे रेडियो ब्लैकआउट, जीपीएस और संचार सेवाओं में बाधा आने की आशंका है। आदित्य-L1 मिशन लगातार स्पेस वेदर की निगरानी कर रहा है, जबकि सैटेलाइट्स की सुरक्षा को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है।

By :  Shivam
Update:2026-02-05 20:51 IST

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने सूर्य से निकल रही तीव्र सौर गतिविधियों को लेकर अलर्ट जारी किया है। फरवरी 2026 की शुरुआत में सूर्य पर कई शक्तिशाली विस्फोट दर्ज किए गए, जिनमें 1 फरवरी को हुआ X8.1 श्रेणी का सोलर फ्लेयर इस वर्ष का सबसे ताकतवर माना जा रहा है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह हाल के दशकों के सबसे प्रबल फ्लेयर्स में शामिल है, जिससे रेडियो संचार बाधित होने और नेविगेशन सिस्टम में रुकावट की आशंका है। इसका असर भारतीय सैटेलाइट और संचार प्रणालियों पर भी पड़ सकता है।

सोलर फ्लेयर क्या है?

सोलर फ्लेयर सूर्य की सतह पर होने वाला अचानक ऊर्जा विस्फोट होता है। यह सूर्य के सनस्पॉट क्षेत्रों में चुंबकीय क्षेत्र के टूटने से उत्पन्न होता है, जिससे एक्स-रे, अल्ट्रावायलेट और रेडियो तरंगें प्रकाश की गति से फैलती हैं। ऐसी घटनाएं सोलर मैक्सिमम के दौरान अधिक होती हैं और वर्तमान में सोलर साइकिल 25 अपने सक्रिय चरण में है।

कब और कैसे हुई गतिविधि?

1 और 2 फरवरी 2026 को सूर्य से कई X-क्लास फ्लेयर्स निकले, जिनमें 1 फरवरी का X8.1 सबसे शक्तिशाली रहा। 3–4 फरवरी तक भी सौर गतिविधि बनी रही। सनस्पॉट AR14366 अब भी सक्रिय है और लगातार ऊर्जा उत्सर्जित कर रहा है। जब तक यह क्षेत्र पृथ्वी की ओर रहेगा, तब तक और फ्लेयर्स की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

वैज्ञानिक सटीक समय की भविष्यवाणी नहीं कर सकते, क्योंकि सूर्य की गतिविधि स्वाभाविक रूप से अप्रत्याशित होती है। हालांकि इसरो और नासा लगातार निगरानी कर स्पेस वेदर अलर्ट जारी कर रहे हैं।

भारत पर संभावित प्रभाव

• रेडियो ब्लैकआउट: हाई-फ्रीक्वेंसी रेडियो संचार प्रभावित हो सकता है।

• जीपीएस और नेविगेशन: सटीकता में कमी आ सकती है, जिससे विमानन, समुद्री नौवहन और अन्य प्रणालियां प्रभावित हो सकती हैं।

• सैटेलाइट्स: इसरो अपने 50 से अधिक उपग्रहों पर निगरानी रखे हुए है। पहले ऐसी घटनाओं से कक्षा में हल्का बदलाव देखा गया है, लेकिन किसी बड़े नुकसान की आशंका नहीं है।

• पावर ग्रिड और घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स: इन पर कोई गंभीर खतरा नहीं बताया गया है।

• यदि कोरोनल मास इजेक्शन (CME) पृथ्वी की ओर बढ़ता है तो जियोमैग्नेटिक तूफान आ सकता है और ध्रुवीय क्षेत्रों में औरोरा (नॉर्दर्न लाइट्स) दिखाई दे सकती हैं।

आदित्य L1 की भूमिका

इसरो का आदित्य L1 मिशन L1 बिंदु पर स्थापित है और सूर्य व स्पेस वेदर की लगातार निगरानी करता है। यह सोलर फ्लेयर्स की समय रहते चेतावनी देने और उपग्रहों की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाता है। साथ ही, इन घटनाओं से सौर चुंबकत्व और प्लाज्मा से जुड़ी नई वैज्ञानिक जानकारियां भी मिल रही हैं।

आम लोगों पर असर

सामान्य जनजीवन पर इसका कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ेगा। केवल ध्रुवीय या अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में कुछ समय के लिए रेडियो या जीपीएस सेवाओं में गड़बड़ी हो सकती है। रोजमर्रा की तकनीक सामान्य रूप से काम करती रहेगी। यदि आगे और फ्लेयर्स पृथ्वी की ओर आते हैं, तो संचार और नेविगेशन में अस्थायी रुकावट संभव है, जिसके लिए इसरो और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां पहले से तैयारी कर रही हैं।

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