लेफ्ट, कांग्रेस और VCK सब साथ, फिर भी शपथ से क्यों दूर हैं Vijay? समझिए Tamil Nadu के इस सत्ता संघर्ष की असली वजह
Vijay CM oath Crisis Tamil Nadu: तमिलगा वेत्री कझगम के नेता विजय की पार्टी राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बन चुकी है। वे कई बार राज्यपाल से मुलाकात कर चुके हैं, लेकिन बहुमत हासिल करने की चुनौती अब भी बनी हुई है।
Vijay CM oath Crisis Tamil Nadu: तमिलनाडु की राजनीति में सुपरस्टार विजय चंद्रशेखर जोसेफ की एंट्री किसी ब्लॉकबस्टर फिल्म के क्लाइमेक्स जैसी नजर आ रही है। अपनी पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) के साथ चुनावी मैदान में उतरे विजय ने वह कारनामा कर दिखाया है, जो कभी एमजीआर और करुणानिधि जैसे दिग्गजों के लिए भी शुरुआती दौर में मुमकिन नहीं था। हालांकि, ऐतिहासिक जीत दर्ज करने के बावजूद विजय के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने का रास्ता कांटों भरा साबित हो रहा है। राज्य की दो बड़ी ताकतें, डीएमके (DMK) और एआईएडीएमके (AIADMK), विजय के विजय रथ को रोकने के लिए अपनी पूरी सियासी बिसात बिछा चुकी हैं, जिससे बहुमत साबित करने की चुनौती और भी पेचीदा हो गई है।
विजय की पार्टी TVK ने यह चुनाव किसी भी गठबंधन के बिना अकेले लड़ा था और 108 सीटों पर शानदार जीत हासिल की। इस जीत ने तमिलनाडु में दशकों से चले आ रहे द्रविड़ पार्टियों के वर्चस्व को हिलाकर रख दिया है। हालांकि, 234 सदस्यीय विधानसभा में सरकार बनाने के लिए जरूरी 118 सीटों के जादुई आंकड़े से पार्टी अब भी दूर है। तकनीकी पेच यह है कि विजय खुद दो सीटों से चुनाव जीते हैं, जिसके कारण उन्हें एक सीट छोड़नी होगी। इस स्थिति में TVK के पास प्रभावी रूप से 107 विधायक ही रह जाएंगे और सदन में बहुमत का आंकड़ा 117 पर टिक जाएगा। इसी फासले को पाटने के लिए अब तमिलनाडु की सियासत में जबरदस्त जोड़-तोड़ का दौर चल रहा है।
कांग्रेस और वामपंथी दलों का साथ, बदला सत्ता का समीकरण
सत्ता के इस संघर्ष में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब कांग्रेस ने अपनी पुरानी सहयोगी डीएमके का हाथ छोड़ TVK को समर्थन देने का ऐलान किया। 5 मई की रात हुए इस फैसले के बाद कांग्रेस के 5 विधायकों का साथ मिलते ही विजय का आंकड़ा 112 तक पहुंच गया। हालांकि, कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि यह समर्थन तभी बरकरार रहेगा जब विजय भाजपा जैसी हिंदुत्ववादी राजनीति करने वाली पार्टियों से दूरी बनाए रखेंगे। इसके तुरंत बाद 8 मई को वामपंथी दलों यानी सीपीआई और सीपीआई (एम) ने भी अपने 2-2 विधायकों के साथ विजय को समर्थन देने की औपचारिक घोषणा कर दी। इसके अलावा वीसीके (VCK) और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के समर्थन के बाद कागजों पर विजय के पास बहुमत का आंकड़ा पूरा होता दिख रहा है।
राजभवन में अटकी फाइल और शपथ ग्रहण की अनिश्चितता
बहुमत के लिए जरूरी समर्थन पत्र जुटाने के बाद भी राजभवन से अब तक हरी झंडी नहीं मिली है। राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर से विजय तीन बार मुलाकात कर चुके हैं, लेकिन सरकार बनाने का आधिकारिक निमंत्रण अभी प्रतीक्षित है। TVK खेमे के भीतर शनिवार सुबह 11 बजे शपथ ग्रहण समारोह होने की चर्चाएं जोरों पर हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से इसकी पुष्टि नहीं की गई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राज्यपाल समर्थन देने वाले विधायकों की सूची और उनकी निष्ठा का सूक्ष्मता से परीक्षण कर रहे हैं, ताकि भविष्य में किसी भी संवैधानिक संकट से बचा जा सके।
पुरानी प्रतिद्वंद्विता और गठबंधन की मजबूरी
विजय की यह जीत इसलिए भी ऐतिहासिक मानी जा रही है क्योंकि उन्होंने पारंपरिक गठबंधन की राजनीति को नकारते हुए पुराने दिग्गजों को धूल चटाई है। विडंबना यह है कि जिस व्यवस्था और जिन दलों के खिलाफ उन्होंने अपना मोर्चा खोला था, आज सरकार चलाने के लिए उन्हें उन्हीं के समर्थन की जरूरत पड़ रही है। डीएमके अब विपक्ष की भूमिका में है और उसके कई पुराने साथी विजय के पाले में जा चुके हैं। कांग्रेस द्वारा दशकों पुरानी दोस्ती तोड़कर विजय के साथ आना राज्य की राजनीति में एक नए युग की आहट है। अब पूरी नजरें राज्यपाल के अगले कदम पर टिकी हैं कि वह कब सुपरस्टार से मुख्यमंत्री बनने जा रहे विजय को शपथ के लिए आमंत्रित करते हैं।