Ujjain Kalbhairav VIP Darshan: कालभैरव मंदिर में खत्म होगा दलालों का खेल! प्रशासन ने शुरू की आधिकारिक VIP दर्शन सुविधा

Ujjain Kalbhairav Temple VIP Darshan 2026: उज्जैन के कालभैरव मंदिर में 500 रुपये देकर अब सीधे गर्भगृह से दर्शन किए जा सकेंगे। जानिए नई VIP दर्शन व्यवस्था और प्रशासन का बड़ा फैसला।

Update:2026-05-21 16:42 IST

Ujjain Kalbhairav Temple VIP Darshan 2026 Paid Entry Begins

Ujjain Kalbhairav Temple VIP Darshan 2026: अगर आप उज्जैन जाकर भगवान कालभैरव के गर्भगृह से दर्शन नहीं कर पाए थे, तो अब आपके लिए बड़ी खुशखबरी है। धार्मिक नगरी उज्जैन के प्रसिद्ध काल भैरव मंदिर में दर्शन व्यवस्था को लेकर बड़ा बदलाव किया गया है। अब श्रद्धालु 500 रुपये का शुल्क देकर सीधे गर्भगृह से भगवान कालभैरव के दर्शन कर सकेंगे। बुधवार से शुरू हुई इस नई सशुल्क व्यवस्था को भक्तों का अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। मंदिर समिति का दावा है कि इससे न केवल श्रद्धालुओं को कम समय में सुविधाजनक दर्शन मिलेंगे, बल्कि लंबे समय से सक्रिय अनधिकृत दलालों और सिंडिकेट पर भी रोक लगेगी। मंदिर प्रशासन के अनुसार, पहले कुछ लोग श्रद्धालुओं से मनमाने पैसे लेकर पीछे के रास्तों से जल्दी दर्शन कराते थे। इससे आम भक्तों में नाराजगी बढ़ रही थी। कई शिकायतों और कार्रवाई के बाद प्रशासन ने अब आधिकारिक तौर पर शीघ्र दर्शन व्यवस्था लागू कर दी है। नई व्यवस्था के तहत भक्त निर्धारित शुल्क देकर वैध तरीके से गर्भगृह तक पहुंच सकेंगे।

मात्र 10 मिनट में हुए गर्भगृह से दर्शन

नई व्यवस्था के पहले ही दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने 500 रुपये का टिकट लेकर दर्शन किए। भक्तों का कहना है कि जहां पहले घंटों कतार में लगना पड़ता था, वहीं अब उन्हें लगभग 10 मिनट में गर्भगृह तक पहुंचकर भगवान कालभैरव के बेहद करीब से दर्शन करने का अवसर मिला। कई श्रद्धालुओं ने इसे सुविधाजनक और व्यवस्थित कदम बताया।

हालांकि मंदिर समिति ने यह भी स्पष्ट किया है कि सामान्य श्रद्धालुओं के लिए निशुल्क दर्शन व्यवस्था पहले की तरह जारी रहेगी। जो भक्त शुल्क नहीं देना चाहते, वे सामान्य कतार में लगकर मंदिर परिसर से भगवान के दर्शन कर सकते हैं।

प्रशासन बोला- दलालों पर लगेगी रोक

उज्जैन एसडीएम एलएन गर्ग के मुताबिक मंदिर में लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ लोग अवैध रूप से पैसे लेकर शीघ्र दर्शन करा रहे थे। इससे मंदिर की व्यवस्था प्रभावित हो रही थी और श्रद्धालुओं को परेशानी उठानी पड़ रही थी। प्रशासन ने पहले ऐसे लोगों पर कार्रवाई भी की थी, लेकिन स्थायी समाधान के लिए आधिकारिक सशुल्क व्यवस्था लागू करना जरूरी माना गया।

अधिकारियों का कहना है कि अब जो श्रद्धालु विशेष दर्शन करना चाहेंगे, वे सीधे मंदिर समिति से टिकट लेकर अधिकृत तरीके से गर्भगृह प्रवेश कर सकेंगे। इससे पारदर्शिता भी बढ़ेगी और श्रद्धालुओं को ठगी से बचाया जा सकेगा।

खुले में शुरू हुई व्यवस्था, जल्द बनेगा काउंटर

फिलहाल मंदिर परिसर में टेबल लगाकर टिकट जारी किए जा रहे हैं। मंदिर समिति ने बताया कि शीघ्र दर्शन के लिए अलग काउंटर तैयार किया जा रहा है और अगले एक-दो दिनों में पूरी व्यवस्था व्यवस्थित तरीके से संचालित होने लगेगी। भविष्य में ऑनलाइन टिकट सुविधा शुरू करने पर भी विचार किया जा सकता है ताकि बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को पहले से बुकिंग का विकल्प मिल सके।

महाकाल मंदिर से अलग है यह व्यवस्था

उज्जैन स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में पहले से ही शीघ्र दर्शन व्यवस्था लागू है, जहां भक्त 250 रुपये का टिकट लेकर दर्शन करते हैं। हालांकि वहां श्रद्धालुओं को गर्भगृह से काफी दूरी पर स्थित गणेश मंडपम से दर्शन कराए जाते हैं। इसके मुकाबले कालभैरव मंदिर में शुरू हुई नई व्यवस्था में श्रद्धालुओं को सीधे गर्भगृह तक पहुंचने का अवसर मिल रहा है। यही कारण है कि कई भक्त इस सुविधा को ज्यादा विशेष मान रहे हैं। कुछ श्रद्धालुओं ने तो यह मांग भी उठाई है कि सीमित संख्या में ही सही, महाकाल मंदिर में भी पहले की तरह गर्भगृह प्रवेश वाली सशुल्क व्यवस्था दोबारा शुरू होनी चाहिए।

क्यों खास है कालभैरव मंदिर?

उज्जैन का कालभैरव मंदिर देशभर में अपनी अनूठी परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। यहां भगवान कालभैरव को मदिरा का भोग लगाया जाता है, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। मान्यता है कि भगवान कालभैरव उज्जैन नगरी के रक्षक देवता हैं और उनकी पूजा से भय, संकट और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति मिलती है।

यह मंदिर धार्मिक और तांत्रिक साधना के दृष्टिकोण से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। खासकर कालाष्टमी और भैरव अष्टमी के दौरान यहां हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। ऐसे में भीड़ प्रबंधन और दर्शन व्यवस्था को लेकर प्रशासन पर लगातार दबाव रहता है।

श्रद्धालुओं की मिली-जुली प्रतिक्रिया

नई व्यवस्था को लेकर अधिकांश भक्त संतुष्ट नजर आए, लेकिन कुछ लोगों ने सवाल भी उठाए हैं। उनका कहना है कि मंदिरों में VIP संस्कृति बढ़ने से आम श्रद्धालुओं को असुविधा हो सकती है। वहीं कई श्रद्धालुओं का मानना है कि यदि व्यवस्था पारदर्शी और सीमित संख्या में रहे तो इससे दर्शन व्यवस्था बेहतर होगी। धार्मिक मामलों के जानकारों का कहना है कि देश के कई बड़े मंदिरों में सशुल्क शीघ्र दर्शन की व्यवस्था पहले से लागू है। यदि इससे भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा और व्यवस्था में सुधार होता है तो इसे सकारात्मक कदम माना जा सकता है, लेकिन यह भी जरूरी है कि सामान्य श्रद्धालुओं के अधिकार और सुविधाएं प्रभावित न हों।

सिंहस्थ-2028 को देखते हुए बढ़ रही व्यवस्थाएं

उज्जैन में आने वाले सिंहस्थ-2028 को देखते हुए प्रशासन धार्मिक स्थलों की व्यवस्थाओं को आधुनिक और सुव्यवस्थित बनाने में जुटा है। शहर में यातायात, सुरक्षा, पार्किंग और दर्शन व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए लगातार नए फैसले लिए जा रहे हैं। कालभैरव मंदिर में शुरू हुई यह नई VIP दर्शन व्यवस्था भी उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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