Kerala Assembly Speaker Election: केरल विधानसभा में स्पीकर पद के लिए त्रिकोणीय मुकाबला, यूडीएफ उम्मीदवार मजबूत

Kerala Assembly Speaker Election: केरल विधानसभा में स्पीकर पद के लिए यूडीएफ, एलडीएफ और भाजपा के बीच त्रिकोणीय मुकाबला दिलचस्प हो गया है। संख्या बल में आगे यूडीएफ के उम्मीदवार की जीत तय मानी जा रही है, लेकिन भाजपा पहली बार स्पीकर चुनाव में उतरकर नया राजनीतिक संदेश देना चाहती है।

Update:2026-05-21 16:24 IST

Kerala Assembly Speaker Election (Image Credit-Social Media)

Kerala Assembly Speaker Election: केरल विधानसभा में पहले बड़े राजनीतिक मुकाबले के लिए मंच तैयार है। तीनों प्रमुख मोर्चों ने शुक्रवार को होने वाले स्पीकर चुनाव के लिए अपने उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है जबकि कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीफ को सदन में संख्या बल के मामले में आरामदायक बढ़त हासिल है। 140 सदस्यों वाले इस सदन में जहां सत्ता पक्ष के पास 102 सदस्यों की ताकत है, वहीं वामपंथी दलों के पास 35 और भाजपा के पास तीन सदस्य हैं।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता तिरुवनचूर राधाकृष्णन स्पीकर पद के लिए यूडीएफ के उम्मीदवार के तौर पर जीत के प्रबल दावेदार हैं लेकिन वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) और भाजपा दोनों ने ही नई विधानसभा में अपनी राजनीतिक मौजूदगी दर्ज कराने के लिए इस मुकाबले में उतरने का फैसला किया है।

एलडीएफ ने पूर्व मंत्री और सीपीआई(एम) के वरिष्ठ नेता एसी मोइदीन को मैदान में उतारा है जबकि भाजपा ने चथनूर से पहली बार विधायक बने बीबी गोपाकुमार को नामित करके विधानसभा के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ा है।

केरल विधानसभा के इतिहास में यह पहला मौका है जब भाजपा स्पीकर पद का चुनाव लड़ रही है। गोपाकुमार की उम्मीदवारी का प्रस्ताव भाजपा विधायक राजीव चंद्रशेखर और वी मुरलीधरन पेश करेंगे।

डिप्टी स्पीकर पद का चुनाव भी शुक्रवार को ही होगा, जिसके लिए यूडीएफ ने शनिमोल उस्मान को उम्मीदवार बनाया है।

इस बीच, नवनिर्वाचित विधायकों के शपथ ग्रहण समारोह में औपचारिकता, राजनीतिक संदेश और भावुक पलों का एक अनूठा संगम देखने को मिला। यह कार्यवाही प्रोटेम स्पीकर जी. सुधाकरन की देखरेख में शुरू हुई।

सदस्यों को वर्णमाला के क्रम में शपथ दिलाई गई। शपथ लेने वाले पहले विधायक मत्स्य और सामाजिक न्याय मंत्री वीई अब्दुल गफूर थे, जो कलामस्सेरी निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं।

कई सदस्यों ने ईश्वर के नाम पर शपथ ली जबकि कुछ ने पूरी गंभीरता के साथ शपथ लेने का विकल्प चुना। अटिंगल की विधायक ओएस अंबिका शपथ लेने वाली पहली महिला सदस्य बनीं जबकि मंजेश्वरम के विधायक एकेएम अशरफ ने कन्नड़ भाषा में शपथ ली।

सदन में कुछ ऐसे राजनीतिक रूप से प्रतीकात्मक पल भी देखने को मिले, जिनमें सीपीआई(एम) के पूर्व नेता वी. कुंजिकृष्णन और टीके गोविंदन शामिल थे। वामपंथी दलों से अलग होने के बाद इन दोनों नेताओं ने यूडीफ के समर्थन से चुनाव जीता था।

शपथ लेते समय कुंजिकृष्णन ने विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन का अभिवादन किया जबकि गोविंदन विपक्ष की बेंचों की ओर चलकर पूर्व मुख्यमंत्री से हाथ मिलाने गए जिस पर सत्ता पक्ष की बेंचों से तालियां बजीं।

विजयन ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया और उनका गर्मजोशी से स्वागत करने के लिए अपनी सीट से उठ खड़े हुए। विधानसभा 29 मई को राज्यपाल राजेंद्र वी. अर्लेकर के नीतिगत संबोधन के लिए फिर से बैठेगी। संबोधन पर चर्चा 1 से 3 जून तक होगी जबकि नई यूडीएफ सरकार से जून में अपना पूर्ण बजट पेश करने की उम्मीद है।

सरकार केरल की वित्तीय स्थिति पर एक 'श्वेत पत्र' भी तैयार कर रही है, जिससे यह संकेत मिलता है कि राज्य की राजकोषीय स्थिति नए प्रशासन के शुरुआती चरण में चर्चा का मुख्य विषय रहेगी।

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