पीएम मोदी ने खोली पोल! भारत के साथ आजाद हुए ये 5 देश आखिर कैसे निकल गए हमसे आगे?

PM Modi Speech 18 April 2026: पीएम मोदी के 18 अप्रैल के संबोधन ने देश में नई बहस छेड़ दी है! भारत के साथ आजाद हुए पाकिस्तान, वियतनाम और चीन आज कहां खड़े हैं? जानें उन देशों की कहानी जो हमसे आगे निकल गए और कौन रह गया पीछे।

Update:2026-04-18 22:48 IST

PM Modi Speech 18 April 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18 अप्रैल को राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में एक ऐसी बात कह दी है, जिसने पूरे देश में नई बहस छेड़ दी है। पीएम मोदी ने अपने भाषण में उन देशों का जिक्र किया जो भारत के साथ ही आजाद हुए थे, लेकिन आज विकास की दौड़ में हमसे कहीं आगे निकल चुके हैं। उन्होंने सीधे तौर पर एक खास राजनीतिक दल पर निशाना साधते हुए कहा कि गलत नीतियों की वजह से भारत उन देशों के मुकाबले पीछे रह गया। यह बात सुनते ही हर भारतीय के मन में यह सवाल उठने लगा है कि आखिर वो कौन से देश हैं जो हमारे साथ ही 'जीरो' से शुरू हुए थे और आज वो कहां खड़े हैं? क्या वाकई भारत ने अपनी रफ्तार खो दी या हम सही रास्ते पर हैं?

बर्बादी की कगार पर खड़े मुल्क

जब हम उन देशों की बात करते हैं जो भारत के साथ आजाद हुए, तो सबसे पहला नाम पाकिस्तान का आता है। 14 अगस्त 1947 को भारत से अलग होकर बना यह मुल्क आज अपनी गलतियों की सजा भुगत रहा है। जहां भारत आज दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, वहीं पाकिस्तान आईएमएफ और विश्व बैंक के सामने कटोरा लेकर खड़ा है। वहां न तो लोकतंत्र स्थिर रहा और न ही नीतियां। यही हाल हमारे दूसरे पड़ोसी श्रीलंका का भी है, जो 1948 में आजाद तो हुआ लेकिन आज कर्ज के जाल में ऐसा फंसा है कि वहां की जनता को सड़कों पर उतरना पड़ा। म्यांमार की स्थिति तो और भी डरावनी है, जहां आजादी के इतने सालों बाद भी सेना का शासन है और जनता हिंसा के साये में जीने को मजबूर है। इन देशों की तुलना में भारत निश्चित रूप से एक मजबूत लोकतंत्र बनकर उभरा है।

एशिया के वो सितारे जो हमसे आगे निकल गए

पीएम मोदी के संबोधन का असली इशारा उन देशों की तरफ था जिन्होंने संसाधनों की कमी के बावजूद चमत्कार कर दिखाया। इंडोनेशिया और वियतनाम इसके सबसे बड़े उदाहरण हैं। इंडोनेशिया जो 1940 के दशक के अंत में पूरी तरह आजाद हुआ, आज जी-20 का एक प्रभावशाली सदस्य है और दक्षिण-पूर्व एशिया की सबसे बड़ी ताकत बन चुका है। वहीं वियतनाम ने तो अमेरिका जैसे देश से सालों तक युद्ध लड़ने के बाद भी हार नहीं मानी। आज वियतनाम दुनिया का नया मैन्युफैक्चरिंग हब बन रहा है और कई मायनों में भारत को कड़ी टक्कर दे रहा है। इन देशों ने साबित कर दिया कि अगर नीतियां सही हों, तो एक छोटा देश भी दुनिया के नक्शे पर अपनी धाक जमा सकता है।

चीन की चुनौती और भारत का भविष्य

सबसे बड़ी तुलना हमेशा चीन के साथ होती है। साल 1949 में क्रांतिकारी बदलाव के बाद चीन ने जिस रफ्तार से तरक्की की, उसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया। आज चीन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और मैन्युफैक्चरिंग के मामले में उसका कोई मुकाबला नहीं है। हालांकि वहां एक-पार्टी शासन है, लेकिन विकास के आंकड़ों में वह भारत से काफी आगे निकल चुका है। पीएम मोदी का कहना है कि अगर भारत में भी शुरुआत से सही विजन होता, तो आज हम भी चीन की कतार में खड़े होते। अब सवाल यह है कि क्या अगले कुछ वर्षों में भारत इन सभी देशों को पीछे छोड़कर विश्व गुरु बन पाएगा? पीएम मोदी के इस संबोधन ने देश को अपनी कमियों को पहचानने और नई रफ्तार से आगे बढ़ने का एक बड़ा संदेश दिया है।

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