"जैकेट के लिए लूट, भाई ने तोड़ा स्टोर रूम का ताला!" जबलपुर क्रूज हादसे की चश्मदीद का खौफनाक खुलासा, अब तक 9 की मौत
Jabalpur cruise accident update: जबलपुर के बरगी डैम में हुए क्रूज हादसे में 9 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अब भी लापता हैं। चश्मदीद ने खुलासा किया कि यात्रियों को लाइफ जैकेट नहीं दी गई और अफरा-तफरी में जान बचाने की जद्दोजहद मच गई। NDRF और सेना का रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।
Jabalpur cruise accident update: जबलपुर के सुप्रसिद्ध बरगी डैम में गुरुवार शाम हुआ क्रूज हादसा अब एक भयावह मानवीय त्रासदी का रूप ले चुका है। जैसे-जैसे समय बीत रहा है, इस गहरे पानी से दिल दहला देने वाली खबरें निकलकर सामने आ रही हैं। अब तक की जानकारी के अनुसार, इस दर्दनाक हादसे में 9 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि 6 लोग अब भी लापता हैं। हालांकि, रेस्क्यू टीम ने बहादुरी दिखाते हुए 22 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। इस बीच, दिल्ली से अपने परिवार के साथ घूमने आईं चश्मदीद संगीता कोरी के बयान ने प्रशासन और क्रूज प्रबंधन के सुरक्षा दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं। उनके आरोपों ने यह साफ कर दिया है कि यह केवल एक हादसा नहीं, बल्कि प्रबंधन की घोर लापरवाही का नतीजा है।
मौत के साये में जैकेट के लिए मची लूट: चश्मदीद की जुबानी
हादसे के वक्त क्रूज पर मौजूद संगीता कोरी ने बताया कि शाम करीब 6 बजे जब क्रूज वापस लौट रहा था, तभी अचानक मौसम बिगड़ गया। तेज हवाओं के साथ पानी क्रूज के अंदर भरने लगा। संगीता का सबसे गंभीर आरोप यह है कि सफर शुरू होने से पहले किसी भी यात्री को लाइफ जैकेट नहीं पहनाई गई थी। जब क्रूज डूबने लगा और मौत सामने खड़ी दिखी, तब स्टोर रूम का ताला खोलकर जैकेट निकालने की कोशिश की गई। उस वक्त यात्रियों के बीच अपनी जान बचाने के लिए जैकेट को लेकर छीना-झपटी मच गई। संगीता के भाई ने हिम्मत दिखाते हुए स्टोर रूम का दरवाजा तोड़ा और जैकेट बांटे, लेकिन तब तक क्रूज अनियंत्रित होकर पलट चुका था और कई लोग गहरे पानी में समा चुके थे।
चालक की लापरवाही और स्थानीय लोगों की अनसुनी चेतावनी
संगीता कोरी के मुताबिक, जब तूफान शुरू हुआ तो किनारे पर खड़े स्थानीय लोग चिल्ला-चिल्लाकर और हाथ हिलाकर चालक को खतरे का इशारा कर रहे थे। वे उसे क्रूज को सुरक्षित दिशा में ले जाने के लिए कह रहे थे, लेकिन चालक ने उनकी एक न सुनी। संगीता ने आरोप लगाया कि क्रूज चालक के पास पर्याप्त अनुभव नहीं था और वह स्थिति को संभालने में पूरी तरह नाकाम रहा। उन्होंने गुस्से में कहा कि क्रूज प्रबंधन केवल कमाई पर ध्यान दे रहा था, जबकि यात्रियों की सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं थे। कम से कम जिनसे पैसा लिया जा रहा है, उनकी जान की कीमत तो समझनी चाहिए थी।
ऑपरेशन 'हाइड्रोलिक' और सेना का बड़ा रेस्क्यू मिशन
हादसे की गंभीरता को देखते हुए आगरा से सेना की विशेष टीम और एनडीआरएफ (NDRF) ने मोर्चा संभाल लिया है। शुक्रवार सुबह से ही 'ऑपरेशन हाइड्रोलिक' के तहत क्रूज को बाहर निकालने की जंग शुरू हो गई है। पत्थरों के बीच रास्ता बनाकर भारी-भरकम हाइड्रोलिक मशीनें और जेसीबी डैम के नीचे उतारी गई हैं। गैस कटर की मदद से क्रूज के हिस्सों को काटा जा रहा है, क्योंकि आशंका है कि कुछ शव अब भी क्रूज के केबिन या अंदरूनी हिस्सों में फंसे हो सकते हैं। मौके पर पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह और पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र लोधी खुद मौजूद रहकर रेस्क्यू ऑपरेशन की निगरानी कर रहे हैं।
क्षमता से अधिक सवारियां: बिना टिकट के बच्चों का सच
हादसे का शिकार हुआ यह क्रूज साल 2006 से चल रहा था। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, क्रूज पर 29 पर्यटक और 2 क्रू मेंबर सवार थे। लेकिन चश्मदीद संगीता कोरी ने एक और बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि क्रूज पर करीब 40 लोग मौजूद थे। इनमें 10-12 ऐसे बच्चे थे, जिनका टिकट नहीं लिया गया था और उन्हें गिनती में शामिल नहीं किया गया। इस खुलासे ने क्रूज की भार क्षमता और नियमों के उल्लंघन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 4 मई को नतीजे आने से पहले जबलपुर में मचे इस कोहराम ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। अब देखना होगा कि इस आपराधिक लापरवाही के जिम्मेदारों पर प्रशासन क्या कड़ी कार्रवाई करता है।