लालू परिवार के साथ अनोखा संयोग! उस कारण तेजस्वी यादव का सीएम बनना कंफर्म

Bihar Assembly Elections 2025: बिहार में आरजेडी नेता तेजस्वी यादव और उनके गठबंधन के लिए 60 प्रतिशत से अधिक मतदान शुभ संकेत है। उसके पीछे लालू यादव के परिवार के नाम दर्ज अनोखा संयोग मददगार साबित हो सकता है।

Update:2025-11-13 16:17 IST

Bihar Assembly Elections 2025: बिहार की चुनावी राजनीति में मतदान प्रतिशत का एक दिलचस्प कनेक्शन लालू प्रसाद यादव और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सत्ता में आने से जुड़ा रहा है। जो साल 1990 से लेकर 2020 तक के विधानसभा चुनावों के आंकड़ों के विश्लेषण से तथ्य सामने आता है। जब-जब राज्य में 60 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ है, तब-तब लालू यादव और बाद में राबड़ी देवी के नेतृत्व वाली आरजेडी की सरकार बनी है। यह संयोग वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में तेजस्वी यादव के लिए एक शुभ संकेत है। जो एग्जिट पोल में हार के बाद भी आरजेडी के लिए अच्छे संकेत है। इस बार बिहार में 68.79 प्रतिशत वोट पड़े है।

60 से अधिक मतदान से लालू की सत्ता

आपको बता दे कि लालू प्रसाद यादव पहली बार 1990 में 62.04 प्रतिशत के सबसे उच्च मतदान प्रतिशत के साथ बिहार के मुख्यमंत्री बने थे। वह चुनाव कांग्रेस के पतन की शुरुआत और जनता दल (RJD) के उदय का प्रतीक बना था। इसके बाद 1995 के विधानसभा चुनाव में लालू प्रसाद यादव सत्ता बचाने में कामयाब रहे, तब भी मतदान प्रतिशत 61.8 प्रतिशत रहा था। उसके बाद वर्ष 2000 में बिहार विभाजन की दहलीज पर था, उस समय भी मतदाताओं ने 62.5 प्रतिशत मतदान करके उत्साह दिखाया और परिणाम स्वरूप राबड़ी देवी के नेतृत्व में आरजेडी गठबंधन की सरकार बनवाई थी। इस ट्रेंड में बड़ा बदलाव 2005 के चुनावों के साथ आया था।

बिहार में 60 प्रतिशत से ज्यादा मतदान

1990 में 62.04 प्रतिशत मतदान के साथ लालू प्रसाद यादव और जनता दल की सरकार बनी थी।

1995 में 61.8 प्रतिशत मतदान के साथ लालू यादव और जनता दल की दोबारा सरकार बनी थी।

2000 में 62.5 प्रतिशत मतदान के साथ राबड़ी देवी व आरजेडी की तीसरी बार सरकार बनी थी।

बिहार मेें 2005 से नीतीश का दौर

तब फरवरी 2005 में हुए चुनाव में कोई भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला था। उसके बाद अक्टूबर 2005 में हुए चुनाव में 45.85 प्रतिशत मतदान हुआ था। इस कम मतदान ने बिहार से लालू-राबड़ी की सत्ता को खत्म कर दिया था। तब नीतीश कुमार के नेतृत्व वाला एनडीए गठबंधन सत्ता में आया था। इसके बाद 2010 में मतदान प्रतिशत 52.1 प्रतिशत रहा था। 2015 में बढ़कर 55.9 प्रतिशत तक पहुंच गया था, ये दोनों ही आंकड़े 60 प्रतिशत के जादुई आंकड़े को पार नहीं कर पाए थे। इन दोनों ही चुनावों में आरजेडी विपक्ष में रही या गठबंधन का हिस्सा होने के बावजूद मुख्यमंत्री का पद हासिल नहीं कर पाई थी।

बिहार में 60 प्रतिशत से कम मतदान

2005 में 45.85 प्रतिशत मतदान के साथ नीतीश कुमार और एनडीए सरकार बनी थी।

2010 में 52.01 प्रतिशत मतदान से नीतीश कुमार और एनडीए की सरकार बनी थी।

2015 में 55.09 प्रतिशत मतदान से नीतीश कुमार व महागठबंधन की सरकार बनी थी

2020 में 57.29 प्रतिशत मतदान से नीतीश कुमार और एनडीए की सरकार बनी थी।

तेजस्वी यादव बनेंगे बिहार के सीएम

उसके बाद 2020 के चुनाव में मतदान 57.29 प्रतिशत रहा था। तब आरजेडी सबसे बड़ी पार्टी बनकर भी एक बार फिर से सरकार नहीं बना पाई। बिहार के चुनावी इतिहास के ये आंकड़े उच्च मतदाता भागीदारी आमतौर पर सत्ता विरोधी लहर (Anti-Incumbency) और बदलाव का संकेत दे रहे है। जिसका फायदा आरजेडी को मिलता रहा है। बिहार में मतदान संपन्न हो चुका है। इस बार रिकॉर्ड 68.79 प्रतिशत वोट पड़े है। इस पैटर्न को देखते हुए आरजेडी नेता तेजस्वी यादव और उनके गठबंधन के लिए 60 प्रतिशत से अधिक मतदान शुभ संकेत है। जो उनके लिए बिहार की सत्ता की राह आसान करता दिख रहा है। इस संयोग को देंखे, तो एक बार फिर से बिहार की सत्ता में लालू परिवार की वापसी हो सकती है।

बिहार मेें 1990 से 2025 तक सरकार

बिहार में 1990 के चुनाव में जनता दल की सरकार बनी थी। तब लालू यादव मुख्यमंत्री बने थे। पार्टी को 60% से अधिक मत मिले थे।

बिहार में 1995 के चुनाव में जनता दल की सरकार बनी थी। लालू यादव दोबारा सीएम बने थे। उनको 60% से अधिक मत मिले थे।

बिहार में 2000 के चुनाव में आरजेडी की सरकार बनी थी। तब राबड़ी देवी सीएम बनी थी। आरजेडी को 60% से अधिक मत मिले थे।

बिहार में फरवरी 2005 के परिणाम त्रिशंकु रहे थे। राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया गया था। उस चुनाव में 46.50 प्रतिशत मत पड़े थे।

बिहार में नवबंर 2005 के चुनाव में एनडीए की सरकार बनी थी। तब पहली बार नीतीश कुमार 45.85% मत के साथ सीएम बने थे।

बिहार में 2010 के चुनाव में एनडीए को बहुमत मिला था। तब दोबारा से नीतीश कुमार 52.66 प्रतिशत मत के साथ मुख्यमंत्री बने थे।

बिहार में 2015 के चुनाव में महागठबंधन की सरकार बनी थी। तब नीतीश कुमार 56.66% मत के साथ तीसरी बार मुख्यमंत्री बने थे।

बिहार में 2020 के चुनाव में एनडीए सरकार बनी थी। तब नीतीश कुमार 57.34 प्रतिशत मत के साथ चौथी बार मुख्यमंत्री बने थे।

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