आरक्षण खत्म करने की मांग पर भड़कीं मायावती, राहुल गांधी और EWS को लेकर दिया बड़ा बयान
मायावती ने जाति आधारित आरक्षण खत्म कर आर्थिक आधार पर आरक्षण लागू करने की मांग का विरोध किया। राहुल गांधी और कांग्रेस पर भी आरक्षण को लेकर निशाना साधा।
Mayawati on Reservation: बहुजन समाज पार्टी (BSP) सुप्रीमो मायावती ने जाति आधारित आरक्षण को खत्म कर इसे केवल आर्थिक आधार पर लागू करने की मांग का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई भी कदम संविधान की मूल भावना और सामाजिक न्याय के उद्देश्य के खिलाफ होगा। रविवार को लखनऊ में मायावती ने कहा कि अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए आरक्षण का प्रावधान सदियों से चले आ रहे सामाजिक भेदभाव, शोषण और वंचना को दूर करने के लिए किया गया था।
मायावती ने कहा कि आरक्षण को केवल आर्थिक स्थिति से जोड़ना सामाजिक असमानता की वास्तविक समस्या को नजरअंदाज करना होगा। उन्होंने राजनीतिक दलों और आरक्षण का विरोध करने वालों से अपील की कि वे ऐसा कोई कदम न उठाएं, जिससे समतामूलक समाज और सामाजिक सम्मान पर आधारित राष्ट्र निर्माण के संवैधानिक लक्ष्य को नुकसान पहुंचे।
उन्होंने डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों का हवाला देते हुए कहा कि जातिवाद का त्याग करना ही सच्ची देशभक्ति है।
राहुल गांधी और कांग्रेस पर मायावती का हमला
जंतर-मंतर पर हुए आरक्षण विरोधी प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए मायावती ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी या कांग्रेस का कोई अन्य वरिष्ठ नेता प्रदर्शनकारियों के बीच जाकर अपना रुख स्पष्ट करने नहीं पहुंचा।
बसपा प्रमुख ने कहा कि कांग्रेस का यह रवैया दलितों, आदिवासियों और पिछड़े वर्गों के प्रति उसकी कथित आरक्षण-विरोधी मानसिकता को सामने लाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कांग्रेस सामाजिक न्याय और आरक्षण की पक्षधर है, तो उसे आरक्षण विरोधी आंदोलनों पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।
EWS पर भी उठाए सवाल
मायावती ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए लागू EWS आरक्षण व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आर्थिक आधार पर आरक्षण पहले से लागू है, लेकिन सामान्य वर्ग के गरीब परिवारों को इसका अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार और जातिगत भेदभाव से प्रभावित सरकारी व्यवस्था के कारण आरक्षण से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हो पाया। यही वजह है कि आजादी के दशकों बाद भी SC, ST और OBC वर्ग के लोगों को गरीबी, सामाजिक भेदभाव और वंचना का सामना करना पड़ रहा है।
सरकारों से आरक्षण विरोधियों को संरक्षण न देने की अपील
मायावती ने केंद्र और राज्य सरकारों से अपील की कि आरक्षण विरोधी तत्वों को किसी भी प्रकार का संरक्षण या राजनीतिक आश्रय नहीं दिया जाना चाहिए। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों और जनता से इस संवेदनशील मुद्दे पर राजनीति से बचने और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की अपील की।
उन्होंने स्पष्ट किया कि आरक्षण सिर्फ आर्थिक मदद का माध्यम नहीं, बल्कि ऐतिहासिक सामाजिक असमानता और भेदभाव को दूर करने का संवैधानिक उपाय है।