स्कूलों में बांटी गई आतंकियों को हीरो बताने वाली किताब…उड़ गए 8 अफसर! जम्मू-कश्मीर में LG का एक्शन
J&K Book Controversy: जम्मू-कश्मीर के स्कूलों में बांटी गई विवादित किताब को लेकर बड़ा एक्शन हुआ है। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 8 अधिकारियों को निलंबित कर दिया है और संविदाकर्मियों की सेवाएं समाप्त करने के आदेश दिए हैं। किताब में हाफिज सईद की तारीफ, अलगाववादी तत्वों के महिमामंडन और जम्मू-कश्मीर को 'भारत अधिकृत कश्मीर' बताए जाने के आरोप लगे हैं।
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J&K Book Controversy: जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) के सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी में बांटी गई विवादित किताब को लेकर अब बड़ा प्रशासनिक एक्शन सामने आया है। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा (Manoj Sinha) ने मामले को गंभीरता से लेते हुए 8 अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही इस प्रकरण से जुड़े संविदा कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त करने का भी निर्देश दिया गया है।
यह कार्रवाई उस विवाद के बाद हुई है, जिसमें आरोप लगाया गया था कि स्कूलों में वितरित की गई किताब में आतंकियों और अलगाववादी तत्वों को महान बताया गया है।
आतंकियों की तारीफ पर मचा बवाल
इस किताब को लेकर विवाद तब बढ़ा जब जम्मू-कश्मीर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा (Sunil Sharma) ने दावा किया कि यह किताब जम्मू-कश्मीर के विभिन्न स्कूलों की लाइब्रेरियों में बांटी गई है। उन्होंने इसे बेहद गंभीर मामला बताते हुए कहा कि यह एक बड़ा अपराध है।
सुनील शर्मा के मुताबिक किताब में वर्ष 2008 के मुंबई बम धमाकों (Mumbai Blasts 2008) के मास्टरमाइंड हाफिज सईद (Hafiz Saeed) की तारीफ की गई है। इतना ही नहीं, किताब में जम्मू-कश्मीर को भारत अधिकृत कश्मीर (India Occupied Kashmir) बताया गया है, जिसे लेकर राजनीतिक विवाद और गहरा गया है।
आरोप है कि इसमें आतंकियों, अलगाववादी नेताओं और हुर्रियत से जुड़े व्यक्तियों का महिमामंडन किया गया है। इसके अलावा मकबूल भट्ट जैसे व्यक्तियों को भी पाठ्य सामग्री में शामिल किए जाने पर सवाल उठाए गए हैं।
भाजपा नेताओं का कहना है कि जिन लोगों पर घाटी में तीन दशकों तक हिंसा और खून-खराबा फैलाने के आरोप रहे हैं, उन्हें महान व्यक्तित्व, शहीद या नायक के रूप में प्रस्तुत करना नई पीढ़ी के लिए गलत संदेश देने वाला है, जिसके चलते इस किताब को लेकर राजनीतिक और सामाजिक विवाद गहरा गया है।
वहीं, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला (Omar Abdullah) ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्होंने इस तरह की किसी किताब के बारे में पहले कभी नहीं सुना।
जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग
नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने किताब को आपत्तिजनक और विवादास्पद बताते हुए उस पर तत्काल प्रतिबंध लगाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि केवल किताब पर प्रतिबंध लगाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि इसके लेखक, प्रकाशक, विशेषज्ञ समिति और शिक्षा मंत्री तक की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
उन्होंने मांग की कि सरकार के मुखिया को शिक्षा मंत्री को तत्काल पद से बर्खास्त करना चाहिए। सुनील शर्मा ने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले के पीछे एक खास एजेंडा काम कर रहा है और यह बड़े पैमाने पर रचा गया षड्यंत्र है। उन्होंने यह भी दावा किया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस (National Conference) सरकार इस मामले में ऊपर से नीचे तक शामिल हो सकती है।
BJP नेता अल्ताफ ठाकुर ने भी जताई नाराजगी
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता अल्ताफ ठाकुर (Altaf Thakur) ने भी इस विवादित किताब पर नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने कश्मीर में खून-खराबा किया और तीन दशक तक घाटी का माहौल खराब किया, उन्हें शहीद या महान व्यक्तित्व के तौर पर पेश करना चिंताजनक है।
उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम में मकबूल भट्ट (Maqbool Bhat) को शामिल किया गया है और यह नई पीढ़ी के दिमाग पर गंभीर असर डाल सकता है। अल्ताफ ठाकुर ने आरोप लगाया कि विद्रोहियों और हुर्रियत (Hurriyat) से जुड़े लोगों को नायक के रूप में पेश किया जा रहा है, जबकि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और यहां भारत के नायकों की चर्चा होनी चाहिए।
23 लोगों को घोषित किया आतंकवादी
इसी बीच केंद्रीय गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs) ने गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) (UAPA) के तहत पाकिस्तान में सक्रिय 23 व्यक्तियों को आतंकवादी घोषित किया है। इनमें लश्कर-ए-तैयबा (Lashkar-e-Taiba) के संस्थापक हाफिज मोहम्मद सईद (Hafiz Mohammad Saeed) के करीबी सहयोगी, जैश-ए-मोहम्मद (Jaish-e-Mohammed) और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े कई आतंकी शामिल हैं।
सरकारी आदेश के मुताबिक ये लोग सुरक्षा बलों पर हमलों, ड्रोन (Drone) के जरिए हथियारों की तस्करी, सोशल मीडिया (Social Media) के माध्यम से युवाओं को कट्टरपंथी बनाने और आतंकवादी संगठनों में भर्ती कराने जैसी गतिविधियों में शामिल रहे हैं। इसके साथ ही यूएपीए के तहत आतंकवादी घोषित व्यक्तियों की संख्या बढ़कर 80 हो गई है।
सरकार को यूएपीए के तहत ऐसे व्यक्तियों को आतंकवादी घोषित करने का अधिकार प्राप्त है। इससे राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) (NIA) को उनके वित्तीय संसाधनों पर रोक लगाने, हथियारों की बिक्री प्रतिबंधित करने और उनकी संपत्तियां जब्त करने जैसी कार्रवाई करने में मदद मिलती है।