मुस्लिमों के साथ खड़ा हुआ RSS! 'इस्लाम' के घर पहुंचे स्वयंसेवक, मिला भव्य स्वागत
Samalkha RSS Meeting 2026: समालखा में RSS की प्रतिनिधि सभा शुरू। मिडिल-ईस्ट युद्ध, मुस्लिम परिवारों से संपर्क और बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा पर संघ का बड़ा बयान।
Samalkha RSS Meeting 2026: हरियाणा के समालखा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की तीन दिवसीय 'अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा' की बैठक ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब संघ अपना शताब्दी वर्ष मना रहा है, जिससे इसकी अहमियत कई गुना बढ़ गई है। 1400 से ज्यादा प्रतिनिधियों की मौजूदगी में संघ ने न केवल अपनी संगठनात्मक ताकत दिखाई, बल्कि पहली बार वैश्विक राजनीति और मिडिल-ईस्ट में जारी भयंकर जंग पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव को लेकर संघ ने जो कहा, उसने कूटनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। इसके साथ ही, संघ ने अपने 'गृह संपर्क' अभियान के जरिए जो आंकड़े पेश किए हैं, वे चौंकाने वाले हैं।
मिडिल-ईस्ट की जंग पर संघ का 'इंटरनेशनल' स्टैंड
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान संघ के सह सरकार्यवाह सी.आर. मुकुंद ने मिडिल-ईस्ट के हालात पर गहरी चिंता जताई। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध संकट पर संघ ने पहली बार खुलकर बयान दिया है। मुकुंद ने कहा कि यह संकट जल्द से जल्द खत्म होना चाहिए और इसमें समझौतों की जरूरत है। उन्होंने भारत सरकार की कूटनीति पर भरोसा जताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री लगातार वैश्विक नेताओं के संपर्क में हैं। संघ ने यह भी साफ किया कि मिडिल-ईस्ट में रहने वाले सभी हिंदू संगठनों के साथ उनका संपर्क बना हुआ है। यह बयान दिखाता है कि संघ अब केवल घरेलू मुद्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक शांति और हिंदुओं की सुरक्षा पर भी कड़ी नजर रख रहा है।
हर घर दस्तक और मुस्लिम-ईसाई परिवारों का स्वागत
संघ ने इस बैठक में अपनी पहुंच के ऐसे आंकड़े पेश किए हैं जो किसी भी राजनीतिक या सामाजिक संगठन के लिए मिसाल हैं। संघ अब तक 10 करोड़ परिवारों और 3 लाख से ज्यादा गांवों तक पहुंच चुका है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि संघ अब केरल जैसे राज्यों में कम्युनिस्ट विचारधारा के गढ़ों में भी सेंध लगा रहा है। मुकुंद ने बताया कि संघ के स्वयंसेवक 55 हजार मुस्लिम और 54 हजार ईसाई परिवारों के घर भी गए, जहां उनका भव्य स्वागत हुआ। यह आंकड़ा उस धारणा को तोड़ता है कि संघ केवल एक विशेष वर्ग तक सीमित है। संघ अब हर गांव और हर घर तक अपनी विचारधारा पहुंचाने के लिए पूरी ताकत झोंक रहा है।
संगठनात्मक बदलाव और मणिपुर-बांग्लादेश पर चिंता
संघ अपनी भौगोलिक रचना और संगठन के ढांचे में बड़े बदलाव की तैयारी कर रहा है। सह सरकार्यवाह ने संकेत दिए कि आवश्यकतानुसार संगठन में नई नियुक्तियां और बदलाव किए जाएंगे। इसके अलावा, संघ ने मणिपुर की सुधरती स्थिति का स्वागत किया है और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बढ़ती सहजता की सराहना की है। वहीं, पड़ोसी देश बांग्लादेश को लेकर संघ ने सख्त लहजा अपनाते हुए वहां की सरकार से अपील की है कि वह हिंदू अल्पसंख्यकों के संरक्षण की जिम्मेदारी उठाए। बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ हो रही घटनाओं पर संघ का यह स्टैंड काफी कड़ा है, जो भविष्य की रणनीति का संकेत देता है।
शाखाओं में भारी वृद्धि और शताब्दी वर्ष का संकल्प
संघ की ताकत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पिछले एक साल में शाखाओं की संख्या में 5000 की भारी वृद्धि हुई है। शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में संघ ने अब तक 36 हजार हिंदू सम्मेलन किए हैं और अगले कुछ महीनों में कई और सम्मेलन आयोजित करने की योजना है। समालखा की इस बैठक में उन लोगों को भी श्रद्धांजलि दी गई जो अब हमारे बीच नहीं रहे, जिनमें कांग्रेस नेता शिवराज पाटिल और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अजित पवार जैसे नाम शामिल थे। कुल मिलाकर, समालखा की यह बैठक संघ के बढ़ते प्रभाव और उसके भविष्य के रोडमैप को साफ तौर पर दर्शा रही है।