UPI पेमेंट पर लगेगा चार्ज या नहीं? सरकार ने किया साफ, आम यूजर को बड़ी राहत

UPI Charges: UPI चार्ज को लेकर सरकार ने स्थिति साफ कर दी है। आम यूजर से UPI पेमेंट पर कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। ज्यादातर मर्चेंट ट्रांजेक्शन भी फ्री रहेंगे, जबकि MDR पर फैसला बाद में होगा।

Update:2026-08-08 20:58 IST

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UPI Charges: साल 2016 में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी यूपीआई (UPI) शुरू होने के बाद डिजिटल पेमेंट (Digital Payment) ने लेनदेन को बेहद आसान बना दिया है। आज मोबाइल से कुछ ही सेकेंड में एक खाते से दूसरे खाते में पैसा भेजा जा सकता है। लेकिन यूपीआई शुरू होने के करीब 10 साल बाद अब इसके पेमेंट पर चार्ज (UPI Charges) लगाए जाने की चर्चा ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है।

जब से यूपीआई पर संभावित शुल्क की चर्चा शुरू हुई है, सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इस चार्ज का खर्च कौन उठाएगा। इस सवाल पर पहले नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया यानी एनपीसीआई (NPCI) की ओर से स्थिति साफ की गई और अब सरकार ने भी यूपीआई पेमेंट पर चार्ज को लेकर तस्वीर स्पष्ट कर दी है।

सरकार ने साफ कहा है कि यूपीआई से भुगतान करने वाले आम यूजर से कोई ट्रांजेक्शन चार्ज (Transaction Charge) नहीं लिया जाएगा। इसके साथ ही ज्यादातर मर्चेंट ट्रांजेक्शन (Merchant Transactions) भी फ्री रहेंगे। अगर भविष्य में यूपीआई पर एमडीआर यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू किया जाता है तो यह सिर्फ कुछ बड़े या चुनिंदा लेनदेन पर ही मामूली शुल्क के रूप में लगाया जाएगा।

अपनों को पैसा भेजने पर भी नहीं लगेगा चार्ज

सरकार ने साफ किया है कि यूपीआई से एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को पैसा भेजता है तो इसके लिए कोई शुल्क नहीं देना होगा। यानी सभी पी2पी ट्रांजेक्शन (P2P Transactions) फ्री रहेंगे।

इसका मतलब है कि अगर कोई व्यक्ति अपने परिवार के सदस्य, दोस्त या किसी दूसरे व्यक्ति के यूपीआई खाते में पैसा भेजता है तो उस लेनदेन के लिए उससे कोई ट्रांजेक्शन चार्ज नहीं लिया जाएगा।

मर्चेंट यानी दुकानदारों के लिए भी यूपीआई के ज्यादातर लेनदेन फ्री रहेंगे। सरकार के मुताबिक भविष्य में अगर एमडीआर लागू किया जाता है तो इसे सभी दुकानदारों या सभी यूपीआई ट्रांजेक्शन पर एक साथ लागू नहीं किया जाएगा।

आखिर क्या है MDR और कैसे लगेगा चार्ज?

एमडीआर यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट वह शुल्क है जो डिजिटल भुगतान के दौरान मर्चेंट से लिया जाता है। यूपीआई पर इसी एमडीआर को लेकर पिछले कुछ समय से चर्चा चल रही है।

सरकार के मुताबिक यूपीआई पर एमडीआर के लिए एक निश्चित सीमा यानी थ्रेशॉल्ड (Threshold) तय की जाएगी। इसके बाद अगर किसी तरह का शुल्क लगाया जाता है तो वह मामूली होगा। सरकार ने यह भी साफ किया है कि यह शुल्क डेबिट और क्रेडिट कार्ड पर लगने वाले एमडीआर (Debit and Credit Card MDR) से काफी कम होगा।

इसका सीधा मतलब यह है कि सभी दुकानदारों और सभी यूपीआई ट्रांजेक्शन पर एक साथ कोई चार्ज नहीं लगाया जाएगा। शुल्क किन लेनदेन पर और किस दर से लागू होगा, इसका फैसला आगे की प्रक्रिया पूरी होने के बाद किया जाएगा।

संसद से बिल पास होने के बाद तय होगा पूरा सिस्टम

यूपीआई पर एमडीआर कैसे लागू होगा, इसका अंतिम फैसला संसद से संबंधित बिल पास होने के बाद किया जाएगा। सरकार ने इसके लिए पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट (Payment and Settlement Systems Act) में बदलाव का प्रस्ताव रखा है।

सरकार का कहना है कि अभी एमडीआर को लेकर अंतिम फैसला नहीं हुआ है। संसद से टैक्सेशन एंड अदर लॉज यानी टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल, 2026 (Taxation and Other Laws Amendment Bill, 2026) पास होने के बाद आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।

अभी तय नहीं, कितना होगा MDR

यूपीआई भुगतान पर एमडीआर लगाया जाए या नहीं और अगर लगाया जाए तो इसकी दर कितनी हो, इस पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। यह फैसला एनपीसीआई की अध्यक्षता वाली यूपीआई एंड सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी (UPI and Services Steering Committee) करेगी।

यानी फिलहाल आम नागरिकों को यूपीआई से भुगतान करने पर किसी तरह के शुल्क को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यूपीआई आम नागरिकों के लिए फ्री रहेगा और रोजमर्रा के यूपीआई पेमेंट पर नागरिकों से चार्ज लेने की कोई योजना नहीं है।

सरकार ने की फर्जी जानकारी से बचने की अपील

यूपीआई पर चार्ज को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच सरकार ने लोगों से अपील की है कि वह सिर्फ आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें। सरकार के मुताबिक यूपीआई से जुड़े किसी भी बदलाव को लेकर जानकारी वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance), भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई (RBI) और एनपीसीआई की आधिकारिक जानकारी से ही ली जानी चाहिए।

सरकार ने लोगों से बिना पुष्टि वाले मैसेज (Unverified Messages) और दावों को आगे नहीं भेजने की अपील भी की है। यानी सोशल मीडिया या मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर यूपीआई चार्ज को लेकर आने वाली किसी भी जानकारी को आधिकारिक पुष्टि के बिना सही नहीं माना जाना चाहिए।

आखिर क्यों पड़ी UPI पर कानून में बदलाव की जरूरत? 

यूपीआई का इस्तेमाल लगातार तेजी से बढ़ रहा है। इसके साथ ही साइबर सिक्योरिटी (Cyber Security), फ्रॉड रोकने (Fraud Prevention) और तकनीकी ढांचे (Technology Infrastructure) को मजबूत बनाए रखने के लिए लगातार निवेश की जरूरत पड़ रही है।

सरकार का कहना है कि सिर्फ सरकारी सब्सिडी (Government Subsidy) के भरोसे यूपीआई का अगला विस्तार लंबे समय तक संभव नहीं है। यूपीआई को मजबूत और टिकाऊ बनाए रखने के लिए आत्मनिर्भर और टिकाऊ रेवेन्यू मॉडल (Sustainable Revenue Model) जरूरी है।

इसी वजह से यूपीआई के भविष्य के लिए एक ऐसा मॉडल तैयार करने की जरूरत महसूस की जा रही है, जिससे इसके तकनीकी ढांचे, सुरक्षा और बढ़ते इस्तेमाल से जुड़ी लागत को लंबे समय तक संभाला जा सके।

जुलाई में UPI से हुए 2,366 करोड़ ट्रांजेक्शन

यूपीआई के बढ़ते इस्तेमाल का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जुलाई 2026 में यूपीआई से 2,366 करोड़ ट्रांजेक्शन (UPI Transactions) हुए। इन ट्रांजेक्शन की कुल वैल्यू करीब 29.9 लाख करोड़ रुपये रही।

यूपीआई अब सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। इस समय इसका इस्तेमाल 11 विदेशी देशों (11 Foreign Countries) में भी हो रहा है। ऐसे में यूपीआई का नेटवर्क और इसका इस्तेमाल दोनों लगातार बढ़ रहे हैं।

सरकार के सामने अब चुनौती यह है कि आम लोगों के लिए यूपीआई को फ्री रखते हुए इसके बढ़ते इस्तेमाल, साइबर सुरक्षा, फ्रॉड रोकने और तकनीकी ढांचे पर होने वाले खर्च को लंबे समय तक कैसे संभाला जाए। फिलहाल सरकार ने इतना साफ कर दिया है कि आम यूजर से यूपीआई पेमेंट के लिए कोई चार्ज नहीं लिया जाएगा और रोजमर्रा के यूपीआई भुगतान फ्री रहेंगे।

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