अंतरिक्ष में बनेंगी जीवनरक्षक दवाएं! PM मोदी से मिले 20 स्पेस स्टार्टअप्स, सामने आया भारत का भविष्य का स्पेस मिशन

Space Pharmaceutical Manufacturing: राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस पर PM नरेंद्र मोदी ने 20 स्पेस स्टार्टअप्स के प्रमुखों से मुलाकात की। स्पेस फार्मा, सैटेलाइट लॉन्च, रिफ्यूलिंग और स्पेस डेब्रीज हटाने की योजनाएं सामने आईं।

Update:2026-08-24 21:42 IST

Skyroot Aerospace (Image Credit-Social Media)

 नई दिल्ली। भारत सरकार द्वारा स्पेस सेक्टर को निजी कंपनियों और स्टार्टअप्स के लिए खोलने के नीतिगत फैसले के अब दूरगामी और अभूतपूर्व परिणाम दिखने लगे हैं। 'राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस' (National Space Day) के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के 20 प्रमुख स्पेस स्टार्टअप्स के संस्थापकों और सीईओ (CEOs) से बातचीत की। इस दौरान भारतीय अंतरिक्ष उद्यमियों ने रॉकेट लॉन्च, स्पेस फार्मास्युटिकल्स, इन-ऑर्बिट सर्विसेज, रिफ्यूलिंग और सैटेलाइट मैन्युफैक्चरिंग जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में भारत की भविष्य की योजनाओं का खाका प्रस्तुत किया।

प्रधानमंत्री ने युवा उद्यमियों की सराहना करते हुए कहा कि स्पेस सेक्टर में भारतीय स्टार्टअप्स तेजी से वैश्विक पहचान बना रहे हैं। उन्होंने कहा—"आपने एक नए और जोखिम भरे क्षेत्र में साहस दिखाया है। सरकार की नीतिगत स्थिरता और समर्थन का उद्देश्य यही विश्वास पैदा करना रहा है कि जोखिम लेने पर कोई उनका साथ नहीं छोड़ेगा। भारत की लागत प्रतिस्पर्धा (Cost Competitiveness), प्रतिभा और जोखिम लेने की क्षमता हमें वैश्विक स्पेस बाजार में अग्रणी बनाएगी।"

स्टार्टअप्स के मुख्य प्रोजेक्ट्स और भविष्य के लक्ष्य

  अंतरिक्ष में दवा निर्माण (Space Pharma):

एक प्रमुख स्टार्टअप ने प्रधानमंत्री के साथ अपनी उस महत्वाकांक्षी योजना को साझा किया, जिसके तहत ऐसा विशेष सैटेलाइट विकसित किया जा रहा है जो माइक्रोग्रैविटी (अंतरिक्ष के शून्य-गुरुत्वाकर्षण वातावरण) में दवाओं और जटिल प्रोटीनों का निर्माण करेगा और फिर सुरक्षित रूप से उन्हें पृथ्वी पर वापस लेकर आएगा। शून्य गुरुत्वाकर्षण में बनी दवाएं अधिक शुद्ध और प्रभावी मानी जाती हैं।

 स्काईरूट: हर महीने सैटेलाइट लॉन्चिंग की तैयारी:

देश की पहली 'स्पेस-टेक यूनिकॉर्न' बनी स्काईरूट एयरोस्पेस (Skyroot Aerospace) ने बताया कि 18 जुलाई को उसके निजी रॉकेट ने सफलतापूर्वक उपग्रह को कक्षा में स्थापित किया था।

कंपनी का लक्ष्य अगले वर्ष के मध्य तक हर महीने एक सैटेलाइट लॉन्च करने की क्षमता हासिल करना है, जिसे आगे बढ़ाकर साप्ताहिक और दैनिक लॉन्चिंग तक ले जाया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी उत्पादन क्षमता को पूरा करने के लिए कंपनी की तीन फैक्ट्रियां तैयार हो चुकी हैं।

1. स्पेस डेब्रीज की सफाई के लिए रोबोटिक स्पेसक्राफ्ट:

एक अन्य स्टार्टअप ऐसा विशेष रोबोटिक स्पेसक्राफ्ट तैयार कर रहा है, जो पृथ्वी की कक्षा में चक्कर काट रहे निष्क्रिय उपग्रहों और मलबे (Space Debris) को हटाकर अंतरिक्ष को सुरक्षित बनाएगा।

  इन-स्पेस रिफ्यूलिंग और डॉकिंग तकनीक:

अंतरिक्ष में ही दूसरे सैटेलाइट्स में ईंधन भरने (In-orbit Refueling) और डॉकिंग तकनीक पर भी काम चल रहा है। यह तकनीक उपग्रहों के कामकाजी जीवनकाल को कई वर्षों तक बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होगी।

पीएम मोदी ने इस बात पर भी विशेष खुशी जताई कि विदेशों में कार्यरत शीर्ष भारतीय वैज्ञानिक और इंजीनियर अब स्वदेश लौटकर भारतीय स्पेस स्टार्टअप्स से जुड़ रहे हैं, जो देश के स्पेस इकोसिस्टम के लिए एक सुखद और क्रांतिकारी संकेत है।

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