Suvendu Adhikari: जय श्री राम के नारे लगा रहे थे समर्थक तभी शुभेंदु ने करा दिया चुप, शपथ लेते ही क्यों बदले अधिकारी के तेवर?

Suvendu Adhikari stopped Jai Shri Ram slogans: शपथ लेते ही शुभेंदु अधिकारी के बदले तेवर ने सबको चौंका दिया। ‘जय श्री राम’ के नारे लगते ही समर्थकों को क्यों कराया चुप? जानिए बंगाल के नए मुख्यमंत्री के इस बड़े संदेश और टैगोर की धरती से जुड़ी पूरी कहानी।

Update:2026-05-10 13:20 IST

Suvendu Adhikari stopped Jai Shri Ram slogans: पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज एक नया और बेहद चौंकाने वाला अध्याय लिखा गया। कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में भव्य समारोह के बीच पश्चिम बंगाल के नौवें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के तुरंत बाद, शुभेंदु अधिकारी ने जो किया उसकी चर्चा अब पूरे देश में हो रही है। मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालते ही वे सीधे विश्वविख्यात कविगुरु रवींद्रनाथ टैगोर के पैतृक आवास 'जोरासांको ठाकुरबाड़ी' पहुंचे। लेकिन वहां जो हुआ, उसने सबको हैरान कर दिया। जैसे ही शुभेंदु वहां पहुंचे, उनके उत्साही समर्थकों ने 'जय श्री राम' के नारे लगाने शुरू कर दिए। इस पर मुख्यमंत्री ने तुरंत हस्तक्षेप किया और अपने समर्थकों को कड़े लहजे में टोकते हुए नारेबाजी बंद करने को कहा।

"यह राजनीति का समय नहीं": समर्थकों को मुख्यमंत्री की दो टूक

ठाकुरबाड़ी परिसर में जब भाजपा कार्यकर्ता और समर्थक जोश में आकर धार्मिक और राजनीतिक नारे लगा रहे थे, तब मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने उन्हें स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा, "यह 'जय श्री राम' कहने की जगह नहीं है। यहां केवल 'कविगुरु' का नाम गूंजना चाहिए।" अधिकारी ने जोर देकर कहा कि चुनाव का दौर अब खत्म हो चुका है और मुख्यमंत्री के रूप में अब वे किसी एक पार्टी के नहीं बल्कि राज्य के हर नागरिक के हैं। उन्होंने समर्थकों को याद दिलाया कि यह समय राजनीतिक खींचतान का नहीं, बल्कि राज्य के पुनर्निर्माण का है। उनके इस बदले हुए और गंभीर रुख ने यह साफ कर दिया कि उनकी सरकार अब बंगाल की संस्कृति और मर्यादा को सर्वोपरि रखेगी।

कविगुरु के चरणों में नवाया शीश: संस्कृति की नई शुरुआत

शुभेंदु अधिकारी का ठाकुरबाड़ी दौरा राजनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रवींद्रनाथ टैगोर की 166वीं जयंती के अवसर पर उन्होंने गुरुदेव की प्रतिमा के सामने घुटने टेककर अपना माथा जमीन से छुआ। यह दृश्य भावुक करने वाला था, जो यह संदेश दे रहा था कि बंगाल की नई सरकार अपनी जड़ों और बंगाली अस्मिता की ओर लौट रही है। पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि बंगाल और बंगाली संस्कृति को गुरुदेव की चेतना और आदर्शों के रास्ते पर ही चलना होगा। उन्होंने राज्य की शिक्षा और संस्कृति को हुए पिछले नुकसान पर गहरी चिंता जताई और विकास के लिए समाज के हर वर्ग को साथ चलने का आह्वान किया।

पुरानी यादें और काली चाय: जब अपनी यूनिवर्सिटी पहुंचे शुभेंदु

इस दौरे का एक खास और व्यक्तिगत पहलू भी रहा। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी रवींद्र भारती विश्वविद्यालय (RBU) के पूर्व छात्र रहे हैं, जहां से उन्होंने पर्यावरण अध्ययन में मास्टर डिग्री हासिल की थी। मुख्यमंत्री बनने के बाद जब वे अपने पुराने संस्थान पहुंचे, तो माहौल काफी आत्मीय हो गया। उन्होंने विश्वविद्यालय की कुलपति सोनाली चक्रवर्ती बनर्जी और अन्य अधिकारियों से मुलाकात की। प्रशासन के विशेष अनुरोध पर वे 'बिचित्रा भवन' भी गए। वहां उन्होंने अपनी पुरानी यादें ताजा कीं और बड़े ही सादगीपूर्ण अंदाज में विश्वविद्यालय परिवार के साथ काले नमक वाली 'निमकी' और काली चाय का आनंद लिया।

बदले हुए बंगाल की नई उम्मीद

शुभेंदु अधिकारी के इस पहले कदम ने विरोधियों और समर्थकों, दोनों को ही सोचने पर मजबूर कर दिया है। शपथ ग्रहण के तुरंत बाद धार्मिक नारों से दूरी बनाना और टैगोर की विरासत को सम्मान देना यह दर्शाता है कि भाजपा सरकार अब 'सबका साथ, सबका विकास' के मंत्र को बंगाली सांस्कृतिक रंग में रंगने की तैयारी कर चुकी है। मुख्यमंत्री का यह व्यवहार बताता है कि आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति केवल नारों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसमें शिक्षा, संस्कृति और आपसी भाईचारे को प्रमुखता दी जाएगी। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि शुभेंदु अधिकारी गुरुदेव के आदर्शों को शासन के फैसलों में किस तरह उतारते हैं।

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