पूजा का प्रसाद खाते ही मच गया हाहाकार, 100 से ज्यादा लोग पड़े बीमार, उल्टी-दस्त से पूरे गांव में दहशत!

Bihar Puja Prasad Food Poisoning: बिहार के सहरसा के सरडीहा गांव में सत्यनारायण पूजा का प्रसाद खाने के बाद 100 से ज्यादा लोग बीमार पड़ गए। ग्रामीणों में उल्टी, दस्त और पेट दर्द की शिकायत के बाद गांव में मेडिकल टीम पहुंची और इलाज शुरू किया गया।

Update:2026-08-08 21:00 IST

Bihar Puja Prasad Food Poisoning: बिहार के सहरसा जिले स्थित सिमरी बख्तियारपुर प्रखंड के सरडीहा गांव (मध्य टोला) में उस वक्त अचानक हड़कंप मच गया, जब धार्मिक अनुष्ठान के बाद एक भीषण हादसा सामने आया। गांव में गुरुवार की शाम को सत्यनारायण भगवान की पूजा का आयोजन बड़े ही धूमधाम से किया गया था। पूजा संपन्न होने के बाद उपस्थित सभी ग्रामीणों के बीच प्रसाद बांटा गया। प्रसाद ग्रहण करने के अगले दिन से ही लोगों के स्वास्थ्य में अचानक गिरावट दर्ज की जाने लगी। शुरुआत में कुछ ही लोगों को हल्की परेशानी महसूस हुई, लेकिन समय बीतने के साथ-साथ बीमारी ने विकराल रूप धारण कर लिया और देखते ही देखते कई परिवारों के सदस्य एक साथ पेट दर्द और उल्टी की चपेट में आ गए।

100 से अधिक ग्रामीण हुए फूड पॉइजनिंग के शिकार

जब तक ग्रामीण और परिजन कुछ समझ पाते, तब तक बीमारी की चपेट में आकर बीमार होने वालों का आंकड़ा 100 को पार कर चुका था। लगातार हो रहे उल्टी और दस्त के कारण मरीजों के शरीर में पानी की भारी कमी होने लगी, जिससे कई लोगों की स्थिति चिंताजनक बन गई। एक ही बस्ती में इतनी बड़ी संख्या में लोगों के एक साथ बीमार पड़ने से पूरे गांव में चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल कायम हो गया। इस घटना से पूरे इलाके में दहशत फैल गई और लोग अपने-अपने परिजनों की सलामती को लेकर बेहद चिंतित हो उठे।

मासूम बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक पड़े बीमार

फूड पॉइजनिंग की इस गंभीर घटना का असर किसी एक आयु वर्ग तक सीमित नहीं रहा। प्रसाद खाने वाले मासूम बच्चों, महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों सभी की सेहत पर इसका बहुत बुरा असर पड़ा है। ग्रामीणों ने बताया कि शुक्रवार सुबह से ही लोगों को पेट में तेज मरोड़ और घबराहट महसूस होने लगी थी। देखते ही देखते कई घरों में स्थिति इतनी खराब हो गई कि एक ही परिवार के 4 से 5 सदस्य बिस्तर पर पड़ गए। बीमारी के अचानक फैलने से पूरे टोले में सन्नाटा और खौफ पसर गया।

गांव में पहुंची डॉक्टरों की इमरजेंसी टीम

मामले की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीणों ने तुरंत अनुमंडल अस्पताल सिमरी बख्तियारपुर के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को पूरी घटना की सूचना दी। सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया और डॉक्टरों तथा पैरामेडिकल स्टाफ की एक विशेष मेडिकल टीम को तुरंत सरडीहा गांव के लिए रवाना किया गया। गांव पहुंचकर मेडिकल टीम ने बिना कोई देर किए प्रभावित मध्य टोला में कैंप लगाया और मरीजों का इलाज शुरू कर दिया। स्वास्थ्यकर्मी अब घर-घर जाकर एक-एक मरीज की शारीरिक जांच कर रहे हैं और उन्हें जरूरी दवाइयां तथा ओआरएस के घोल बांट रहे हैं।

गंभीर मरीजों पर रखी जा रही नजर

मेडिकल टीम द्वारा उन मरीजों पर विशेष रूप से निगरानी रखी जा रही है, जिनकी हालत डिहाइड्रेशन के कारण ज्यादा गंभीर हो गई है। डॉक्टरों की टीम गांव में ही लगातार बनी हुई है ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। वहीं दूसरी ओर, स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कई ग्रामीण अपने बीमार परिजनों को निजी गाड़ियों से नजदीकी निजी क्लीनिकों और अस्पतालों में ले जाकर भी भर्ती करा रहे हैं। स्वास्थ्य अधिकारी लगातार गांव की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और दवाओं की कोई कमी न हो, इसका पूरा ध्यान रख रहे हैं।

स्वास्थ्य विभाग जांच में जुटा

इस बड़े हादसे के बाद स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन पूरी तरह से सतर्क हो गया है। प्राथमिक जांच में सभी मरीजों में फूड पॉइजनिंग के स्पष्ट लक्षण पाए गए हैं। ग्रामीणों का भी यही कहना है कि पूजा का वही प्रसाद खाने के बाद से ही सभी की तबीयत बिगड़ी है। डॉक्टरों की टीम यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि प्रसाद बनाने में इस्तेमाल की गई सामग्री में खराबी थी या दूषित पानी के कारण यह संक्रमण फैला। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है और सभी मरीजों को बेहतर इलाज मुहैया कराया जा रहा है।

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