सरहद पार प्यार की उड़ान: वाघा बॉर्डर बंद होने पर मस्कट-कोलंबो के रास्ते भारत पहुंचीं 150 पाकिस्तानी दुल्हनें
India-Pakistan: अटारी-वाघा सीमा बंद होने के बाद विशेष वीजा ढील से 150 पाकिस्तानी हिंदू दुल्हनें हवाई मार्ग से भारत पहुंचीं। वहीं, ऑपरेशन सिंदूर में महिला फाइटर पायलटों की अहम भूमिका की जानकारी सामने आई।
India Pakistan Border
India-Pakistan: दो देशों के बीच की तल्खियों और बंद सरहदों की बंदिशों पर आखिरकार मुहब्बत भारी पड़ गई। मई 2025 में भारत द्वारा शुरू किए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद अटारी-वाघा बॉर्डर के रास्ते सील कर दिए गए थे, जिससे पाकिस्तान के सिंध प्रांत की हिंदू युवतियों की भारत में तय शादियां अधर में लटक गई थीं। महीनों के इंतजार के बाद गृह मंत्रालय से मिली विशेष वीजा ढील ने इन दुल्हनों के लिए आसमान के रास्ते नई राह खोल दी। पिछले तीन महीनों के भीतर कम से कम 150 पाकिस्तानी दुल्हनें अपने करीब 450 रिश्तेदारों के साथ हवाई मार्ग से भारत पहुंचीं और अपने जीवनसाथियों के साथ परिणय सूत्र में बंधीं।
वाघा सीमा बंद होने के कारण यह सफर बेहद पेचीदा और कूटनीतिक रूप से चुनौतीपूर्ण रहा। जहां पहले सड़क मार्ग से कुछ ही घंटों में सीमा पार की जा सकती थी, वहीं इस बार दुल्हनों और उनके परिवारों को मस्कट, कोलंबो, ढाका, दुबई और कतर जैसे तीसरे देशों से होकर कनेक्टिंग उड़ानों के जरिए भारत आना पड़ा। ये परिवार नागपुर, अहमदाबाद, रायपुर, पुणे और भोपाल जैसे शहरों में पहुंचे। सिंध की आरती और नागपुर के इंकेश का उदाहरण इस कशमकश को बयां करता है; दोनों का रिश्ता तय होने के बाद उन्हें शादी के लिए एक साल से अधिक का लंबा इंतजार करना पड़ा, जिसके बाद हाल ही में दोनों का विवाह संपन्न हुआ।
'ऑपरेशन सिंदूर': लश्कर मुख्यालय पर एयरस्ट्राइक करने वाले सुखोई फॉर्मेशन का हिस्सा थीं महिला फाइटर पायलट
मई 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा सीमा पार चलाए गए जवाबी अभियान 'ऑपरेशन सिंदूर' को लेकर एक और बड़ा सैन्य खुलासा हुआ है। अभियान के पहले ही दिन पाकिस्तान के मुरीदके स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के मुख्यालय को निशाना बनाने वाली लड़ाकू फॉर्मेशन में महिला फाइटर पायलट भी शामिल थीं, जिन्होंने सुखोई Su-30MKI जैसे अग्रिम पंक्ति के जेट से सटीक बमबारी को अंजाम दिया।
रक्षा सूत्रों के अनुसार, इस पूरे मिशन में भारतीय वायुसेना की जांबाज महिला अधिकारियों ने ट्रांसपोर्ट विमानों, हेलीकॉप्टरों और कॉम्बैट स्ट्राइकर्स के तौर पर बेहद अहम रणनीतिक भूमिका निभाई। लड़ाकू स्क्वाड्रन में तैनात महिला पायलटों ने न केवल भारी सुरक्षा वाले एयरस्पेस में घुसकर दुश्मन के ठिकानों पर पिन-पॉइंट स्ट्राइक की, बल्कि जटिल परिस्थितियों में मिशन को पूरी तरह सफल बनाकर सुरक्षित वापसी भी की।