बंगाल में हो गया ‘खेला’! ममता बनर्जी ने फिर बनाया ‘मास्टर प्लान’, पर 3 दलों ने फेर दिया पानी

West Bengal Politics: डेढ़ दशक तक बंगाल की सत्ता पर काबिज रहने वाली ममता बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ विपक्षी एकता की अपील की, लेकिन कांग्रेस और वाम दलों ने साफ तौर पर खारिज कर दिया है।

Update:2026-05-11 10:51 IST

Mamata Banerjee

West Bengal Politics: तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद अब राजनीतिक तौर पर बड़ा झटका लग रहा है। डेढ़ दशक तक बंगाल की सत्ता पर काबिज रहने वाली ममता बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ विपक्षी एकता की अपील की, लेकिन कांग्रेस और वाम दलों ने उनके प्रस्ताव को साफ तौर पर खारिज कर दिया है। इससे बंगाल की राजनीति में नए समीकरण बनने की चर्चा तेज हो गई है।

ममता बनर्जी ने की एकजुट होने की अपील

चुनाव में हार के बाद ममता बनर्जी ने एक वीडियो संदेश जारी कर सभी विपक्षी दलों, छात्र संगठनों और सामाजिक संस्थाओं से बीजेपी के खिलाफ एकजुट होने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि बीजेपी विरोधी ताकतों को एक साझा मंच पर आना चाहिए ताकि देश और लोकतंत्र को बचाया जा सके। ममता ने खासतौर पर लेफ्ट और अल्ट्रा-लेफ्ट दलों से बंगाल और दिल्ली दोनों जगह एक साथ आने की बात कही थी। उनके प्रस्ताव को कांग्रेस, सीपीआई और सीपीआई (एमएल) ने तुरंत खारिज कर दिया।

वाम दलों का कहना है कि ममता बनर्जी के शासनकाल में लोकतंत्र को दबाया गया। CPI के राज्य सचिव स्वपन बनर्जी ने कहा कि ममता बनर्जी के साथ जाने का सवाल ही पैदा नहीं होता, क्योंकि उनके शासन में लोकतांत्रिक मूल्यों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा। कांग्रेस ने भी तृणमूल कांग्रेस सरकार पर भ्रष्टाचार, राजनीतिक हिंसा और विपक्ष के दमन के आरोप लगाए हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि ममता बनर्जी को अब विपक्ष की याद तब आ रही है, जब उनकी पार्टी सत्ता से बाहर हो गई है। कांग्रेस ने उनके शासन को अलोकतांत्रिक बताते हुए किसी भी तरह के गठबंधन से दूरी बना ली है।

बंगाल राजनीति में TMC पहले जैसी मजबूत स्थिति में नहीं? 

दरअसल, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों में बीजेपी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। 294 सीटों वाली विधानसभा में बीजेपी ने 207 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत हासिल किया, जबकि तृणमूल कांग्रेस केवल 80 सीटों पर सिमट गई। इसके बाद बीजेपी नेता सुभेंदु अधिकारी ने 9 मई को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। विश्लेषकों का मानना है कि ममता बनर्जी की सरकार लंबे समय से कानून व्यवस्था, भ्रष्टाचार और तुष्टीकरण की राजनीति के आरोपों से घिरी रही। विपक्ष लगातार उन पर राजनीतिक विरोधियों को दबाने और लोकतांत्रिक संस्थाओं का दुरुपयोग करने का आरोप लगाता रहा है। अब सत्ता गंवाने के बाद ममता की विपक्षी एकता की कोशिशों को कांग्रेस और वाम दलों ने ठुकराकर साफ संकेत दे दिया है कि बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस अब पहले जैसी मजबूत स्थिति में नहीं रही।

Tags:    

Similar News