सांसदों की बगावत के बाद MVA में बढ़ी बेचैनी, बैठक में खाली कुर्सियां देख छलका उद्धव का दर्द

MVA crisis: महाराष्ट्र में महा विकास अघाड़ी (MVA) की रणनीतिक बैठक से 23 विधायकों की गैरमौजूदगी ने गठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उद्धव ठाकरे ने भी बैठक में चिंता जताते हुए सहयोगी दलों से एकता बनाए रखने की अपील की।

Update:2026-06-25 16:22 IST

MVA Crisis: महाराष्ट्र की राजनीति में महा विकास अघाड़ी (एमवीए) को लेकर एक बार फिर चर्चाएं तेज हो गई हैं। गठबंधन की हालिया रणनीतिक बैठक में बड़ी संख्या में विधायकों की गैरमौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। बताया जा रहा है कि करीब 60 विधायकों में से 23 विधायक बैठक में शामिल नहीं हुए। ऐसे समय में जब गठबंधन पहले से कई चुनौतियों का सामना कर रहा है, यह स्थिति उसके लिए चिंता बढ़ाने वाली मानी जा रही है। बैठक का उद्देश्य मानसून सत्र के दौरान विपक्ष की रणनीति तय करना था, लेकिन नेताओं और विधायकों की कम उपस्थिति ने बैठक की चर्चा को दूसरी दिशा दे दी।

कई वरिष्ठ नेता नहीं पहुंचे

बैठक में कई बड़े नेताओं की अनुपस्थिति भी चर्चा का विषय बनी रही। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के प्रमुख शरद पवार और वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल इसमें शामिल नहीं हुए। जानकारी के अनुसार, दोनों नेता निजी कारणों से बैठक में उपस्थित नहीं हो सके। कांग्रेस के कुछ प्रमुख नेता भी बैठक से दूर रहे। हालांकि, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल और शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत मौजूद रहे। उनकी मौजूदगी के बावजूद विपक्षी एकता को लेकर सवाल उठते रहे।

उद्धव ठाकरे ने जताई चिंता

बैठक के दौरान शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने गठबंधन की स्थिति को लेकर अपनी चिंता जाहिर की। हाल ही में उनकी पार्टी के कुछ सांसदों के दूसरे गुट में जाने के बाद राजनीतिक दबाव और बढ़ गया है। बैठक में उद्धव ठाकरे ने सहयोगी दलों से एकजुटता बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि गठबंधन को उन लोगों पर ध्यान देना चाहिए जो अभी भी साथ खड़े हैं। साथ ही उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या सभी दल वास्तव में एकजुट होकर विपक्ष की भूमिका निभा रहे हैं।

मानसून सत्र को लेकर थी चर्चा

सूत्रों के अनुसार, बैठक का मुख्य एजेंडा राज्य विधानसभा के मानसून सत्र में उठाए जाने वाले मुद्दों पर चर्चा करना था। विपक्ष सरकार को किन विषयों पर घेर सकता है और किस तरह संयुक्त रणनीति बनाई जाए, इस पर विचार होना था। हालांकि, बैठक में नेताओं और विधायकों की अनुपस्थिति ने रणनीति से ज्यादा गठबंधन की अंदरूनी स्थिति पर ध्यान खींच लिया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की गैरमौजूदगी विपक्षी एकता की तस्वीर को कमजोर करती है।

क्या मुश्किल दौर से गुजर रहा है MVA?

महा विकास अघाड़ी का गठन वर्ष 2019 में हुआ था। तब से लेकर अब तक गठबंधन ने कई राजनीतिक उतार-चढ़ाव देखे हैं। शिवसेना और एनसीपी में हुई बगावतों ने पहले भी गठबंधन को झटके दिए हैं, लेकिन इसके बावजूद यह गठबंधन बना रहा। अब एक बार फिर राजनीतिक घटनाक्रम तेज हो गए हैं। लगातार सामने आ रही चुनौतियों और नेताओं के अलग-अलग रुख के कारण गठबंधन के भविष्य को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि, एमवीए के नेता अब भी दावा कर रहे हैं कि गठबंधन मजबूत है और आगामी राजनीतिक लड़ाइयों में एकजुट होकर मुकाबला करेगा। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में एमवीए अपने सहयोगी दलों को कितनी मजबूती से साथ रख पाता है और विपक्षी राजनीति में अपनी पकड़ बनाए रखता है या नहीं।

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