पुलिस के हत्थे चढ़ा 'श्रीसन मेडिकल्स' का मालिक, कफ सिरप मामले में हुयी गिरफ्तारी,खुल सकते हैं बड़े राज
मध्य प्रदेश पुलिस ने कोल्ड्रिफ कफ सिरप से 20 बच्चों की मौत के मामले में श्रीसन मेडिकल्स के मालिक रंगनाथन को गिरफ्तार किया। अब पुलिस और SIT की टीम उनसे पूरे मामले की गहन पूछताछ कर रही है।
SRESAN MEDICALS Owner Arrested: मध्य प्रदेश में 'कोल्ड्रिफ' (Coldrif) कफ सिरप से हुई 20 मासूम बच्चों की दर्दनाक मौत के मामले में पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। राज्य पुलिस ने ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए कथित रूप से दूषित कफ सिरप बनाने वाली कंपनी 'श्रीसन मेडिकल्स' (SRESAN MEDICALS) के मालिक रंगनाथन (RANGANATHAN) को आखिरकार हिरासत में ले लिया है। इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद से ही रंगनाथन फरार था। अब हिरासत में लिए जाने के बाद, पुलिस और एसआईटी की टीम रंगनाथन से पूरे मामले के नेटवर्क और साज़िश के संबंध में गहन पूछताछ कर रही है। यह गिरफ्तारी उस समय हुई है, जब इस गंभीर चूक के लिए तमिलनाडु सरकार पर भी सीधे तौर पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगा है। इस मामले ने पूरे देश में बच्चों के स्वास्थ्य सुरक्षा मानकों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
फरार मालिक पर था इनाम, SIT ने दबोचा
मध्य प्रदेश पुलिस ने इस जघन्य मामले को गंभीरता से लेते हुए पहले ही सख्त कार्रवाई के संकेत दे दिए थे। कंपनी के फरार मालिकों पर इनाम घोषित किया गया था। पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी में मदद करने वाले व्यक्ति को ₹20,000 का नकद इनाम देने का ऐलान किया था। इसके साथ ही, कंपनी के फरार मालिकों को जल्द से जल्द कानून के कटघरे में लाने के लिए एक विशेष एसआईटी (SIT) टीम का गठन किया गया था। इस टीम की विशेष कार्रवाई का ही परिणाम है कि रंगनाथन को हिरासत में लिया जा सका है। यह गिरफ्तारी इस बात का संकेत है कि पुलिस इस मामले की तह तक जाने और इसके पीछे जिम्मेदार हर व्यक्ति को सजा दिलाने के लिए दृढ़ संकल्पित है।
मध्य प्रदेश सरकार का तमिलनाडु पर गंभीर आरोप
इस मामले ने अब एक अंतर-राज्यीय राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया है। मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने बुधवार को एक बड़ा और सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य में 20 बच्चों की मौत दूषित कफ सिरप पीने से हुई है और इसके लिए तमिलनाडु सरकार की गंभीर लापरवाही सीधे तौर पर जिम्मेदार है। मंत्री पटेल ने कहा, "यह तमिलनाडु सरकार की जिम्मेदारी थी कि राज्य से बाहर भेजी जाने वाली दवाओं की उचित और कठोर जाँच करे।" उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मध्य प्रदेश सरकार भी राज्य में आने वाली दवाओं की रैंडम जाँच (Random Checking) करती है, लेकिन यह जानलेवा सिरप 'संयोगवश' उस सैंपलिंग में शामिल नहीं हो पाया। यह बयान इस बात पर जोर देता है कि कैसे एक राज्य से दूसरे राज्य में भेजे जाने वाले फार्मास्युटिकल उत्पादों की गुणवत्ता जाँच में हुई एक चूक ने 20 मासूम जिंदगियाँ छीन लीं।
पूछताछ में खुल सकते हैं बड़े राज
श्रीसन मेडिकल्स के मालिक रंगनाथन की गिरफ्तारी इस पूरे रैकेट की 'मास्टरमाइंड' कड़ी हो सकती है। पुलिस अब उनसे यह जानने की कोशिश करेगी कि:
सिरप में यह दूषित तत्व (Contaminant) कहाँ से आया?
क्या यह उत्पादन (Manufacturing) स्तर पर जानबूझकर किया गया था या यह केवल एक गंभीर प्रक्रियात्मक चूक थी?
इस दूषित सिरप को जानबूझकर बाजार में क्यों भेजा गया, जबकि इसकी गुणवत्ता पर संदेह था?
इस घटना ने पूरे देश में दवा सुरक्षा और गुणवत्ता नियंत्रण की आवश्यकता को फिर से रेखांकित कर दिया है। सरकार और नियामक संस्थाओं पर अब यह दबाव है कि वे बच्चों और जनता को दवा के नाम पर बेचे जा रहे 'जहर' को रोकने के लिए सख्त कदम उठाएँ।